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बॉलीवुड में क्यों जोर पकड़ रहा है सीक्वल और रीमेक का ट्रेंड? जानिए इस मायाजाल पर क्या बोले फिल्म क्रिटिक्स

बॉलीवुड में इन दिनों ओरिजिनल कंटेंट के फ्लॉप होने के डर से सीक्वल और फ्रेंचाइजी फिल्मों की बाढ़ आ गई है. 'आवारापन 2' की सफलता और 'दृश्यम 3', 'स्त्री 3', 'तुंबाड 2' की अनाउंसमेंट के बीच जानिए फिल्म क्रिटिक्स का क्या कहना है.

बॉलीवुड में क्यों जोर पकड़ रहा है सीक्वल और रीमेक का ट्रेंड? जानिए इस मायाजाल पर क्या बोले फिल्म क्रिटिक्स
Image Credit: Sequel movie

हिंदी सिनेमा इन दिनों एक बहुत बड़े बदलाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है. एक तरफ जहां नए और अनोखे सब्जेक्ट्स पर बनी फिल्में सिनेमाघरों में दर्शक जुटाने के लिए संघर्ष कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सीक्वल और फ्रेंचाइजी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर करोड़ों की कमाई कर रही हैं. निर्माताओं और बड़े सुपरस्टार्स के लिए अब ओरिजिनल कहानी पर दांव लगाना किसी बड़े खतरे से कम नहीं लग रहा है. फ्लॉप के डर से बचने के लिए बॉलीवुड अब सेफ्टी नेट यानी सीक्वल फिल्मों की तरफ तेजी से भाग रहा है.

भारतीय सिनेमा जगत में आज के दौर में फिल्मों के निर्माण का तरीका और सोच पूरी तरह बदल चुकी है. निर्माताओं और प्रोडक्शन हाउसेस पर यह दबाव रहता है कि फिल्म पहले दिन से ही थिएटर्स में नोट छापे. इस वजह से ओरिजिनल स्क्रिप्ट के बजाय पहले से ही हिट हो चुकी फिल्मों के पार्ट-2 या पार्ट-3 बनाने की होड़ लगी हुई है. बड़े-बड़े स्टार्स भी अब नई कहानी वाली फिल्मों का रिस्क लेने से कतरा रहे हैं और वे अपनी स्थापित फ्रेंचाइजी के जरिए ही थिएटर्स तक दर्शकों को खींचना चाहते हैं.

ओरिजिनल कहानियों का बुरा हाल, फ्लॉप का डर

अगर हालिया ट्रेंड पर नजर डालें तो साफ पता चलता है कि बिना किसी बैकग्राउंड या बिना किसी फ्रेंचाइजी नेम वाली फिल्में बॉक्स ऑफिस पर टिक नहीं पा रही हैं. हाल ही में रिलीज हुई 'बंटवारा 1947' जैसी भारी-भरकम बजट और गंभीर विषय पर बनी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई. दर्शकों ने इस फिल्म को पूरी तरह नकार दिया. इसके विपरीत जब 'आवारापन 2' बड़े पर्दे पर आई तो उसे दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की. इसने यह साफ कर दिया कि दर्शक जाने-पहचाने किरदारों को दोबारा देखने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

लाइन में लगी हैं बैक टू बैक सीक्वल फिल्में

आने वाले महीनों और सालों में भी बॉलीवुड का यह सीक्वल ट्रेंड थमने वाला नहीं है. बॉलीवुड के गलियारों में अब सिर्फ फ्रेंचाइजी फिल्मों की ही चर्चा है. अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित सस्पेंस थ्रिलर 'दृश्यम 3' इस साल 2 अक्टूबर को थिएटर्स में तहलका मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है. इसके अलावा हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स की सुपरहिट फिल्म 'स्त्री 3' की रिलीज डेट को लेकर भी मेकर्स ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. वहीं कल्ट हॉरर फिल्म 'तुंबाड 2' का ऐलान होते ही फैंस के बीच जबरदस्त एक्साइटमेंट देखा जा रहा है. ये तमाम बड़ी फिल्में यह साबित करती हैं कि मेकर्स अब सिर्फ टेस्टेड फॉर्मूले पर ही खेल रहे हैं.

फिल्म क्रिटिक्स का क्या है कहना?

फिल्म क्रिटिक अमित भाटिया ने बॉलीवुड में फ्रेंचाइजी फिल्मों, रीमेक और दर्शकों की पसंद पर अपनी बेबाक राय दी है. उन्होंने बताया कि किस तरह मेकर्स नॉस्टेल्जिया के दम पर कमाई कर रहे हैं और किसी फिल्म की सफलता के पीछे असली वजह क्या होती है. अमित भाटिया के मुताबिक, प्रोड्यूसर्स फ्रेंचाइजी का इस्तेमाल सिर्फ पैसे कमाने के लिए कर रहे हैं. 'आवारापन 2' में भी पुरानी फिल्म के कुछ सीन और म्यूजिक का इस्तेमाल किया गया, जिसके दम पर फिल्म ने कलेक्शन किया. यही हाल 'हॉन्टेड 3D' का भी था; फिल्म बेहद खराब थी, लेकिन पहली फिल्म के जबरदस्त नॉस्टेल्जिया के कारण लोग इसे देखने थिएटर पहुंचे. मेकर्स के पास नए कॉन्सेप्ट्स की कमी है, इसलिए वे इसी नॉस्टेल्जिया को भुनाने में लगे हैं.

फिल्म 'बंटवारा 1947' के न चलने का मुख्य कारण बताते हुए अमित भाटिया ने कहा कि सनी देओल की छवि एक बेहद मजबूत हिंदू या सिख कैरेक्टर की रही है. ऐसे में दर्शकों के लिए उन्हें मुस्लिम किरदार में स्वीकार करना काफी मुश्किल था और दर्शक इसे पचा नहीं पाए.

"फिल्म में अच्छा कंटेंट जरूरी"

सीक्वल और रीमेक के गणित पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि फिल्में ब्रांड रिकॉल और नॉस्टेल्जिया के भरोसे ही चलती हैं. आज अच्छी फिल्में न बनने की वजह से लोग थिएटर में सिर्फ पुरानी यादों का अनुभव लेने जा रहे हैं. 'दृश्यम' का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भले ही यह मलयालम फिल्म की रीमेक थी, लेकिन अजय देवगन वाली हिंदी रीमेक ज्यादा चली. वजह यह थी कि '2 अक्टूबर को विजय सलगांवकर ने क्या किया था', इस बात को मेकर्स ने दर्शकों के दिमाग पर पूरी तरह से छाप दिया था. फिल्मों के प्रदर्शन पर अपनी बात खत्म करते हुए अमित भाटिया ने कहा कि फ्रेंचाइजी की पावर एक सीमा तक ही काम करती है; सिर्फ उसके दम पर पूरी फिल्म नहीं चलाई जा सकती. अगर फिल्म का कंटेंट अच्छा है और वो दर्शकों के साथ कनेक्ट कर जाती है, तो फिल्म जरूर चलती है.

Film Critic Amit Bhatia

 

मार्केटिंग और ब्रांड वैल्यू का बड़ा खेल

सीक्वल फिल्मों के सफल होने के पीछे केवल कहानी ही नहीं बल्कि मार्केटिंग स्ट्रेटेजी और ब्रांड वैल्यू भी एक बहुत बड़ी वजह है. आज के डिजिटल दौर में किसी भी फिल्म का ब्रांड नेम उसका सबसे बड़ा प्रमोशन बन जाता है. दर्शक ओटीटी के इस युग में तभी थिएटर्स तक आ रहे हैं जब उन्हें कुछ बहुत बड़ा, जाना-पहचाना या थ्रिलिंग लगे. फ्रेंचाइजी मूवीज दर्शकों को वो थिएटर एक्सपीरियंस देने का वादा करती हैं जिसकी वजह से लोग टिकट खिड़की तक खींचे चले आते हैं.

कुल मिलाकर देखा जाए तो बॉलीवुड में सीक्वल और फ्रेंचाइजी सिनेमा का यह दौर अभी लंबा चलने वाला है. 2 अक्टूबर को आ रही 'दृश्यम 3' और उसके बाद 'स्त्री 3' व 'तुंबाड 2' का भविष्य यह तय करेगा कि बॉलीवुड का यह सेफ दांव कितना टिकाऊ है. लेकिन यह भी सच है कि अगर बॉलीवुड को लंबे समय तक जिंदा रहना है तो सीक्वल के साथ-साथ ओरिजिनल कहानियों को भी सही बजट और सही मार्केटिंग के साथ आगे बढ़ाना ही होगा वरना एक वक्त के बाद दर्शक इन फ्रेंचाइजी से भी बोर हो सकते हैं.

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About the Author

Alkesh Kushwaha

Alkesh Kushwaha

अल्केश कुशवाहा एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है. वर्तमान में वे जी न्यूज हिंदी में चीफ सब-एडिटर के रूप में बॉलीवुड-वायरल सेक्शन संभाल रहे हैं. अल्केश की मुख्य विशेषज्ञता बॉलीवुड, एंटरटेनमेंट, वायरल सिनेमा ट्रेंड्स और सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव्स में है. साल 2012 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले अल्केश ने दैनिक भास्कर, हिन्दुस्तान टाइम्स, राजस्थान पत्रिका और NDTV जैसे देश के अग्रिम मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. अल्केश ने अपने करियर में अर्जुन रामपाल, ऋचा चड्ढा और राजपाल यादव जैसी कई दिग्गज बॉलीवुड हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यूज किए हैं. फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस एनालिसिस, सेलिब्रिटी गॉसिप्स और एंटरटेनमेंट ट्रेंड्स का इन-डेप्थ डेटा एनालिसिस करना उनका मजबूत पक्ष है. वे पाठकों तक बॉलीवुड जगत की हर छोटी-बड़ी खबर सटीक, निष्पक्ष और विश्लेषणात्मक तरीके से पहुंचाते हैं. आप अल्केश कुशवाहा से सीधे alkesh.kushwaha@zeemedia.com पर संपर्क कर सकते हैं.
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