Bigg Boss 20 में क्यों नहीं आ रहा पहले वाला मजा? कंटेस्टेंट में दम नहीं या कास्टिंग में कमी, आम्रपाली के बयान के बाद सलमान का तंज
Bigg Boss 20: बिग बॉस 20 के प्रीमियर के बाद से ही शो खबरों में छाया हुआ है, जिसके पीछे की वजह सिर्फ घर के अंदर होने वाला ड्रामा नहीं है, बल्कि इसके कंटेस्टेंट की कास्टिंग को लेकर हो रही चर्चा भी है. ऑडियंस की एक कैटेगरी ने इस सीजन की लाइन-अप को पिछले सीजनों की तुलना में कमजोर और बोरिंगी बताया है. खास तौर पर पॉपुलर और बड़े चेहरों की कमी को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं.
बिग बॉस 20 के शुरुआत होते ही पहले हफ्ते में घर के कंटेस्टेंट के बीच रिलेशन, कॉन्टोवर्सी और फाइट ने शो को कुछ हद तक संभाला, लेकिन कास्टिंग को लेकर शुरू हुई बहस अब तक खत्म नहीं हुई. अब वीकेंड के वार में होस्ट सलमान खान के बयान ने इस बहस को एक नया एंगल दे दिया है. वीकेंड के वार के दौरान सलमान खान ने आम्रपाली दुबे से पूछा कि क्या उन्हें बिग बॉस के घर में किसी चीज की कमी महसूस हो रही है? आम्रपाली ने इस सवाल का जवाब देते हुए इससे इनकार कर दिया, लेकिन इसके बाद सलमान ने जो बात कही, उसने पूरी कास्टिंग पर सवाल खड़े दिए.
सलमान खान ने मजाकिया अंदाज में कहा कि मेकर्स को कंटेस्टेंट चुनते समय बहुत सावधानी बरतने की कोशिश करते हैं. लेकिन कभी-कभी हमारे सिलेक्शन में कमी पड़ जाती है. इसके बाद उन्होंने कमी शब्द को लेकर चुटकी लेते हुए घर में एक-दो कमीन लोगों की जरूरत की बात भी कही.
बिग बॉस 20 में नहीं दिखी कोई खास पर्सनैलिटी
शो में सलमान की ये टिप्पणी भले ही हल्के-फुल्के अंदाज में कही गई हो, लेकिन इसे ऑडियंस की उस शिकायत से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें लगातार कहा जा रहा है कि इस बार घर में पहले जैसी मजबूत और तुरंत पहचान में आने वाली पर्सनैलिटीज कम देखने को मिल रही है. यहां सबसे बड़ा सवाल ये नहीं है कि बिग बॉस 20 के कंटस्टेंट बोरिंग हैं या नहीं. असली सवाल ये है कि क्या शो की पुरानी कास्टिंग प्लानिंग अब बदलती ऑडियंस की पसंद के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रही है?
बिग बॉस जैसे रियलिटी शो में किसी कंटेस्टेंट की पॉपुलैरिटी सिर्फ उसके सोशल मीडिया फॉलोअर्स या टीवी-फिल्मों में पहचान से तय नहीं होती. घर के भीतर उसकी पर्सनैलिटी, बातचीत का तरीका, गेम को जीतने की प्लानिंग, रिश्ते बनाने की ताकत और प्रेशर में उसका व्यवहार ज्यादा मायने रखता है. ऐसे में किसी बड़े नाम का शो में आना अपने आप में एंटरटेनमेंट की गारंटी नहीं है. दूसरी तरफ, कोई कम फेमस चेहरा घर के अंदर जाकर पूरे सीजन का सबसे पॉपुलर कंटेस्टेंट बन सकता है.
पॉपुलर फेस की कमी क्यों महसूस कर रही ऑडियंस?
इस सीजन में माही विज, आसिफ खान, अमन गांधी और आम्रपाली दुबे जैसे कलाकार हैं. इसके अलावा काजी तौकीर, ऋति तिवारी और यंग डीएसए जैसे सिंगर, यूट्यूबर स्काउटओपी, कंटेंट क्रिएटर अरिशफा खान और स्पोर्ट की दिग्गज मैरी कॉम भी इस लाइन-अप का हिस्सा हैं. यानी शो ने अलग-अलग एरिया से लोगों को शामिल करने की कोशिश की है. लेकिन ऑडियंस की शिकायत शायद नामों के नंबर से ज्यादा उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और आपसी केमिस्ट्री को लेकर है. बिग बॉस की ऑडियंस अक्सर ऐसे कंटेस्टेंट की उम्मीद करते हैं, जो पहले ही एपिसोड से अपनी अलग पहचान बना लें और घर की कहानी को आगे बढ़ाने में एक्टिव रोल प्ले करें.
कंटेस्टेंट हैं बोरिंग या ऑडियंस की बदली सोच?
किसी कंटेस्टेंट को बोरिंग कहना भी अपने आप में एक दिलचस्प सवाल है. बिग बॉस के पुराने सीजन में तेज-तर्रार बहस, झगड़े और बड़ी लड़ाई शो की पहचान बन गए थे. धीरे-धीरे लोगों की उम्मीद भी ऐसी ही पर्सनैलिटीज को देखने की बनती गई. लेकिन हर कंटेस्टेंट अगर लगातार लड़ता रहे या विवाद पैदा करे, तो क्या वो सच में अच्छा कंटेंट है? इस सीजन में ये भी देखने को मिल रहा है कि शांत रहने वाले या बिना जरूरत के लड़ाई कर अपनी जगह बनाने की कोशिश करने वाले कंटेस्टेंट को लेकर अलग राय है. ऐसे में हो सकता है कि समस्या कंटेस्टेंट के बोरिंग होने से ज्यादा ऑडियंस की बदली हुई सोच की भी है.
बिग बॉस को अब सिर्फ स्टार नहीं, ड्रामा चाहिए
बिग बॉस की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उसके कंटेस्टेंट रहे हैं, लेकिन आज के दौर में सिर्फ स्टार चेहरे शो को लंबे समय तक नहीं चला सकते. ऑडियंस अब कंटेस्टेंट की सोशल मीडिया प्रोफाइल, पुराने इंटरव्यू और उनके पर्सनल लाइफ के बारे में पहले से बहुत कुछ जानते हैं. इसलिए शो के अंदर कुछ नया देखने की उम्मीद ज्यादा होती है. एक कम पॉपुलर कंटेस्टेंट भी तब ऑडियंस का पसंदीदा बन सकता है, जब उसकी स्टोरी, स्ट्रगल या पर्सनैलिटी अनोखी हो. यही वजह है कि आने वाले हफ्तों में बिग बॉस 20 की असली परीक्षा होगी. क्या ये कंटेस्टेंट अपनी शुरुआती इमेज से बाहर निकलकर ऐसी स्टोरीज बना पाते हैं, जो लोगों को उनसे जोड़ दें या नहीं
सलमान के बयान ने मेकर्स के सामने भी खड़ा किया सवाल
सलमान खान के कमेंट को केवल एक मजाक समझकर नजरअंदाज करना आसान है, लेकिन इसके पीछे शो की एक बड़ी चुनौती दिखाई देती है. अगर होस्ट खुद कास्टिंग में कमी की बात कर रहे हैं, तो ऑडियंस के सवाल को पूरी तरह खारिज करना मुश्किल होगा. हालांकि, शो के पहले हफ्ते ने ये भी साबित किया है कि शुरुआत में कमजोर दिखने वाली कास्टिंग आगे चलकर मजबूत साबित हो सकती है. कंटेस्टेंट को घर के माहौल में घुलने-मिलने, रिश्ते बनाने और अपनी प्लानिंग सामने लाने में समय लगता है. इसलिए फिलहाल इस सीजन की पूरी कास्टिंग को सिर्फ पहले एक हफ्ते के आधार पर ट्रोल करना जल्दबाजी भी हो सकती है.
आगे तय होगा बोरिंग का टैग या बदलेगी कहानी
बिग बॉस 20 के लिए सबसे कमाल बात ये है कि अभी कहानी पूरी तरह खुली नहीं है. पहले हफ्ते की हलचल के बावजूद कास्टिंग पर उठे सवाल मेकर्स के लिए एक चुनौती बने हुए हैं. अब कंटेस्टेंट 2 के पास अपनी इमेज बदलने का मौका है. अगर आने वाले हफ्तों में रिश्ते मजबूत होते हैं, प्लानिंग सामने आती हैं और घर के भीतर नए रिश्ते और ग्रुप बनते हैं, तो यही बोरिंग कही जा रही कास्टिंग शो की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है. लेकिन अगर ड्रामा पैदा करने के लिए बार-बार बाहरी ट्विस्ट और टास्क पर टिके रहना पड़ा, तो सवाल फिर वहीं लौटेगा कि समस्या कंटेस्टेंट्स में थी या उन्हें चुनने के तरीके में?