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हमारे देश में ऐसे ऐक्टर बहुत कम मिलते हैं, जिनकी पहचान किसी एक रोल से इतनी गहरी जुड़ जाए कि रील और रियल लाइफ का फर्क ही खत्म हो जाए. करीब 40 साल पहले दूरदर्शन पर जब रामानंद सागर की ‘रामायण’ आई थी, तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि प्रभु राम का चेहरा हमेशा के लिए अरुण गोविल के नाम की पहचान बन जाएगा. आज इतने सालों के बाद वही कलाकार एक बार फिर रामकथा से जुड़ा नजर आ रहा है, लेकिन एक अलग किरदार के साथ. उन्होंने पर्दे पर रामकथा के तीन सबसे बड़े और खास किरदारों को निभाकर एक कमाल का रिकॉर्ड बनाया है.
पहले उन्होंने पर्दे पर मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम बनकर देश के करोड़ों लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई. इसके बाद लक्ष्मण का किरदार निभाकर भाई के प्यार और वफादारी की मिसाल दी और अब वे नितेश तिवारी की मेगा बजट फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम के पिता और राजा दशरथ का किरदार निभा रहे हैं. ये किसी एक्टर का अलग-अलग सिर्फ रोल निभाना भर नहीं है, बल्कि सिनेमा के जरिए पुरानी और नई पीढ़ी के बीच अपनी संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाने का एक बेहद खूबसूरत और जज्बाती सफर भी है. ये खबर सचमुच हर किसी का दिल छू लेने वाली है.

साल 1987 के दौर में हर संडे की सुबह जैसे पूरा देश थम सा जाता था. उस वक्त टीवी बहुत कम लोगों के घरों में होता था, पर जैसे ही ‘रामायण’ शुरू होने का शंख बजता, पूरा मोहल्ला किसी एक घर में सिमटकर हाथ जोड़े बैठ जाता था. अरुण गोविल जब स्क्रीन पर हल्की सी मुस्कान के साथ आते, तो लोगों को लगता साक्षात प्रभु राम ही सामने आ गए हों.
उनका शांत चेहरा और बोलने का सलीका लोगों के दिलों में ऐसे बसा कि वे एक्टर नहीं, भगवान ही मान लिए गए. बाहर निकलते तो लोग पैर छूते, औरतें आरती उतारतीं. शो में दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी ने भी कमाल का काम किया, पर अरुण गोविल को जो प्यार और पूजा मिली, उसने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया.

रामानंद सागर की ‘रामायण’ में भगवान राम बनकर घर-घर पूजे जाने वाले अरुण गोविल ने आगे चलकर एक ऐसा फैसला लिया, जिससे हर कोई हैरान रह गया. साल 1997 में डायरेक्टर वी. मधुसूदन राव की एक फिल्म आई थी, जिसका नाम था ‘लव कुश’. इस फिल्म में उन्होंने राम का रोल नहीं किया, बल्कि उनके छोटे भाई लक्ष्मण का किरदार निभाया था, जिस एक्टर को लोग सालों से बड़े भाई और भगवान राम के किरदार में पूजते आए थे.
उन्हें लक्ष्मण के रूप में देखना दर्शकों के लिए काफी अजीब और चौंकाने वाला था. भले ही ये फिल्म टीवी सीरियल जितनी कामयाब नहीं रही, लेकिन एक एक्टर के तौर पर अरुण गोविल के लिए ये बहुत बड़ा चैलेंज था. उन्होंने लक्ष्मण के गुस्से, प्यार और त्याग वाले किरदार को भी पूरे दिल से निभाया. इस तरह उन्होंने एक ही कहानी के दो सबसे खास किरदारों को पर्दे पर बखूबी जीकर दिखाया.
करीब 30 साल बाद अरुण गोविल एक बार फिर ‘रामायण’ की दुनिया में एंट्री मारी. डायरेक्टर नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में अरुण गोविल को मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के पिता और राजा दशरथ के बेहद खास रोल के लिए चुना गया. इस बार रणबीर कपूर भगवान राम के किरदार में, साई पल्लवी माता सीता के रोल में और साउथ स्टार यश रावण के रूप में स्क्रीन पर नजर आ रहे हैं.
राजा दशरथ की कहानी एक ऐसे बेबस पिता की है, जो अपने वचनों और बेटे के प्यार के बीच बुरी तरह फंस जाता है. इस इमोशनल किरदार में अरुण गोविल को देखना दर्शकों के लिए वाकई बेहद खास और यादगार रहेगा. ये फिल्म 5 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और इस फिल्म ने सिर्फ दो दिनों के अंदर 200 करोड़ से ज्यादा की कमाई भी कर ली है, लोग इस फिल्म को देखने के लिए सिनेमाघरों में बाहर लाइन लगाकर खड़े हैं.

अरुण गोविल का फिल्मी सफर सच में बहुत अनोखा रहा है. एक ही महाकाव्य से जुड़े तीन अलग किरदारों को परदे पर निभाना किसी भी एक्टर के लिए बहुत बड़ी बात है. पहले उन्होंने धारावाहिक ‘रामायण’ में राम बनकर एक आदर्श बेटे, पति और राजा की मर्यादा दिखाई थी. बाद में लक्ष्मण के रोल में भाई पर सब कुछ न्योछावर करने वाले रक्षक की भावना को भी जिया. अब फिल्म में राजा दशरथ बनकर उन्होंने उस लाचार पिता का दर्द परदे पर दिखाया, जिसके एक कड़े फैसले से श्रीराम, माता सीता और भैया लक्ष्मण को 14 साल का वनवास हुआ था.
सिनेमाघरों में जब आज के दौर के सबसे बेहतरीन एक्टर रणबीर कपूर राम के किरदार में दिखे और उनके सामने दशरथ बनकर अरुण गोविल खड़े हुए, तो हर दर्शक इमोशनल हो गया. एक तरफ नई पीढ़ी के राम थे और दूसरी तरफ वह चेहरा, जिसे लोगों ने सालों तक सचमुच भगवान मानकर हाथ जोड़े थे. ये सिर्फ फिल्म का एक सीन नहीं था, बल्कि पुरानी यादों, जज्बात और गहरी आस्था का सीधा संगम बन गया. वक्त बदला, तकनीक बदली, लेकिन अरुण गोविल और रामकथा का रिश्ता आज भी पहले जैसा ही अटूट बना हुआ है.