भाषा चुनें
  • Hindi
  • English
  • Marathi
  • Bengali
  • Tamil
  • Malayalam
  • Gujarati
  • Telugu
  • Kannada
  • Odisha
  • Z Bharat
  • ZEE PHH
  • ZEE Business
  • WION
राज्य चुनें
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्‍तीसगढ़
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • बिहार
  • झारखण्ड
  • राजस्‍थान
  • हिमाचल प्रदेश
  • हिन्दीEnglishमराठीবাংলাதமிழ்മലയാളംગુજરાતીతెలుగుಕನ್ನಡଓଡ଼ିଶାZ BharatPHHBusinessWION
  • facebookyoutubetwitterlinkedinwhatsapp
Zee News Hindi
App
Zee News Hindi
  • News
  • वीडियो
  • फोटोज़
  • रील्स
  • लाइव ब्लॉग
  • राज्य चुनें

Add Zee Business As A Preferred Source
App
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • LIVE टीवी
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • ज़ी न्यूज़ हिंदी
  • /मनोरंजन
  • /जलसा से लेकर प्रतीक्षा तक: महानायक अमिताभ बच्चन के बंगलों की वो कहानियां, जिनमें बसती है बच्चन परिवार की विरासत

जलसा से लेकर प्रतीक्षा तक: महानायक अमिताभ बच्चन के बंगलों की वो कहानियां, जिनमें बसती है बच्चन परिवार की विरासत

अमिताभ बच्चन के बंगले सिर्फ करोड़ों की दौलत नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी के गहरे पन्ने हैं. ‘जलसा’ से लेकर ‘प्रतीक्षा’ और ‘दशद्वार’ तक, हर घर के नाम के पीछे हरिवंश राय बच्चन की कलम और परिवार के जज्बात जुड़े हैं. चलिए आज आपको उनके इन आलीशान दीवारों के पीछे छिपे दिलचस्प किस्सों के बारे में बताते हैं.

Written ByVandana Saini
Published: Oct 24, 2026, 11:52 AM IST|Updated: Oct 24, 2026, 01:42 PM IST
joinshare
जलसा से लेकर प्रतीक्षा तक: महानायक अमिताभ बच्चन के बंगलों की वो कहानियां, जिनमें बसती है बच्चन परिवार की विरासत
Image Credit: अमिताभ बच्चन के आलीशान बंगलों के पीछे की कहानियां

About the Author

Vandana Saini

Vandana Saini

वंदना सैनी जी न्यूज में सब ए़डिटर हैं और पिछले 11 साल से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. कुछ समय तक उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल और पॉलिटिकल बीट पर काम किया. इसके बाद 2018 में उन्होंने इंडिया न्यूज में एंटरटेनमेंट बीट पर काम करना शुरू किया और पिछले 8 साल से लगातार में एंटरटेनमेंट बीट पर काम कर रही हैं. इस दौरान उन्होंने स्मार्ट हिंदुस्तान, पत्रिका और न्यूज 24 जैसे संस्थान के साथ काम किया और पिछले 2 साल से जी न्यूज के साथ काम कर रही हैं. उन्होंने दिल्ली से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद IGNOU से हिंदी में मास्टर्स किया. उन्हें पत्रकारिता के साथ कहानियां लिखने का भी शौक है. आप Vandana.saini@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
Read More

ट्रेंडिंग

  • न्यूज़
  • फोटो
  • वीडियो
ब्लास्ट की धमक से थर-थर कांप रहा टोंक! धमाके से खेतों और अन्नपूर्णा माता मंदिर पर गिर रहे पत्थर

ब्लास्ट की धमक से थर-थर कांप रहा टोंक! धमाके से खेतों और अन्नपूर्णा माता मंदिर पर गिर रहे पत्थर

2

नया नहीं है पीएम मोदी पर मल्लिकार्जुन खरगे का उल्टा-सीधा बोलना, जानें अपशब्दों की लंबी फेहरिस्त

3

मानहानि केस में राहुल गांधी बरी, अमित शाह पर टिप्पणी का था मामला, कोर्ट के बाहर कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न

4

JDU से निष्कासित अनंत सिंह को एक और बड़ा झटका, पत्नी नीलम देवी से छीना गया राज्यमंत्री का दर्जा

5

कैमूर के चातुर्मास महायज्ञ में आज शामिल होंगे CM सम्राट, जीयर स्वामी जी महाराज से लेंगे आशीर्वाद, सुरक्षा के है पुख्ता इंतजाम

logo
  • contact us
  • privacy policy
  • legal
  • investor info
  • advertise with us
© 1998-2026 Indiadotcom Digital Private Limited, All Rights Reserved.

मुंबई के जुहू में स्थित अमिताभ बच्चन के लग्जरी बंगले ‘जलसा’ को जब बम से उड़ाने की धमकी मिली, तो एक बार फिर सिक्योरिटी एजेंसियां और मीडिया हरकत में आ गए. हालांकि, बिग बी के लिए ये बंगला सिर्फ एक आलीशान चारदीवारी नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी के सबसे सुनहरे और यादगार पलों का साथी है. मुंबई की गलियों से लेकर दिल्ली के गुलमोहर पार्क और प्रयागराज की पुरानी सड़कों तक, बच्चन परिवार के पास कई प्रॉपर्टीज हैं. ये इमारतें सिर्फ ईंट-पत्थर और सीमेंट का ढांचा नहीं हैं, बल्कि इनमें बरसों का संघर्ष, बेहिसाब कामयाबी और कभी न मिटने वाली यादें बसी हैं.

इकोनॉमिक टाइम्स और मैजिकब्रिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चन परिवार का रियल एस्टेट पोर्टफोलियो जितना बड़ा है, उससे कहीं ज्यादा गहरा इसका जज्बाती रिश्ता है. मजेदार बात ये है कि इस परिवार ने अपने किसी भी घर का नाम यूं ही नहीं रख दिया. हर नाम के पीछे कोई न कोई विचार, पिता हरिवंश राय बच्चन की कोई मशहूर कविता या फिर जीवन से जुड़ा एक डीप इमोशन छिपा है. कहीं साहित्य की गहरी सोच झलकती है, तो कहीं परिवार के मजबूत रिश्तों का अहसास होता है. जब आप इन बंगलों के नाम से जुड़ी कहानियां सुनेंगे, तो आपको समझ आएगा कि ये परिवार अपनी मिट्टी और अपनी जड़ों से कितना जुड़ा हुआ है. 

Bachchan Family Homes

जलसा: फैंस का हुजूम और एक यादगार तोहफा

आज के दौर में ‘जलसा’ बच्चन परिवार के रहने का सबसे बड़ा ठिकाना है. पूरा परिवार एक साथ इसी घर में रहता है. जुहू में स्थित इस दो मंजिला आलीशान बंगले में अमिताभ बच्चन अपनी पत्नी जया बच्चन, बेटे अभिषेक बच्चन, बहू ऐश्वर्या राय और पोती आराध्या बच्चन के साथ रहते हैं. हर रविवार की शाम इस बंगले के बाहर का नजारा देखने लायक होता है, जब देश भर से आए हजारों फैंस का हुजूम अपने चहेते सितारे की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते हैं.

मैजिकब्रिक्स और मेंस वर्ल्ड इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले इस बंगले का नाम ‘मनसा’ हुआ करता था. बहुत कम लोग जानते हैं कि ये प्रॉपर्टी पहले मशहूर फिल्ममेकर एन.सी. सिप्पी के पास थी. बॉलीवुड के गलियारों में ये किस्सा काफी मशहूर है कि फिल्म ‘सत्ते पे सत्ता’ की जबरदस्त सक्सेस के बाद डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने ये बंगला अमिताभ बच्चन को तोहफे में दिया था. इस कहानी के कई रूप सुनने को मिलते हैं, लेकिन ये किस्सा आज भी चर्चा में ही रहता है.

वक्त बीतने के साथ ‘जलसा’ बच्चन परिवार के लिए सिर्फ एक रहने का ठिकाना नहीं रहा, बल्कि ये सपनों के शहर मुंबई का एक बड़ा कल्चरल लैंडमार्क बन चुका है. बॉलीवुड से जुड़े कई बड़े इवेंट, पारिवारिक खुशियां और ऐतिहासिक मीडिया इंटरव्यू इसी घर के आंगन में हुए हैं. ये बंगला अब किसी सुपरस्टार के घर से कहीं बढ़कर पूरे बच्चन परिवार की पहचान बन चुका है, जहां से बिग बी हर हफ्ते अपने चाहने वालों का हाथ हिलाकर अभिवादन करते हैं.

बच्चन फैमिली का फैमिली ग्रुप: जया भेजती हैं इमोशनल VIDEO, बिग बी को वाट्सऐप मैसेज देखने के लिए करना पड़ता है SMS 

प्रतीक्षा: बाबूजी की कविता और पहला आशियाना

‘जलसा’ से पहले ‘प्रतीक्षा’ बच्चन परिवार के इतिहास का सबसे जज्बाती और अनमोल बंगला माना जाता है. ये जुहू का वही पहला आशियाना था, जिसे अमिताभ और जया बच्चन ने अपने करियर के शुरुआती सक्सेस के दिनों में बड़े अरमानों के साथ खरीदा था. इसी घर के आंगन में श्वेता बच्चन और अभिषेक बच्चन की किलकारियां गूंजीं और वे खेलकर बड़े हुए. परिवार के उतार-चढ़ाव और संघर्ष के कई अहम दौर इसी घर की चौखट के गवाह रहे हैं.

इकोनॉमिक टाइम्स और इंडियाटाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बंगले का नामकरण खुद बिग बी के बाबूजी यानी डॉक्टर हरिवंश राय बच्चन ने किया था. इस नाम की इंस्पिरेशन उनकी अपनी एक मशहूर साहित्यिक पंक्ति से मिली थी, जिसमें उन्होंने लिखा था, ‘स्वागत सबके लिए है, पर नहीं है किसी के लिए ‘प्रतीक्षा’’. इस सादे से दिखने वाले नाम में बहुत गहरा जीवन-दर्शन छिपा हुआ था, जो इस घर को ईंट-पत्थर से अलग एक रूहानी रूप देता है.

इसी बंगले में बच्चन परिवार ने अपनी जिंदगी के कई बड़े त्योहार, हार-जीत एक साथ देखे. अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की शादी की रस्में भी इसी ऐतिहासिक बंगले के प्रांगण में पूरी हुई थीं. साल 2023 में अमिताभ बच्चन ने ये बेशकीमती बंगला अपनी बेटी श्वेता बच्चन को कानूनी तौर पर उपहार में सौंप दिया. इस तरह बाबूजी और मां तेजी बच्चन की यादों से संजोया गया ये आशियाना अब परिवार की अगली पीढ़ी के हाथों में पहुंच चुका है.

Amitabh Bachchan Houses

जनक: परिवार के कामकाज और फैसलों का केंद्र

जुहू इलाके में ही स्थित ‘जनक’ बच्चन परिवार की उन चुनिंदा प्रॉपर्टीज में से एक है, जिसका रहने के लिए नहीं, बल्कि प्रोफेशनल वर्क के लिए तैयार किया गया था. साल 2004 में खरीदे गए इस बंगले को लंबे समय से बच्चन परिवार के मैन ऑफिस और एडमिनिस्ट्रेशन एक्टिविटी के सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है. आज भी यहां अमिताभ बच्चन की टीम उनके रोजमर्रा के शेड्यूल और प्रोजेक्ट्स को मैनेज करती है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘जनक’ नाम अपने आप में बेहद खास और भारतीय परंपरा से जुड़ा है. संस्कृत और नॉर्मल हिंदी भाषा में ‘जनक’ का सीधा मतलब होता है ‘पिता’. बच्चन परिवार की संपत्तियों के नामों पर नजर डालें तो साफ झलकता है कि वे अपने रिश्तों और सांस्कृतिक प्रतीकों को बहुत अहमियत देते हैं. पिता के सम्मान और उनके साये को याद रखने के लिए ही इस ऑफिस का नाम जनक चुना गया.

ये बंगला भले ही जलसा या प्रतीक्षा की तरह आम लोगों और पर्यटकों के बीच ज्यादा चर्चा में न रहता हो, लेकिन पर्दे के पीछे इसका रोल बहुत बड़ा है. यहीं पर बिग बी और अभिषेक बच्चन की बड़ी बिजनेस से जुड़ी और प्रोफेशनल मीटिंग्स होती हैं. नई फिल्मों का स्क्रीप्लेस यहीं पढ़ा जाता है और कॉन्ट्रैक्ट यहीं साइन किए जाते हैं. परिवार के सभी प्रोफेशनल और बिजनेस रिलेटेड फैसले इसी घर में तय किए जाते हैं और आगे बढ़ते हैं. 

वत्स: रिश्तों का दुलार और खूबसूरत शांति

‘वत्स’ बच्चन परिवार की उन प्रॉपर्टीज में आता है, जो लाइमलाइट से काफी दूर रहती हैं. ये बंगला भी जुहू के उसी पॉश इलाके में मौजूद है, जहां परिवार के बाकी घर मौजूद हैं. हालांकि, इसके बारे में बहुत कम लोग और मीडिया जाती है. मेंस वर्ल्ड इंडिया और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रॉपर्टी को कई बार कमर्शियल तौर पर किराए पर दिया गया है, जिसमें एक नामी बैंक को लीज पर देना भी शामिल है.

‘वत्स’ शब्द का हिंदी और संस्कृत में बहुत ही प्यारा और कोमल मतलब होता है. इसका सीधा मतलब बछड़ा, छोटा बच्चा या संतान होता है. हमारी भारतीय परंपरा में ये शब्द हमेशा से प्यार, वात्सल्य और अपनेपन को दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. बच्चन परिवार ने जब इस आशियाने का नाम रखा, तो इसके पीछे भी अपने बच्चों और नई पीढ़ी के लिए वही गहरा दुलार और इमोशनल जुड़ाव छिपा हुआ था.

जहां एक तरफ अमिताभ बच्चन के ‘जलसा’ और ‘प्रतीक्षा’ के बाहर हमेशा लोगों की चहल-पहल और कैमरों की निगाहें टिकी रहती हैं. वहीं, ‘वत्स’ में बिल्कुल शांति बनी रहती है और भीड़-भाड़ से दूर रहता है. बावजूद इसके बच्चन परिवार के पूरे रियल एस्टेट साम्राज्य में इसका अपना एक अलग इकोनॉमिक और रणनीतिक इम्पोर्टेंस है. ये प्रॉपर्टी दिखाती है कि परिवार अपने इन्वेस्टमेंट को बहुत ही सोच-समझकर यूज करती है. 

Amitabh Bachchan Luxury Bungalow Jalsa

जलसा का विस्तार: बढ़ती जरूरतों के लिए नया ठिकाना

साल 2013 में अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘जलसा’ के ठीक पीछे मौजूद एक और बड़ा बंगला खरीद लिया था. उस दौर में इस शानदार सौदे की कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिसने रियल एस्टेट मार्केट में खूब सुर्खियां बटोरी थीं. इस खरीद के साथ ही बच्चन परिवार के मुंबई स्थित घरों में एक और नया अध्याय जुड़ गया था.

मेंस वर्ल्ड इंडिया और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि ये बंगला करीब 8,000 वर्ग फुट के बड़े दायरे में फैला हुआ है. इसे खरीदने का मैन मकसद परिवार के बढ़ते मेंबर्स के लिए ज्यादा खुली जगह का होना था. इसके अलावा जलसा के मैन गेट पर लगने वाली फैंस की भीड़ को देखते हुए घर के अंदर आने-जाने के लिए दूसरा सिक्योर और अल्टरनेटिव रास्ता बनाना भी था.

ये बंगला भले ही अपने अलग नाम से ज्यादा मशहूर न हुआ हो और इसे जलसा के एक्सटेंशन के तौर पर ही देखा जाता हो, लेकिन इसकी अहमियत कम नहीं है. इससे ये साफ पता चलता है कि बच्चन परिवार वक्त की जरूरत और अपनी सिक्योरिटी को देखते हुए अपने रिहायशी दायरे को हमेशा बढ़ाते रहने में यकीन रखता है. इसने परिवार को अपनी प्राइवेसी बनाए रखने में काफी मदद दी है.

सोपान: दिल्ली की सीढ़ियां और अदबी यादें

राजधानी दिल्ली के गुलमोहर पार्क में स्थित ‘सोपान’ बच्चन परिवार की प्योर लिटरेचर हेरिटेज का सबसे बड़ा सिंबल रहा है. इस घर का नाम भी खुद बिग बी के पिता और लीजेंडरी कवि हरिवंश राय बच्चन ने रखा था. इस घर के मैन दरवाजे से अंदर कदम रखते ही एक बहुत लंबी और खूबसूरत सीढ़ी दिखती थी, जो तीनों तलों को आपस में जोड़ती थी. इसी बनावट के चलते बाबूजी ने इसका नाम ‘सोपान’ रखा, जिसका मतलब सीढ़ी होता है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोपान सिर्फ रहने का घर नहीं था, बल्कि ये भारत के बड़े-बड़े साहित्यकारों, कवियों और विचारकों की बैठकों का गढ़ हुआ करता था. यहां घंटों तक साहित्यिक चर्चाएं और कविता पाठ चला करते थे. पिता हरिवंश राय बच्चन के मशहूर काव्य संग्रहों में से एक का नाम भी ‘सोपान’ ही था. इस तरह ये घर बच्चन परिवार के दिल और उनकी कलम के बेहद करीब रहा.

जब जया बच्चन समाजवादी पार्टी की ओर से राज्यसभा सांसद बनीं, तो दिल्ली प्रवास के दौरान वे संसद सत्र में हिस्सा लेते समय इसी घर में ठहरा करती थीं. कई दशकों तक परिवार के सुख-दुख और यादों का गवाह रहने के बाद इस बंगले को साल 2022 में एक लोकल बिजनेसमैन को बेच दिया गया. इस फैसले के साथ ही दिल्ली की इस पुरानी साहित्यिक निशानी का एक लंबा दौर हमेशा के लिए खत्म हो गया.

Amitabh Bachchan Bungalow Dashdwar

दशद्वार: प्रयागराज का वो कमरा और जीवन का सफर

इलाहाबाद, जिसके आज प्रयागराज के नाम से जाना जाता है, के क्लाइव रोड पर मौजूद ‘दशद्वार’ बच्चन परिवार के इतिहास का सबसे पहला और शायद सबसे इमोषनल अध्याय है. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरी करके लौटने के बाद हरिवंश राय बच्चन ने कुछ समय इसी किराए के मकान में गुजारा था. इसी घर की मिट्टी और कमरों में अमिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ के बचपन की शुरुआती और सबसे अनमोल यादें गहराई से रची-बसी हैं.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, घर के इस अलग से लगने वाले नाम के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प वाकया है. हरिवंश राय बच्चन ने अपनी आत्मकथा में लिखा था कि उस किराए के घर के हर कमरे में दरवाजे, खिड़कियां और रोशनदान मिलाकर लगभग दस खुली जगहें थीं. इसी बनावट के आधार पर उन्होंने इसका नाम ‘दशद्वार’ रखा था. इसके पीछे संत कबीर के दार्शनिक विचारों और मानव शरीर के दस द्वारों की इंस्पिरेशन भी शामिल थी.

‘दशद्वार’ का महत्व केवल एक रिहायशी कमरे तक सीमित नहीं रहा. हरिवंश राय बच्चन ने अपनी चार खंडों वाली विश्वप्रसिद्ध आत्मकथा के अंतिम भाग का टॉपिक ही ‘दशद्वार से सोपान तक’ रखा था. ये टॉपिक प्रयागराज की तंग गलियों से निकलकर दिल्ली की सत्ता और कामयाबी के शिखर तक पहुंचने के पूरे सफर को बयां करता है. यही वो मूल धुरी है, जहां से बच्चन परिवार के उस सफर की शुरुआत हुई, जिसने भारतीय समाज पर अमिट छाप छोड़ी.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:
Amitabh Bachchan