'बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार': भोजपुरी स्टार अक्षरा सिंह की आवाज ने बयां किया बाढ़ पीड़ितों का सच, गाने में भर दिया ऐसा दर्द
बिहार में आई भीषण बाढ़ और त्रासदी के बीच अक्षरा सिंह का नया छठ गीत 'बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार' रिलीज हो गया है. मनोज भावुक के लिखे इस गाने में पीड़ितों का दर्द और आस्था साफ झलक रही है.
Akshara Singh Chhath Song: बिहार इस वक्त कुदरत के बहुत बड़े कहर से गुजर रहा है. चारों तरफ सिर्फ बाढ़ का पानी ही पानी नजर आ रहा है. लोगों के घर बह गए हैं और खेत-खलिहान पूरी तरह डूब चुके हैं. ऐसी दर्दनाक सिचुएशन में जब कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है, तब बिहार के लोगों ने सिर्फ और सिर्फ अपनी छठी मइया और दुर्गा मइया के आगे हाथ जोड़े हैं. इसी इमोशन और जमीनी दर्द को दिखाने के लिए भोजपुरी की मशहूर एक्ट्रेस और सिंगर अक्षरा सिंह एक बेहद इमोशनल गाना गाया हैं. इस गाने के बोल हैं 'बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार'. यह गाना सिर्फ एक म्यूजिक वीडियो नहीं है, बल्कि इस वक्त बिहार के लाखों पीड़ितों की सच्ची कहानी और उनकी दिल से निकली चीख है.
बिहार में जब भी बाढ़ आती है तो सब कुछ तबाह कर देती है. गांव के गांव पानी में समा जाते हैं. छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग और परिवार अपने ही घरों की छतों पर भूखे-प्यासे बैठने को मजबूर हो जाते हैं. इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं. लोगों का सब कुछ छिन चुका है. ऐसे मुश्किल दौर में जब सरकारी मदद भी कम लगने लगती है, तो इंसान सीधा भगवान को याद करता है. यही दर्द इस नए गाने में दिखाया गया है. गाना सुनते ही आपको ऐसा लगेगा जैसे आप खुद उस बाढ़ के पानी के बीच खड़े हैं और बेबसी से सब देख रहे हैं.
अक्षरा सिंह की आवाज में दिखा असली दर्द
इस गाने को खास बनाता है अक्षरा सिंह का वो फील जो उन्होंने अपनी आवाज में डाला है. दरअसल, कुछ ही दिनों पहले अक्षरा सिंह खुद बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंची थीं. उन्होंने पानी में उतरकर लोगों को खाना बांटा था और उनकी तकलीफ को करीब से देखा था. जब कोई कलाकार किसी के दुख को अपनी आंखों से देख लेता है, तो उसकी आवाज में वो सच्चाई अपने आप आ जाती है. यही वजह है कि जब अक्षरा गाती हैं 'बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार', तो सुनने वाले की आंखें अपने आप नम हो जाती हैं.
देखें वीडियो-
मनोज भावुक के दिल छू लेने वाले शब्द
जाने-माने कवि और गीतकार मनोज भावुक ने इस गाने को लिखा है. मनोज भावुक हमेशा से बिहार की जमीनी समस्याओं और पलायन जैसे बड़े मुद्दों पर लिखते आए हैं. इससे पहले भी उनके लिखे छठ गीत जैसे 'पलायन के दर्द, सुन ए छठी मइया' काफी पॉपुलर हुए थे. इस बार भी उन्होंने अपने पेन से ऐसा जादू चलाया है जो सीधे दिल पर लगता है. उन्होंने गाने में लिखा है कि कैसे दुर्गा मां और छठी मइया ही अब बिहार के लोगों को इस मुसीबत से बाहर निकाल सकती हैं.
मधुकर आनंद ने गाने का म्यूजिक दिया है. किसी भी इमोशनल गाने में म्यूजिक का बहुत बड़ा रोल होता है. मधुकर आनंद ने गाने के टोन को बिल्कुल सिंपल रखा है, जिससे हर एक शब्द साफ सुनाई देता है. संगीत में जो करुणा और प्रार्थना का भाव है, वो आपको अंदर तक हिला देता है. 'हारमोनिया रिकार्ड्स' के बैनर तले रिलीज हुआ यह गाना इस समय सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा है.
आस्था ही है बिहार का सबसे बड़ा सहारा
बिहार के लोगों के लिए छठ पूजा केवल एक त्योहार नहीं है, यह उनके जीने की वजह और सबसे बड़ी उम्मीद है. चाहे कितनी भी बड़ी मुसीबत आ जाए, बिहार का इंसान छठी मइया पर अपना भरोसा कभी नहीं खोता. यह गाना भी हमें यही सिखाता है कि जब चारों तरफ अंधेरा छा जाए, तब भी आस्था का एक छोटा सा दीया इंसान को हिम्मत देता है. आज पूरा बिहार एक साथ मिलकर छठी मइया से यही दुआ कर रहा है कि जल्द से जल्द यह बाढ़ का पानी उतरे और लोगों की जिंदगी फिर से पटरी पर लौट आए.