कश्मीर की महिला अधिकारी से बदसलूकी पर महिला आयोग भी भड़का, 'गालीबाज अफसरों' पर जानिए क्या कहता है कानून?
जम्मू-कश्मीर की महिला अधिकारी से आईएएस अफसर द्वारा बदसलूकी मामले में अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी कड़ा एक्शन लिया है. 7 दिनों के अंदर 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) मांगी है. सवाल है कि क्या कोई अफसर, किसी से गाली देकर या गलत तरीके से बात कर सकता है?
जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक वरिष्ठ IAS अधिकारी द्वारा अपनी जूनियर महिला अफसर के साथ दुर्व्यवहार किया गया. आईएएस अधिकारी राजीव रंजन ने एक महिला जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (KAS) अधिकारी के साथ कथित तौर पर गलत व्यवहार और गाली-गलौज तक की. महिला अफसर से इस तरह से की गई बदतमीजी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस मामले के सामने आने के बाद से प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.
बताया जा रहा है कि लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट डिपार्टमेंट के प्रशासनिक सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव रंजन, एक आधिकारिक समीक्षा बैठक के दौरान महिला KAS अधिकारी पर बुरी तरह से चिल्लाते, गाली-गलौज करते और धमकी देते हुए नजर आ रहे हैं. इस गंभीर मामले पर अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी खुद संज्ञान ले लिया है. आईएएस अधिकारी द्वारा किए गए इस दुर्व्यवहार के बाद अब ये सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या प्रशासनिक पद की धौंस में कोई अधिकारी अपने सहकर्मी या जूनियर कर्मचारी के साथ ऐसा व्यवहार कर सकता है?
NCW ने मांगी 'एक्शन टेकन रिपोर्ट'
क्या कहता है अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम?
भारत में आईपीएस, आईएएस और भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के आचरण, नैतिकता और कर्तव्यों को कंट्रोल करने वाले कानूनी नियमों में से एक अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 है. इस कानूनी नियम के मुताबिक, किसी भी आईएएस अफसर को अपने मातहत या किसी भी नागरिक से अभद्रता या गाली-गलौज करने का कोई अधिकार नहीं है. अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है.
किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के लिए ये बेहद जरूरी है कि वो हर स्थिति में पूरी तरह सत्यनिष्ठा, शिष्टाचार और गरिमा बनाए रखे. चाहे पब्लिक प्लेस हो या प्रोफेशनल व्यवहार, ये नियम हर जगह समान रूप से लागू होता है. नियम 3(2A) में ये साफ कहा गया है कि अधिकारी को जनता और अपने सहकर्मियों के साथ हमेशा नम्र और शिष्ट व्यवहार करना होगा.
नियम के अनुसार किसी भी अधिकारी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना अधिकारी की शोभा न देने वाला आचरण माना जाता है. वहीं, 'डिसीप्लिन एंड अपील रूल्स, 1969' के तहत दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच, निलंबन, इंक्रीमेंट रोकने या पद से हटाए जाने तक की सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.