जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक वरिष्ठ IAS अधिकारी द्वारा अपनी जूनियर महिला अफसर के साथ दुर्व्यवहार किया गया. आईएएस अधिकारी राजीव रंजन ने एक महिला जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (KAS) अधिकारी के साथ कथित तौर पर गलत व्यवहार और गाली-गलौज तक की. महिला अफसर से इस तरह से की गई बदतमीजी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस मामले के सामने आने के बाद से प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.
बताया जा रहा है कि लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट डिपार्टमेंट के प्रशासनिक सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव रंजन, एक आधिकारिक समीक्षा बैठक के दौरान महिला KAS अधिकारी पर बुरी तरह से चिल्लाते, गाली-गलौज करते और धमकी देते हुए नजर आ रहे हैं. इस गंभीर मामले पर अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी खुद संज्ञान ले लिया है. आईएएस अधिकारी द्वारा किए गए इस दुर्व्यवहार के बाद अब ये सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या प्रशासनिक पद की धौंस में कोई अधिकारी अपने सहकर्मी या जूनियर कर्मचारी के साथ ऐसा व्यवहार कर सकता है?
National Commission for Women has taken suo motu cognizance of a viral video allegedly showing senior IAS officer Kumar Rajeev Ranjan, Administrative Secretary, Labour & Employment Department, J&K, verbally abusing, humiliating and threatening junior woman officer Beenish Wani, Assistant Director (JKAS), during an official review meeting. NCW Chairperson Smt. Vijaya Rahatkar has written to the Chief Secretary, Jammu & Kashmir, seeking verification of the video, an impartial inquiry and appropriate disciplinary and legal action if the allegations are established. The Commission has also called for safeguards against workplace harassment, victimisation and professional retaliation, along with protection and support for the woman officer. An Action Taken Report (ATR) has been sought within seven days. Every woman officer is entitled to a safe, respectful and dignified workplace. Abuse of authority and workplace humiliation must be addressed with utmost seriousness. @radionews_jammu @PIBSrinagar #ncwindia #suomotu
— NCW (@NCWIndia) October 16, 2026
भारत में आईपीएस, आईएएस और भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के आचरण, नैतिकता और कर्तव्यों को कंट्रोल करने वाले कानूनी नियमों में से एक अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 है. इस कानूनी नियम के मुताबिक, किसी भी आईएएस अफसर को अपने मातहत या किसी भी नागरिक से अभद्रता या गाली-गलौज करने का कोई अधिकार नहीं है. अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है.
The Jammu and Kashmir government has appointed senior IAS officer Mandeep Kaur as the Inquiry Officer to conduct a time-bound, 15-day probe into alleged misconduct by Labour Secretary Kumar Rajeev Ranjan https://t.co/Ms9PNhcrrZ
— IANS (@ians_india) October 16, 2026
किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के लिए ये बेहद जरूरी है कि वो हर स्थिति में पूरी तरह सत्यनिष्ठा, शिष्टाचार और गरिमा बनाए रखे. चाहे पब्लिक प्लेस हो या प्रोफेशनल व्यवहार, ये नियम हर जगह समान रूप से लागू होता है. नियम 3(2A) में ये साफ कहा गया है कि अधिकारी को जनता और अपने सहकर्मियों के साथ हमेशा नम्र और शिष्ट व्यवहार करना होगा.
IAS officer Rajeev Ranjan faces abusing a JKAS woman officer with remarks like “bloody shit” and “I am your boss.” When asked he said this is an AI video. Ofcourse this is an AI video .. an Azzhol IAS video. https://t.co/Q84l80YDHv
— amit kilhor (@amitkilhor) October 15, 2026
नियम के अनुसार किसी भी अधिकारी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना अधिकारी की शोभा न देने वाला आचरण माना जाता है. वहीं, 'डिसीप्लिन एंड अपील रूल्स, 1969' के तहत दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच, निलंबन, इंक्रीमेंट रोकने या पद से हटाए जाने तक की सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.