SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

कॉलेज के बाद नौकरी क्यों नहीं मिलती? डिग्री और कौशल के बीच कितना बड़ा अंतर

कॉलेज की डिग्री हासिल करने के बाद भी युवाओं को नौकरी पाने में मुश्किल क्यों होती है? सरकारी रिपोर्ट और 2026 के रोजगार आंकड़ों से समझिए डिग्री, कौशल और उद्योग की जरूरत के बीच का अंतर.

Written By Shivam Tiwari
Published: Sep 04, 2026, 08:04 PM IST | Updated: Sep 05, 2026, 07:31 AM IST
Image Credit: क्या डिग्री नौकरी की गारंटी नहीं है?
Join

कॉलेज से डिग्री हासिल करना आज भी नौकरी की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन बदलते रोजगार बाजार में केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं रह गई है. कंपनियां उम्मीदवार से विषय की जानकारी के साथ-साथ समस्या हल करने, संवाद करने, तकनीक का इस्तेमाल करने, टीम में काम करने और बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता भी चाहती हैं. इसी वजह से कई युवाओं के सामने कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी रोजगार पाने की चुनौती बनी रहती है.

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 रिपोर्ट के अनुसार भारत में उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ है और स्नातकों की संख्या बढ़ी है, लेकिन स्नातकों की संख्या में वृद्धि के साथ उसी अनुपात में स्नातक स्तर की नौकरियों का विस्तार नहीं हुआ. रिपोर्ट शिक्षा से रोजगार तक के संक्रमण को एक बड़ी चुनौती बताती है.

क्या डिग्री और नौकरी की जरूरत में अंतर है?

आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में शिक्षा और काम के कौशल के बीच असंगति को स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है. सर्वेक्षण के अनुसार स्नातक डिग्री रखने वाले कामगारों में 50.3 प्रतिशत अर्ध-कुशल कामों में और 3.22 प्रतिशत प्राथमिक कौशल वाले कामों में लगे थे. वहीं 38.23 प्रतिशत स्नातक विशेष कौशल वाले कामों में और 8.25 प्रतिशत उच्च दक्षता वाले कामों में थे.

इससे पता चलता है कि डिग्री हासिल करना और उस स्तर की नौकरी मिलना हमेशा एक ही बात नहीं है. कई बार उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता नौकरी से अधिक होती है, जबकि दूसरी तरफ कंपनियों को ऐसे उम्मीदवार नहीं मिलते जिनके पास काम के लिए जरूरी व्यावहारिक कौशल हो.

युवाओं में कौन-से कौशल कम हैं?

रोजगार के लिए केवल विषय का ज्ञान काफी नहीं है. संचार कौशल, आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान, टीम में काम करने की क्षमता, डिजिटल दक्षता और नई तकनीक सीखने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती जा रही हैं.

2026 में प्रकाशित एक रोजगार रिपोर्ट में भी विद्यार्थियों और कंपनियों की धारणा के बीच बड़ा अंतर सामने आया. हायरप्रो की रिपोर्ट के अनुसार 68 प्रतिशत विद्यार्थियों को लगता है कि वे नौकरी शुरू करने के पहले दिन से काम के लिए तैयार हैं, जबकि केवल 9 प्रतिशत कंपनियां ऐसा मानती हैं. 51 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि नए स्नातकों को कम से कम एक महीने या उससे अधिक समय के प्रशिक्षण की जरूरत पड़ती है.

क्या कॉलेज की पढ़ाई ज्यादा सैद्धांतिक है?

कई पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को विषय का सैद्धांतिक ज्ञान तो मिलता है, लेकिन वास्तविक कार्यस्थल जैसी परिस्थितियों में उसे लागू करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता. इसका असर खासकर उन छात्रों पर पड़ सकता है, जिन्होंने पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट, उद्योग से जुड़ी गतिविधियों या व्यावहारिक प्रशिक्षण का अनुभव नहीं लिया है.

यही कारण है कि डिग्री के साथ इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट और वास्तविक समस्याओं पर काम करने का अनुभव रोजगार की तैयारी को मजबूत कर सकता है.

क्या सिर्फ तकनीकी कौशल काफी है?

आज तकनीकी ज्ञान के साथ व्यवहारिक और मानवीय कौशल भी जरुरी हैं. किसी उम्मीदवार को अपने विचार स्पष्ट तरीके से रखने, टीम के साथ काम करने, ग्राहक या सहकर्मी से संवाद करने और समस्या आने पर समाधान खोजने में सक्षम होना पड़ता है.

विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल के साथ तकनीकी क्षेत्रों में केवल किसी एक प्रोग्रामिंग भाषा या उपकरण को जानना पर्याप्त नहीं हो सकता. विशेषज्ञों की मौजूदा चर्चाओं में समस्या समाधान, आलोचनात्मक सोच, अनुकूलन क्षमता और एआई के साथ काम करने की क्षमता को बढ़ते महत्व वाले कौशल के रूप में रेखांकित किया जा रहा है.

क्या कौशल प्रशिक्षण से समस्या हल हो सकती है?

कौशल प्रशिक्षण तभी प्रभावी होगा जब वह सीधे रोजगार बाजार की जरूरतों से जुड़ा हो. अगस्त 2026 में नीति आयोग की ‘रीइमैजिनिंग स्किलिंग फॉर विकसित भारत@2047’ रिपोर्ट ने भी भारत के कौशल तंत्र को उद्योग और रोजगार की जरूरतों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया है.

इसका मतलब केवल ज्यादा प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षण के बाद युवा वास्तव में किसी काम को करने में सक्षम हो.

क्या डिग्री की अहमियत खत्म हो रही है?

ऐसा कहना सही नहीं होगा. डिग्री अभी भी कई नौकरियों के लिए जरूरी योग्यता है और उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों की कमाई में भी स्नातक और गैर-स्नातक के बीच अंतर बना हुआ है. अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की 2026 रिपोर्ट भी बताती है कि स्नातक वेतनभोगी कमाई में गैर-स्नातकों से बेहतर स्थिति में रहते हैं.

असल बदलाव यह है कि डिग्री अब अकेली योग्यता नहीं है. उम्मीदवार की नौकरी पाने की क्षमता इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह अपनी पढ़ाई को व्यावहारिक कौशल में कितना बदल पाता है.

तो कॉलेज छात्रों को क्या करना चाहिए?

कॉलेज के दौरान विद्यार्थियों को अपनी डिग्री के साथ कम से कम एक उपयोगी कौशल विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए. अपने विषय से संबंधित इंटर्नशिप, वास्तविक परियोजनाएं, डिजिटल उपकरण, संचार कौशल, प्रस्तुति और समस्या समाधान जैसी क्षमताओं पर लगातार काम किया जा सकता है.

नौकरी की तैयारी अंतिम वर्ष में शुरू करने के बजाय कॉलेज के शुरुआती वर्षों से ही शुरू करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है. इससे डिग्री पूरी होने तक विद्यार्थी के पास शैक्षणिक योग्यता + व्यावहारिक कौशल + अनुभव का संयोजन तैयार हो सकता है.

क्या समाधान डिग्री और कौशल को साथ लाना है?

कॉलेज के बाद रोजगार की समस्या को केवल “नौकरियां कम हैं” या “युवाओं में कौशल नहीं है” कहकर समझना अधूरा होगा. समस्या में शिक्षा की गुणवत्ता, उद्योग की मांग, रोजगार के अवसर, स्थान, अनुभव और कौशल का मेल जरुरी है.

इसलिए बेहतर समाधान ऐसा शिक्षा मॉडल हो सकता है जिसमें कॉलेज की पढ़ाई के साथ इंटर्नशिप, उद्योग सहयोग, परियोजना आधारित सीखना, करियर मार्गदर्शन और कौशल प्रशिक्षण नियमित हिस्सा बने. आखिरकार, आज के रोजगार बाजार में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि “आपके पास कौन-सी डिग्री है?”, बल्कि यह भी है कि “आप उस ज्ञान से क्या कर सकते हैं?”

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

शिवम तिवारी, जी न्यूज में डिजिटल कंटेंट राइटर हैं और पत्रकारिता में करीब 2 साल से अधिक का अनुभव रखते हैं. यूपी के प्रयागराज के रहने वाले शिवम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है. खबरों की नब्ज पकड़कर उन्हें आसान और साफ भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. शिवम शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर खास फोकस रखते हैं. इनमें स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षाएं, प्रवेश परीक्षाएं, सरकारी नौकरियां, रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स, करेंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज जैसे टॉपिक्स शामिल हैं.इसके अलावा शिवम, टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स और करियर काउंसलर्स की सलाह के आधार पर कंटेंट तैयार करते हैं. ये IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT और CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर गहराई से काम करते हैं और छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराते हैं. शिवम तिवारीर से संपर्क करने के लिए आप उन्हें shivam.tiwari@india.com पर ईमेल कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES