2047 तक भारत को कैसी Literacy चाहिए? एक्सपर्ट ने बताया साक्षरता का नया मतलब
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य सिर्फ 100% साक्षरता से पूरा नहीं होगा. बच्चों को पढ़ने-समझने, गणित, डिजिटल और AI जैसी नई क्षमताओं से लैस करना भी जरूरी होगा. विशेषज्ञ मीनााक्षी रमेश से समझिए भारत को कैसी Literacy चाहिए?
भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है. ऐसे में शिक्षा और साक्षरता की भूमिका सिर्फ स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी. आने वाले भारत में ऐसी साक्षरता जरूरी होगी, जिसमें व्यक्ति सिर्फ अक्षर पहचानना या सामान्य गणित करना ही न जाने, बल्कि किसी जानकारी को पढ़कर उसका मतलब समझ सके, सही और गलत में फर्क कर सके, समस्या का हल निकाल सके और बदलती तकनीक के साथ खुद को अपडेट कर सके.
नीति आयोग की स्कूल शिक्षा पर रिपोर्ट में भी विकसित भारत 2047 के लिए शिक्षा की पहुंच के साथ उसकी गुणवत्ता और सीखने के नतीजों को जरूरी बताया गया है.
क्या साक्षरता की शुरुआत बुनियादी सीखने से होगी?
2047 की साक्षरता की मजबूत नींव बचपन में ही रखनी होगी. शिक्षा मंत्रालय लगातार बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को प्राथमिकता दे रहा है. निपुण भारत योजना का मकसद शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को पढ़ना-समझना और बुनियादी गणित सिखाना है. शिक्षा मंत्रालय ने 2026 में भी विकसित भारत 2047 के संदर्भ में बुनियादी साक्षरता, संख्या ज्ञान, शिक्षकों की क्षमता और सीखने के नतीजों को प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है.
इसका मतलब है कि बच्चे का सिर्फ किताब के शब्द पढ़ लेना काफी नहीं होगा. वह जो पढ़ रहा है, उसका मतलब समझे, सवाल पूछे और सीखी हुई बात को रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल कर सके, यह ज्यादा जरूरी होगा.
एक्सपर्ट मीनााक्षी रमेश क्या कहती हैं?
प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मीनााक्षी रमेश ने 2026 में भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के संदर्भ में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को मानव विकास की मजबूत नींव बताया. उनके अनुसार, बच्चों के शुरुआती वर्षों में अगर सीखने की नींव मजबूत हो, तो आगे की पढ़ाई और भविष्य की क्षमता बेहतर बनाने में मदद मिलती है.
उनकी बात से एक बड़ा सवाल सामने आता है. क्या भारत को 2047 तक सिर्फ साक्षरता दर बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, या यह भी देखना चाहिए कि कितने लोग पढ़ी हुई चीज को सही तरह समझ और उसका इस्तेमाल कर सकते हैं?
क्या सिर्फ पढ़ना नहीं, पढ़कर समझना भी जरूरी है?
2047 की साक्षरता में सबसे जरूरी बदलाव यही हो सकता है. किसी व्यक्ति का पढ़ना जानना और पढ़कर उसका मतलब समझना, दोनों अलग बातें हैं. उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति बैंक का संदेश पढ़ सकता है, लेकिन उसमें दिए गए ब्याज, शुल्क या भुगतान की तारीख को समझ नहीं पाता, तो उसकी व्यावहारिक साक्षरता अधूरी मानी जा सकती है.
इसी तरह किसी सरकारी योजना की जानकारी पढ़ लेना अलग बात है. यह समझना कि योजना के लिए कौन पात्र है, आवेदन कैसे करना है और कौन-से दस्तावेज चाहिए, यह कार्यात्मक साक्षरता का हिस्सा है.
| साक्षरता का स्तर | क्या जरूरी होगा? |
|---|---|
| बुनियादी साक्षरता | पढ़ना, लिखना और सामान्य गणित समझना |
| कार्यात्मक साक्षरता | जानकारी समझना और रोजमर्रा में उसका इस्तेमाल करना |
| डिजिटल साक्षरता | ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल भुगतान का सुरक्षित इस्तेमाल |
| वित्तीय साक्षरता | बैंकिंग, ब्याज, शुल्क और पैसों से जुड़े फैसले समझना |
| एआई और सूचना की समझ | एआई की जानकारी को समझना और सही-गलत में फर्क करना |
| भविष्य के कौशल | आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान और जीवनभर सीखना |
क्या डिजिटल साक्षरता भी 2047 की साक्षरता का हिस्सा होगी?
आज शिक्षा, बैंकिंग, सरकारी सेवाएं, नौकरी और कारोबार तेजी से डिजिटल हो रहे हैं. ऐसे में 2047 का साक्षर नागरिक ऐसा होना चाहिए जो डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित और सही तरीके से इस्तेमाल कर सके.
डिजिटल साक्षरता का मतलब सिर्फ स्मार्टफोन चलाना नहीं है. इसमें ऑनलाइन जानकारी खोजना, डिजिटल फॉर्म भरना, ऑनलाइन भुगतान को समझना, साइबर धोखाधड़ी से बचना और किसी वेबसाइट या सामाजिक माध्यम पर दी गई जानकारी सही है या नहीं, यह जांचना भी शामिल है.
क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता की समझ भी जरूरी होगी?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आने वाले समय में शिक्षा और रोजगार दोनों को प्रभावित करेगी. इसलिए भविष्य की साक्षरता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समझने की बुनियादी जानकारी भी जरूरी हो सकती है. लोगों को यह समझना होगा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से मिली हर जानकारी सही नहीं होती, यह जवाब कैसे तैयार करती है और इसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल कैसे किया जाए.
इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विशेषज्ञ बनना होगा. जरूरत सिर्फ इतनी होगी कि आम व्यक्ति कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी सेवाओं का इस्तेमाल करते समय उसकी सीमाओं और खतरों को समझ सके.
क्या बहुभाषी साक्षरता भारत के लिए जरूरी है?
भारत में कई भाषाएं बोली जाती हैं. इसलिए 2047 की साक्षरता का मॉडल सिर्फ एक भाषा पर आधारित नहीं हो सकता. नई शिक्षा नीति 2020 में बुनियादी सीखने के साथ बहुभाषिकता और बच्चे की मातृभाषा को महत्व दिया गया है. शिक्षा मंत्रालय ने भी शुरुआती पढ़ाई को मजबूत करने के लिए मातृभाषा और कई भाषाओं में सीखने पर जोर दिया है.
इससे बच्चे को पहले अपनी परिचित भाषा में किसी बात को समझने में मदद मिल सकती है. इसके बाद वह धीरे-धीरे दूसरी भाषाओं में भी जानकारी हासिल करने की क्षमता विकसित कर सकता है.
क्या वयस्क साक्षरता को भी नजरअंदाज किया जा सकता है?
2047 की साक्षरता सिर्फ आज स्कूल जाने वाले बच्चों तक सीमित नहीं होगी. भारत में ऐसे वयस्क भी हैं जिन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत है. इसलिए वयस्क शिक्षा, डिजिटल कौशल, वित्तीय समझ और रोजमर्रा के काम में काम आने वाली साक्षरता भी महत्वपूर्ण होगी.
नई शिक्षा नीति 2020 में बच्चों के साथ युवाओं और वयस्कों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाने और वयस्क शिक्षा को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है.
क्या साक्षरता और रोजगार की क्षमता को साथ चलना होगा?
2047 का भारत जिस तरह की अर्थव्यवस्था बनाना चाहता है, उसमें सिर्फ पढ़ा-लिखा होना पर्याप्त नहीं होगा. व्यक्ति को अपनी साक्षरता को नौकरी और कौशल से भी जोड़ना होगा. नीति आयोग की 2026 की ‘विकसित भारत 2047 के लिए कौशल विकास की नई सोच’ रिपोर्ट में भी ऐसे कौशल की जरूरत पर जोर दिया गया है, जिनकी नौकरी के बाजार में मांग हो, जो उद्योग से जुड़े हों और जिनका असर वास्तविक काम में दिखाई दे.
इसलिए भविष्य की साक्षरता का अगला चरण होगा- पढ़ना, समझना, इस्तेमाल करना और बदलती परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना.
तो 2047 की आदर्श साक्षरता कैसी होगी?
2047 तक भारत को ऐसी साक्षरता की जरूरत होगी, जो पांच स्तरों पर काम करे. बुनियादी साक्षरता, कार्यात्मक साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता व सूचना की समझ. इसके साथ आलोचनात्मक सोच, समस्या का समाधान और जीवनभर सीखते रहने जैसी क्षमताएं भी जरूरी होंगी.
यानी 2047 का लक्ष्य सिर्फ यह देखना नहीं होना चाहिए कि कितने लोग अपना नाम पढ़-लिख सकते हैं. असली सवाल यह होगा कि कितने लोग किसी जानकारी को समझ सकते हैं, सही फैसला ले सकते हैं, तकनीक का सुरक्षित इस्तेमाल कर सकते हैं और जीवनभर नई चीजें सीखते रह सकते हैं.