MBA में आ गई बैक तो क्या खत्म हो जाएगा करियर? जानिए डिग्री, प्लेसमेंट और बैकलॉग को लेकर पूरी सच्चाई
MBA में एक या दो विषयों में बैक आने पर घबराने की जरूरत नहीं है. जानिए बैकलॉग क्लियर करने, प्रमोशन, प्लेसमेंट और डिग्री पूरी करने की समय-सीमा से जुड़े जरूरी नियम.
एमबीए देश और दुनिया में लोकप्रिय प्रोफेशनल कोर्स में शामिल है. केस स्टडी, प्रेजेंटेशन, असाइनमेंट और सेमेस्टर परीक्षाओं के दबाव के बीच कई बार छात्रों के एक या अधिक विषयों में बैकलॉग आ सकता है. ऐसी स्थिति में डिग्री रद्द होने या करियर पर असर पड़ने की चिंता स्वाभाविक है. हालांकि, बैकलॉग आने का मतलब सीधे तौर पर डिग्री रद्द होना नहीं है. छात्रों को अपने विश्वविद्यालय या संस्थान के नियमों के अनुसार बैक पेपर पास करने का अवसर मिलता है.
सबसे पहले छात्र को अपने विश्वविद्यालय की परीक्षा और क्रेडिट संबंधी गाइडलाइन देखनी चाहिए. कई संस्थान बैकलॉग वाले विषयों के लिए सप्लीमेंट्री, री-अपीयर या कैरी-ओवर परीक्षा का विकल्प देते हैं. निर्धारित फीस और प्रक्रिया पूरी करने के बाद छात्र उस परीक्षा में शामिल होकर विषय को क्लियर कर सकता है. कुछ संस्थानों में सीमित संख्या में बैकलॉग होने पर छात्र को अगले सेमेस्टर में पढ़ाई जारी रखने की अनुमति भी मिलती है.
क्या री-चेकिंग से बैक हट सकती है?
यदि छात्र को लगता है कि कम अंकों के कारण बैक लगी है, तो संस्थान की नीति के अनुसार री-चेकिंग या री-इवैल्यूएशन का विकल्प देखा जा सकता है. MBA में इंटरनल असेसमेंट, असाइनमेंट और प्रेजेंटेशन के अंक भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं. इसलिए इन सभी घटकों के नियम और अंक वितरण को पहले समझना जरूरी है.
MBA कितने साल में पूरा करना होता है?
नियमित MBA आमतौर पर 2 साल और 4 सेमेस्टर का होता है. लेकिन बैकलॉग होने पर डिग्री पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है. इसकी अधिकतम अवधि सभी विश्वविद्यालयों में समान नहीं होती. संबंधित विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस, परीक्षा नियम और प्रोग्राम की गाइडलाइन के आधार पर छात्र को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी क्रेडिट और विषय पूरे करने होते हैं.
N+2 या N+3 नियम क्या है?
कुछ संस्थानों में कोर्स पूरा करने के लिए मूल अवधि के बाद अतिरिक्त समय का प्रावधान होता है, जिसे N+2 या N+3 जैसे नियमों से बताया जा सकता है. हालांकि, इसे सभी MBA संस्थानों पर एक समान लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए. छात्र को एडमिशन के समय अपने विश्वविद्यालय की maximum duration और backlog policy जरूर जांचनी चाहिए.
प्लेसमेंट पर बैकलॉग का क्या असर है?
MBA में बैकलॉग का प्लेसमेंट पर असर कंपनी और भर्ती नियमों पर निर्भर करता है. कई कंपनियां कैंपस भर्ती के दौरान उम्मीदवार के पास active backlog नहीं होने की शर्त रखती हैं. इसलिए प्लेसमेंट शुरू होने से पहले सभी लंबित विषय क्लियर करना फायदेमंद रहता है. बैकलॉग क्लियर होने के बाद छात्र की अंतिम मार्कशीट और डिग्री संस्थान के नियमों के अनुसार जारी होती है.
बैकलॉग से कैसे बचें?
छात्र को एडमिशन लेते ही यह समझ लेना चाहिए कि अगले सेमेस्टर में प्रमोशन के लिए कितने विषय या क्रेडिट जरूरी हैं. नियमित पढ़ाई के साथ बैकलॉग वाले पेपर की तैयारी करना, असाइनमेंट समय पर जमा करना और इंटरनल असेसमेंट पर ध्यान देना मददगार हो सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि बैक लगने के बाद पहले उपलब्ध अवसर में उसे क्लियर करने की कोशिश करें, ताकि अंतिम वर्ष में लंबित विषयों का दबाव न बढ़े.