UPSC Success Story of Bhikan Rojekar: कहते हैं अगर किसी चीज को पाने की जिद हो, तो उस मंजिल तक एक न एक दिन जरूर पहुंचा जा सकता है. एक ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण किसान के बेटे भिकन रोजेकर ने पेश किया है. शुरुआती राह में कई कठिनाइयों और चार बार असफलता का सामना करने के बावजूद, उन्होंने अपनी सही रणनीति और 'प्लान B' के दम पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर दिखाई. आज वो देश के हजारों युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुके हैं. आइए भिकन रोजेकर के संघर्ष से सफलता के शिखर तक पहुंचने की पूरी कहानी जानते हैं.
महाराष्ट्र के जालना जिले के भोकरदन तालुका में स्थित जलगांव सपकाल गांव के रहने वाले भिकन रोजेकर के पिता का नाम जगन रोजेकर है और वो खेत में मजदूरी का काम करते हैं, जबकि दिव्यांग मां भी खेतीहर मजदूर हैं. घर की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी, लेकिन उन्होंने फिर भी हार नहीं मानी. मराठी माध्यम से उन्होंने कक्षा 10वीं तक की पढ़ाई पूरी की, जिसके बाद 11वीं-12वीं में उन्होंने साइंस स्ट्रीम की पढ़ाई की और कृषि में बी.एससी डिग्री हासिल की. हमेशा से उनके माता-पिता ने पढ़ाई करने के लिए सपोर्ट किया.
एक किसान मजदूर के बेटे, भिकन रोजेकर की जिंदगी बदलने वाला पल उस वक्त रहा जब, एक सवाल उन्होंने खुद से पूछा कि 'अगर किसी रिक्शा चालक का बेटा IAS बन सकता है तो क्या किसी खेत मजदूर का बेटा नहीं बन सकता?' बस ये एक सवाल जिसका जवाब जानने के लिए उन्होंने नवंबर 2021 से यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी.
साल 2022 में उन्होंने दिल्ली आकर पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी शुरू की. महाराष्ट्र सरकार की BARTI योजना के जरिए उन्होंने स्कॉलरशिप और कोचिंग का फायदा उठाया. ऐसे में उन्हें फाइनेंशियल सपोर्ट तो मिल गया और उन्होंने लगातार मेहनत की.
यूपीएससी तैयारी के दौरान उन्होंने पहले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) परीक्षा दी. इस असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा में असफल रहे और फिर प्रीलिम्स परीक्षा में भी सफलता नहीं मिल पाई. इसके बाद साल 2024 में उन्होंने यूपीएसस मेन्स परीक्षा दी लेकिन उसके आगे के चरण में पास नहीं हो पाए.
साल 2025 में उन्होंने यूपीएससी इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) की परीक्षा दी लेकिन उसमें भी सफल नहीं रहे. इसी साल उन्होंने यूपीएससी की फिर से परीक्षा दी और उसमें सफलता हासिल हुई. तीनों चरणों को क्रैक कर ऑल इंडिया रैंकिंग 812 रैंक हासिल की.
भिकन के अनुसार प्रतियोगी परीक्षाएं काफी अनिश्चित होती हैं और इसलिए ये तय करना या अंदाजा लगाना भी मुश्किल होता है कि कितना सिलेबस आएगा या कौन सा पैटर्न कैसा रहेगा. कभी भी इनमें बदलाव हो सकता है. युवाओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि ग्रेजुएशन के समय ही अपना मजबूत एकेडमिक बेस तैयार कर लेना चाहिए, एक प्लान बी भी तैयार रखना चाहिए. उनका प्लान बी एग्रीकल्चर में डिग्री हासिल करना था जो उन्हें असफलता मिलने पर भी नौकरी दिला सकता था.