CUK कैंपस में छात्रों का हंगामा: केमिस्ट्री HOD पर यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के आरोप, पद से हटाकर जांच शुरू
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर (CUK) के नन्नार साइंस कैंपस में केमिस्ट्री विभाग के प्रमुख डॉ. चिन्नप्पन भास्कर को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने HOD पद से सस्पेंड कर दिया है. उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है जिसके चलते कैंपस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन भी जारी रहा है.
Uproar by students on the CUK Campus: सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर (CUK) के नन्नार साइंस कैंपस में छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन के कारण वहां का माहौल काफी गरमाया हुआ है. छात्रों ने केमिस्ट्री विभाग के प्रमुख डॉ. चिन्नप्पन भास्कर पर यौन उत्पीड़न, अभद्र टिप्पणी और एकेडमिक करियर बर्बाद करने की धमकियों के गंभीर आरोप लगे हैं. इसे लेकर छात्रों की ओर से किए जा रहे भारी विरोध प्रदर्शन के कारण यूनिवर्सिटी प्रशासन ने डॉ. चिन्नप्पन भास्कर को एचओडी के पद से हटा दिया है और एकेडमिक अफेयर्स ऑफिस से अटैच कर दिया है. साथ ही प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश भी दिए हैं.
दरअसल, छात्रों ने केमिस्ट्री विभाग के एचओडी पर आरोप लगाया है कि छात्रों ने कक्षाओं और लैब सेशन का पूर्ण बहिष्कार किया है. प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि डॉ. भास्कर पिछले कई महीनों से क्लास में अश्लील और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे. हाल ही में एक छात्रा के साथ अश्लील भाषा और गलत व्यवहार के बाद छात्रों का गुस्सा भड़क उठा है.
फेल करने की धमकी और मामला दबाने का दबाव भी
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि एचओडी डॉ. भास्कर द्वारा छात्रों को फेल करने की धमकी भी दी जाती थी. एक छात्रा ने जानकारी दी कि एचओडी कहते थे कि 'तुम्हारी डिग्री मेरे हाथ में है और मैं तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर सकता हूं.' वहीं, एक लॉ डिपार्टमेंट के छात्र ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शन को दबाने के लिए एचओडी ने केमिस्ट्री के कुछ छात्रों को क्लासरूम में बंद भी कर दिया था, साथ ही पीड़िता पर मामले को दबाने का दबाव भी बनाया गया.
प्रशासन की कार्रवाई और ICC जांच
विवाद बढ़ता देख यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. निसार अहमद मीर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तुरंत कैंपस पहुंचे. इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से तुरंत कार्रवाई की गई. रजिस्ट्रार प्रो. निसार अहमद मीर ने बताया कि वाइस-चांसलर प्रो. ए. रविंदर नाथ के निर्देश पर आरोपी फैकल्टी को तत्काल प्रभाव से विभाग की सभी जिम्मेदारियों से हटा दिया है. उन्होंने आगे बताया कि यूनिवर्सिटी में पहले से ही 'इंटरनल कंप्लेंट कमिटी' (ICC) मौजूद है और इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक कमिटी भी गठित की गई है. जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. यूनिवर्सिटी के आधिकारिक आदेश में ये भी साफ बताया गया कि संस्थान उत्पीड़न के मामलों में 'जीरो-टॉलरेंस' नीति पर काम करते हैं.
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
इस घटना पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भी कड़ा एतराज जताया गया है. हजरतबल से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक सलमान सागर की ओर से घटना की निंदा करते हुए कहा गया कि शिक्षा के मंदिरों में बेटियों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने आरोपी शिक्षक को तत्काल नौकरी से भी सस्पेंड करने की मांग की.
ध्यान देने वाली बात है कि ये मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में किश्तवाड़ के छत्रू इलाके में एक स्कूली छात्रा के साथ उत्पीड़न और दर्दनाक घटना की खबर आई थी. लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बाद जम्मू-कश्मीर के शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और कड़े कानून लागू करने की मांग तेज हो गई है.
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