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Explainer: 74 करोड़ लोग अभी भी अनपढ़, UNESCO ने बताया आज के दौर में पढ़े-लिखे होने का नया मतलब

UNESCO के मुताबिक साक्षरता अब सिर्फ पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है. डिजिटल, मीडिया, AI और फेक न्यूज के दौर में साक्षर होने का मतलब जानकारी को समझना, जांचना और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करना भी है.

Written By Shivam Tiwari
Published: Sep 08, 2026, 07:42 AM IST | Updated: Sep 09, 2026, 09:52 AM IST
Image Credit: साक्षरता का मतलब अब क्या है?
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हर साल 8 सितंबर को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य यह याद दिलाना है कि साक्षरता केवल पढ़ने और लिखने की क्षमता नहीं, बल्कि लोगों को बेहतर जीवन, अधिक अधिकार, स्वतंत्रता और समाज में सार्थक भागीदारी का अवसर देने वाली बुनियादी क्षमता है. UNESCO के मुताबिक साक्षरता को मानव अधिकार के रूप में देखा जाता है और यह ज्ञान, कौशल, मूल्यों और जिम्मेदार व्यवहार विकसित करने की नींव है.

आज डिजिटल टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने जानकारी हासिल करने और उसे इस्तेमाल करने का तरीका बदल दिया है। ऐसे में UNESCO की मीडिया और इन्फॉर्मेशन लिटरेसी यानी MIL की अवधारणा साक्षरता को और व्यापक बनाती है. इसमें किसी जानकारी तक पहुंचना, उसका विश्लेषण करना, उसकी विश्वसनीयता जांचना और उसे जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करना शामिल है.

74 करोड़ लोग अभी भी पीछे क्यों हैं?

दुनिया में शिक्षा को लेकर प्रगति के बावजूद बड़ी आबादी अभी भी बुनियादी साक्षरता से दूर है. उपलब्ध UNESCO आंकड़ों के मुताबिक 2024 में दुनियाभर में कम से कम 73.9 करोड़ युवा और वयस्क ऐसे थे, जिनके पास बेसिक साक्षरता कौशल नहीं था. इसके अलावा चार में से करीब एक नहीं बल्कि 10 में से 4 बच्चे पढ़ने में न्यूनतम दक्षता हासिल नहीं कर पा रहे हैं. 2023 में 27.2 करोड़ बच्चे और किशोर स्कूल से बाहर थे.

ये आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के सामने चुनौती सिर्फ स्कूलों तक पहुंच बढ़ाने की नहीं है. बच्चों और वयस्कों को ऐसी शिक्षा देना भी जरूरी है, जो उन्हें बदलती तकनीक, रोजगार, समाज और सूचना की दुनिया में आत्मनिर्भर बना सके.

2026 में साक्षरता दिवस क्यों खास है?

2026 में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस अपनी 60वीं वर्षगांठ मना रहा है. UNESCO ने 1966 में इसे घोषित किया था और 2026 की थीम “Literacy for people, the planet and prosperity” रखी गई है. इस साल का फोकस बदलती दुनिया में साक्षरता की प्रगति के साथ-साथ नई और लगातार बनी हुई चुनौतियों को समझने पर है.

UNESCO के मुताबिक 8 और 9 सितंबर 2026 को मेक्सिको में वैश्विक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इसमें UNESCO International Literacy Prizes भी दिए जाएंगे. इसका मकसद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में साक्षरता को बढ़ावा देने वाले प्रभावी कार्यक्रमों और नीतियों को सामने लाना है.

डिजिटल लिटरेसी क्या है?

डिजिटल लिटरेसी का अर्थ केवल स्मार्टफोन, कंप्यूटर या इंटरनेट चलाना नहीं है. डिजिटल दुनिया में साक्षर व्यक्ति को यह भी समझना होता है कि ऑनलाइन जानकारी कहां से आ रही है, उसका इस्तेमाल कैसे किया जाए और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित कैसे रहा जाए.

UNESCO के Media and Information Literacy फ्रेमवर्क में डिजिटल दक्षताओं के साथ आलोचनात्मक सोच और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार पर जोर दिया गया है. इसका मतलब है कि व्यक्ति ऑनलाइन जानकारी को आंख बंद करके स्वीकार न करे, बल्कि उसके स्रोत और विश्वसनीयता को समझे.

AI लिटरेसी क्यों जरूरी हो गई?

Generative AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने साक्षरता की चर्चा को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है. आज AI टेक्स्ट लिख सकता है, तस्वीरें बना सकता है, सवालों के जवाब दे सकता है और कई तरह की जानकारी तैयार कर सकता है. इसलिए लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि AI कैसे काम करता है, उसकी सीमाएं क्या हैं और उसके जवाबों पर आंख बंद करके भरोसा क्यों नहीं किया जाना चाहिए.

UNESCO ने AI को Media and Information Literacy से जोड़ते हुए AI के जिम्मेदार और मानव-केंद्रित इस्तेमाल पर जोर दिया है. संगठन के मुताबिक AI के दौर में उपयोगकर्ताओं को इसके अवसरों के साथ-साथ गलत सूचना, गोपनीयता, डेटा अधिकार और स्रोतों की विश्वसनीयता जैसी चुनौतियों को भी समझना होगा.

क्या है स्थायी बदलाव का मकसद?

डीपीएस की प्रो वाइस चेयरपर्सन और आरजे कॉर्प के बोर्ड में निदेशक देवयानी जयपुरिया ने कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा ऐसी संस्था बनाने का रहा है, जो लंबे समय तक काम करती रहे. उन्होंने कहा कि कोई एक कार्यक्रम करने के बजाय ऐसी संस्था बनाना ज्यादा जरूरी है, जो हर साल नए अवसर पैदा करे और ज्यादा से ज्यादा लोगों की जिंदगी पर सकारात्मक असर डाले. उनके मुताबिक, शिक्षा और सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में यही सबसे बड़ा और स्थायी प्रभाव है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता रहता है.

फेक न्यूज पहचानना भी क्या लिटरेसी है?

डिजिटल युग में इसका जवाब काफी हद तक हां है. UNESCO की Media and Information Literacy की अवधारणा में गलत सूचना और भ्रामक जानकारी को पहचानना महत्वपूर्ण कौशल माना गया है. इसका मतलब है कि किसी वायरल पोस्ट, वीडियो या दावे को सिर्फ इसलिए सच नहीं मानना चाहिए क्योंकि उसे बड़ी संख्या में लोग शेयर कर रहे हैं.

किसी खबर को शेयर करने से पहले स्रोत देखना, तारीख जांचना, दूसरी विश्वसनीय रिपोर्ट से तुलना करना और तस्वीर या वीडियो के संदर्भ को समझना डिजिटल साक्षरता का हिस्सा बन गया है. UNESCO के अनुसार MIL लोगों को जानकारी को आलोचनात्मक तरीके से समझने और डिजिटल वातावरण में सुरक्षित तथा जिम्मेदारी से आगे बढ़ने में मदद करती है.

डीपफेक और AI से कैसे बचें?

AI के दौर में नकली तस्वीर, आवाज और वीडियो बनाना पहले की तुलना में आसान हो गया है. ऐसे में किसी वीडियो में किसी व्यक्ति का चेहरा या आवाज दिखाई देने भर से उसे असली मान लेना जोखिम भरा हो सकता है. खासकर सनसनीखेज दावों और भावनात्मक कंटेंट को शेयर करने से पहले अतिरिक्त जांच जरूरी है.

UNESCO की Media and Information Literacy की सोच इसी आलोचनात्मक क्षमता को मजबूत करने पर जोर देती है. किसी संदिग्ध कंटेंट का स्रोत देखना, मूल पोस्ट तलाशना, विश्वसनीय मीडिया या आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करना और बिना जांचे आगे शेयर न करना व्यावहारिक सावधानियां हैं.

आने वाले समय की साक्षरता कैसी होगी?

साक्षरता की पारंपरिक नींव यानी पढ़ना, लिखना और समझना आज भी उतनी ही जरूरी है, लेकिन डिजिटल दुनिया ने इसके ऊपर नई क्षमताओं की जरूरत पैदा कर दी है. अब एक साक्षर व्यक्ति से यह उम्मीद भी की जाती है कि वह जानकारी का मूल्यांकन कर सके, डिजिटल माध्यमों को समझ सके, AI के इस्तेमाल और जोखिमों को पहचान सके तथा गलत सूचना से खुद को बचा सके.

UNESCO का Media and Information Literacy फ्रेमवर्क इसी विस्तृत दृष्टिकोण को सामने रखता है. संगठन के अनुसार आधुनिक साक्षरता में जानकारी और मीडिया तक पहुंचने, उनका विश्लेषण और मूल्यांकन करने तथा डिजिटल वातावरण में जिम्मेदारी से भाग लेने की क्षमता महत्वपूर्ण है.

इस लिहाज से 21वीं सदी में साक्षरता का अर्थ सिर्फ यह नहीं है कि कोई व्यक्ति किताब पढ़ सकता है या अपना नाम लिख सकता है. सवाल यह भी है कि क्या वह डिजिटल दुनिया में मिली जानकारी को समझ सकता है, उसकी सच्चाई जांच सकता है और AI तथा सोशल मीडिया के प्रभावों के बीच सही फैसला ले सकता है. यही बदलाव आने वाले वर्षों में साक्षरता की परिभाषा को और व्यापक बनाएगा.

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About the Author

शिवम तिवारी, जी न्यूज में डिजिटल कंटेंट राइटर हैं और पत्रकारिता में करीब 2 साल से अधिक का अनुभव रखते हैं. यूपी के प्रयागराज के रहने वाले शिवम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है. खबरों की नब्ज पकड़कर उन्हें आसान और साफ भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. शिवम शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर खास फोकस रखते हैं. इनमें स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षाएं, प्रवेश परीक्षाएं, सरकारी नौकरियां, रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स, करेंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज जैसे टॉपिक्स शामिल हैं.इसके अलावा शिवम, टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स और करियर काउंसलर्स की सलाह के आधार पर कंटेंट तैयार करते हैं. ये IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT और CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर गहराई से काम करते हैं और छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराते हैं. शिवम तिवारीर से संपर्क करने के लिए आप उन्हें shivam.tiwari@india.com पर ईमेल कर सकते हैं.
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