UPSC Success Story: न कोचिंग, न कोई खास सुविधा; फिर कैसे पहली बार में UPSC टॉपर बने सत्यम गांधी?
UPSC Success Story of Satyam Gandhi: यूपीएससी परीक्षा में बिना कोचिंग के सत्यम गांधी ने 10वीं रैंक हासिल की. यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने कितना संघर्ष किया और कैसे वो यहां तक पहुंचे? आइए सत्यम गांधी की सफलता की कहानी जानते हैं.
UPSC Success Story of Satyam Gandhi: जीवन में भले ही उतार-चढ़ाव आएं, लेकिन अगर खुद पर भरोसा हो और आप मेहनत-लगन के साथ लक्ष्य को हासिल करने में जुट जाएं, तो कामयाबी जरूर मिलती है. कम और सीमित सुविधाओं के बावजूद आप सफलता की उस सीढ़ी को छू सकते हैं, जिसका सपना आप लंबे समय से देख रहे हैं. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो उस मुकाम को बहुत कम समय में हासिल कर लेते हैं, जिसे पाने में दूसरों को सालों लग जाते हैं. इसका बेहतरीन उदाहरण यूपीएससी टॉपर सत्यम गांधी हैं, जिन्होंने ये साबित कर दिखाया कि बिना कोचिंग के भी पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में टॉप किया जा सकता है.
कौन हैं सत्यम गांधी?
सत्यम गांधी मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के पूसा ब्लॉक के दिघड़ा गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने स्थानीय स्तर पर ही अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज से राजनीति विज्ञान में B.A. Hons. की डिग्री ली. यूपीएससी में उन्होंने अपने ग्रेजुएशन के विषय 'राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध' को ही ऑप्शनल सब्जेक्ट के तौर पर चुना था.
बिना कोचिंग के UPSC CSE में सफलता
कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने यूपीएससी परीक्षा देने का मन बना लिया था और इसकी तैयारी में जुट गए. बिना किसी नियमित कोचिंग के उन्होंने मुख्य रूप से खुद से पढ़ाई की और टेस्ट सीरीज के अभ्यास से सफलता हासिल की. सत्यम ने केवल 22 साल की उम्र में ये उपलब्धि पाई. इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित हुआ और वर्तमान में वो प्रशासनिक सेवाओं के तहत विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं.
कैसे शुरू हुआ कॉलेज से यूपीएससी तक का सफर?
सत्यम के लिए यूपीएससी तक का सफर आसान नहीं था. ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए वो अपना गांव छोड़कर नई दिल्ली आए और एक नए शहर में अपनी पढ़ाई शुरू की. दयाल सिंह कॉलेज से राजनीति शास्त्र में ग्रेजुएशन के बाद साल 2020 में उन्होंने दिल्ली में ही रहकर तैयारी जारी रखने का फैसला किया. इस दौरान उनके माता-पिता उनका सबसे बड़ा सहारा बने और उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए बैंक से लोन भी लिया.
पढ़ाई के साथ करते थे काम
आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी न होने के कारण वो कॉलेज के समय में फ्रीलांस काम और प्रोजेक्ट्स भी करते थे. उनकी जिंदगी में ये एक बड़ा फाइनेंशियल स्ट्रगल था, लेकिन उन्होंने इसे कभी अपनी पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया. उन्होंने दिन-रात मेहनत की, सही स्टडी मटेरियल चुना, इंटरनेट और टेस्ट सीरीज का समझदारी से इस्तेमाल करके अपनी तैयारी को मजबूत बनाया. वो रोजाना 8-9 घंटे तक पढ़ाई करते थे और स्टडी प्लानिंग के साथ उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पहले प्रयास में ही क्रैक कर ऑल इंडिया रैंकिंग 10वीं रैंक हासिल की. आज, सत्यम गांधी की सफलता की कहानी लाखों युवाओं को प्रेरित कर सकती है.
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