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कोटा सुसाइड मामला: घर से मीलों दूर जब एक छात्र कोटा निकलता है, तो उसके बस्ते में उम्मीदें और आंखों में सपनों की चमक होती है. NEET और जेईई जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के गढ़, कोटा में हर साल लाखों अभ्यर्थी आते हैं. कोटा की गलियारों में तैयारी की गूंज सुनाई देती है, लेकिन कई बार सपनों के टूटने का डर या असफलता का बोझ इस कदर सवार हो जाता है कि छात्र ऐसा कदम उठा लेते हैं, जिसके बारे में कोई सोच नहीं सकता.
इस साल ही कोटा में सभी हॉस्टल और पीजी में छात्रों की सुरक्षा के लिए पंखों पर 'एंटी-हैंगिंग डिवाइस' लगाने का आदेश दिया गया था, जिससे सुसाइड जैसी घटनाओं को रोका जा सके. हालांकि, कोटा में छात्र ने फिर भी फांसी लगाकर अपने हॉस्टल में आत्महत्या कर ली.
जेईई की तैयारी कर रहे उत्तर प्रदेश के रहने वाले छात्र ने अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली. सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि हॉस्टल के पंखों पर सुसाइड रोकने के लिए 'एंटी-हैंगिंग डिवाइस' लगे होने के बावजूद छात्र ने अपनी जान दे दी. बताया जा रहा है कि छात्र ने ऑनलाइन एक जिम-स्टाइल वाली धातु की रॉड मंगवाई और फिर उसके जरिए जानलेवा कदम उठाया.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, छात्र पिछले करीब एक साल से कोटा में रहकर ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JEE) की तैयारी कर रहा था. ये घटना 2 नवंबर, सोमवार की है. छात्र के शव के पास पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिस पर 'सॉरी, मम्मी-पापा' लिखा हुआ है. पुलिस मामले की जांच कर रही है और शव को पोस्टमार्टम के लिए एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी में भेजा गया है.
डीएसपी मनीष शर्मा के अनुसार, छात्र हॉस्टल में रहकर ऑनलाइन कोचिंग ले रहा था. 2 नवंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे जवाहर नगर पुलिस को छात्र द्वारा सुसाइड किए जाने की सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची. काफी देर तक कमरा न खुलने पर जब साथी छात्रों को शक हुआ, तो उन्होंने दरवाजा तोड़कर देखा. छात्र बाथरूम में मृत अवस्था में पाया गया. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कमरे को सील कर दिया गया है. घटना की जानकारी छात्र के परिजनों को दे दी गई है.
जानकारी के लिए बता दें कि जिस कमरे में छात्र रह रहा था, वहां नियमानुसार पंखे पर 'एंटी-हैंगिंग डिवाइस' लगा हुआ था. हालांकि, छात्र ने ऑनलाइन एक जिम-स्टाइल धातु की रॉड मंगवाई और उसी के सहारे यह जानलेवा कदम उठाया. इस घटना के बाद हॉस्टल प्रबंधन की व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं. आखिर हॉस्टल परिसर में इस तरह की खतरनाक सामग्री कैसे पहुंची और छात्रों द्वारा ऑनलाइन मंगाए जाने वाले पार्सल व सामान की कोई जांच या निगरानी क्यों नहीं की जा रही थी?