NEET-UG 2026 विवाद: पेपर लीक से लेकर सुप्रीम कोर्ट के अल्टीमेटम तक, जानिए अब तक की पूरी टाइमलाइन
नीट-यूजी 2026 विवाद में परीक्षा रद्द होने से लेकर दोबारा एग्जाम, रिजल्ट, काउंसलिंग और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई तक की पूरी टाइमलाइन. एनटीए में सुधार को लेकर अदालत ने क्या कहा और आगे क्या बदल सकता है?
साल 2026 की NEET-UG परीक्षा ने लाखों मेडिकल एस्पिरेंट्स के भविष्य को एक बड़े सवालिया निशान के सामने खड़ा कर दिया. 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा से शुरू हुआ यह घटनाक्रम पेपर लीक के दावों, परीक्षा के रद्द होने, सीबीआई जांच और री-एग्जाम से गुजरते हुए अब देश की सबसे बड़ी अदालत के चौखट पर है.
जहां एक तरफ काउंसलिंग का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की साख और कार्यप्रणाली में बड़े स्थायी बदलावों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है. आइए, जानते हैं विवाद की शुरुआत से लेकर सुप्रीम कोर्ट की ताजा सुनवाई तक की पूरी इनसाइड स्टोरी.
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की थी. परीक्षा के कुछ ही दिन बाद पेपर लीक के आरोप सामने आए, जिसके बाद एनटीए ने 12 मई 2026 को यह परीक्षा रद्द कर दी. इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई. परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए, जिनमें कॉकरोच जनता पार्टी नाम के संगठन के प्रदर्शन भी शामिल रहे.
दोबारा परीक्षा और रिजल्ट
एनटीए ने NEET की दोबारा परीक्षा 21 जून 2026 को देश और विदेश के केंद्रों पर आयोजित की. इसके बाद 25 जून 2026 को री-एग्जाम की आंसर की जारी हुई और 25 से 28 जून तक आपत्ति दर्ज करने की खिड़की खुली रखी गई. आखिरकार 16 जुलाई 2026 को एनटीए ने फाइनल आंसर की के साथ रिजल्ट घोषित किया. पंजाब के आर्यन गुप्ता ने 715 अंकों के साथ ऑल इंडिया टॉप किया. रिजल्ट के बाद मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने 4 अगस्त 2026 से काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू की, जो कई राउंड में चल रही है.
सुप्रीम कोर्ट में क्या चल रहा है
पेपर लीक विवाद के बाद फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन यानी FAIMA सहित कई पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कीं, जिनमें एनटीए को भंग करने और परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की मांग की गई. FAIMA का कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियां 22.7 लाख से ज्यादा मेडिकल कैंडिडेट्स के अधिकारों पर सीधा हमला हैं. संगठन ने यह भी मांग की कि जब तक कोई नई व्यवस्था नहीं बन जाती, तब तक दोबारा परीक्षा की निगरानी के लिए एक हाई-पावर कमेटी बनाई जाए.
कोर्ट ने कहा कि एनटीए के पास इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी संसाधन और क्षमता होनी चाहिए. सरकार ने कोर्ट को बताया कि पेपर लीक रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच कर रही है.
19 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को यह बताने का निर्देश दिया कि परीक्षा सुधार को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं. कोर्ट ने केंद्र सरकार से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिए एक हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें पूर्व इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति और नंदन नीलेकणी समिति की सिफारिशों पर उठाए गए कदमों की जानकारी हो. कोर्ट ने साफ कहा कि एनटीए में सुधार को अस्थायी उपायों की बजाय स्थायी रूप से संस्थागत करने की जरूरत है और परीक्षा को पेपर आधारित से कंप्यूटर आधारित मोड में ले जाने पर भी विचार होना चाहिए, जैसा जेईई परीक्षा में होता है.
सात सदस्यीय राधाकृष्णन समिति शिक्षा मंत्रालय ने पेपर लीक के बाद ही बनाई थी, ताकि परीक्षा प्रक्रिया, डेटा सुरक्षा और एनटीए के ढांचे को लेकर सुधार के सुझाव दिए जा सकें. कोर्ट ने यह भी कहा कि बार-बार नई समितियां बनाने की बजाय लंबे समय तक चलने वाले सुधारों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, और राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को नंदन नीलेकणी टास्क फोर्स की वजह से पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
अभी मामला कहां खड़ा है
फिलहाल NEET-UG 2026 का रिजल्ट और काउंसलिंग प्रक्रिया चल रही है, यानी छात्रों के लिए दाखिले की राह खुली हुई है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में एनटीए के ढांचागत सुधार को लेकर सुनवाई अब भी जारी है, और केंद्र सरकार को तय समय में यह बताना है कि सुधार को लेकर सुझाई गई सिफारिशों पर अमल कहां तक पहुंचा है.
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2026 को NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों और प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली समेत अन्य राज्यों में दर्ज सभी FIR रद्द करने का आदेश दिया. कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला सुनाया. इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च भी रद्द कर दिया है. खास बात यह है कि केंद्र सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की थी.