NEET Paper Leak: CBT मोड और लास्ट-मिनट पेपर जनरेशन! क्या यही है NTA में सुधार का 'नीलेकणि फॉर्मूला'?
NEET पेपर लीक मामला सामने आने के बाद से एजेंसी में सुधार के लिए सरकार की लगातार कोशिश जारी है. टास्क फोर्स के प्रमुख नंदन नीलेकणि ने परीक्षा सिस्टम को बदलने का सुझाव साझा किया है.
NEET Paper Leak: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) नीट पेपर लीक मामले के बाद से ही लगातार विवादों और सवालों के घेरे में है. इससे स्टूडेंट्स के बीच एनटीए के एग्जाम सिस्टम को लेकर न सिर्फ विश्वास में कमी आई, बल्कि उन्हें अपने भविष्य की चिंता भी सताने लगी. एजेंसी में सुधार के लिए बनाई गई टास्क फोर्स के बीच भी ये एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है कि कैसे नीट पेपर लीक को रोका जा सकता है.
सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि आगामी नीट यूजी परीक्षा को पेन-पेपर मोड की जगह JEE की तर्ज पर कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT Mode) में आयोजित किया जा सकता है. इसी कड़ी में अब टास्क फोर्स के प्रमुख नंदन नीलेकणि ने एक खास 'फॉर्मूला' सुझाया है, जो इस पूरे परीक्षा सिस्टम को बदल सकता है.
कौन हैं नंदन नीलेकणि?
देश की प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को केंद्र सरकार ने परीक्षाओं में सुधार के लिए गठित उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का प्रमुख बनाया है. इस बात की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी. नंदन नीलेकणि को मुख्य रूप से भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली 'आधार' (Aadhaar) के सफल विकास और क्रियान्वयन के लिए जाना जाता है. वो भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पहले चेयरमैन थे, जिन्होंने साल 2009 से 2014 तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी.
लास्ट मिनट पर तैयार होना चाहिए नीट प्रश्न पत्र
हाई पावर टास्क फोर्स टीम के हेड नंदन नीलेकणि ने एनटीए में सुधार करने की बात करते हुए एक इंटरव्यू में नीट पेपर लीक से निपटने और एग्जाम सिस्टम को अधिक मजबूत बनाना का सुझाव दिया है जो कहीं न कहीं एक लंबे समय से बड़ी चुनौती बना हुआ है. दरअसल, ब्लूमबर्ग को एक इंटरव्यू में नंदन नीलेकणि ने कहा है कि नीट पेपर लीक रोकने के लिए लास्ट मिनट पर प्रश्न पत्र तैयार होना चाहिए. आखिरी समय में पेपर फाइल होने से इस मेडिकल प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक होने से रोका जा सकता है.
नीट पेपर लीक रोकने का नीलेकणि फॉर्मूला क्या है?
इंटरव्यू के दौरान नंदन नीलेकणि ने एक सवाल किया कि किसी परीक्षा के लिए क्वेश्चन पेपर क्यों जरूरी हैं? अगर प्रश्न पत्र होता है तो उसे बेचने वाले पहले आ जाते है. ऐसे में उन्होंने एक हल बताया कि कई सारे सवालों का एक बैंक होना चाहिए, जिसे क्वेश्चन पेपर बैंक कह सकते हैं और उसमें से ही लास्ट समय पर सवाल तैयार होने चाहिए. इस तरह से पेपर लीक होने जैसा मुद्दा खत्म हो सकता है और कोई आर्थिक लालची भी क्वेश्चन पेपर होने पर उसे बेच नहीं सकेगा.
ऑनलाइन होनी चाहिए परीक्षा
नंदन नीलेकणि ने आगे बताया कि नीट पेपर लीक को रोकने के लिए एक और तरीका ये भी है कि परीक्षा का आयोजन सीबीटी मोड में होना चाहिए. उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि सभी परीक्षाएं कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग (CBT) होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि 1,50,000 ऐसी जगहें हैं जहां पर छात्र सीबीटी मोड में एग्जाम दे सकते हैं. सभी परीक्षा सिस्टम को सीबीटी मोड अपनाना चाहिए और इस पर हाई पावर टास्क फोर्स टीम भी काम करेगी.
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