)
MPSC Paper Leak Protest Update: पुणे के एसएम जोशी ब्रिज पर पिछले 10 दिनों से धधक रहा MPSC छात्रों का आक्रोश आखिरकार रंग लाया है. सरकार के झुकने और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में हाई-लेवल जांच कमेटी के गठन के बाद छात्रों ने अपना महा-आंदोलन खत्म कर दिया है. इस बीच, पेपर लीक और अनियमितताओं के घेरे में घिरे MPSC चेयरमैन विवेक भीमनवार ने भी बड़ा कदम उठाते हुए जांच पूरी होने तक पद से हटने का ऐलान कर दिया है.
अपनी नैतिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए MPSC के चेयरमैन विवेक भीमनवार ने अपने सोशल मीडिया 'X' हैंडल पर लिखा है कि 'राज्य सरकार ने MPSC पेपर लीक मामले की न्यायिक जांच की घोषणा की है. मैंने अपने पूरे जीवन में हमेशा नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी है. इसलिए मैंने निर्णय लिया है कि इस जांच के पूरा होने तक अपने पद पर बने रहने के बजाय छुट्टी पर रहूंगा.' उनकी इस पोस्ट के जरिए सभी को ये भरोसा दिलाने की कोशिश की जा रही है कि संस्थान की साख, पारदर्शिता और छात्रों के हितों की रक्षा करना ही उनका मुख्य उद्देश्य रहा है.
एमपीएससी पेपरफूट प्रकरणात राज्य सरकारने न्यायालयीन चौकशीची घोषणा केली आहे. मी माझ्या संपूर्ण आयुष्यात नैतिकतेला कायम प्राधान्य दिले. त्यामुळे ही चौकशी पूर्ण होईस्तोवर पदावर कार्यरत न राहता या कालावधीत रजेवर जाण्याचा निर्णय मी घेतला आहे. एमपीएससीची स्वायत्तता, विश्वसनीयता आणि विद्यार्थीहिताला कायम माझे प्राधान्य होते आणि यापुढेही असेल. जयहिंद ! जय महाराष्ट्र !
— Vivek Bhimanwar, IAS (@bhimanwar) October 11, 2026
MPSC में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को कमान सौंपे जाने के बाद, छात्रों ने रविवार देर रात अपना 10 दिन लंबा आंदोलन समाप्त कर दिया. इससे पहले, मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले के नेतृत्व में राज्य सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात कर उन्हें बताया कि मुंढे जैसे सख्त अधिकारियों के साथ जांच समिति के गठन समेत उनकी ज्यादातर मांगें स्वीकार कर ली गई हैं. हालांकि, पिछले 10 दिनों से पुणे के एसएम जोशी ब्रिज पर डटे छात्रों की मुख्य जिद चेयरमैन विवेक भीमनवार को पद से हटाने की थी, साथ ही वो MPSC में व्यापक सुधारों की भी मांग कर रहे थे.
पिछले 10 दिनों से डटे MPSC उम्मीदवारों की सबसे प्रमुख मांग चेयरमैन विवेक भीमनवार को पद से हटाने की थी. इसके अलावा आयोग के पूरे ढर्रे में पारदर्शिता लाने और प्रशासनिक सुधारों की मांग भी छात्रों की ओर से की जा रही थी.
बता दें कि प्रदर्शन में शामिल एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने एक व्यावहारिक रास्ता निकालते हुए प्रस्ताव रखा था कि चूंकि इस्तीफे की कानूनी प्रक्रिया में समय लग सकता है, इसलिए जांच पूरी होने तक सरकार भीमनवार को चेयरमैन पद के कामकाज से दूर रखे. हालांकि, इस प्रस्ताव से प्रदर्शन स्थल पर कुछ देर के लिए असमंजस की स्थिति बन गई और छात्रों के बीच मतभेद नजर आए. जहां कुछ छात्र इसे लेकर तैयार रहे थे तो कुछ अन्य भीमनवार के पूर्ण निष्कासन से कम पर मानने को तैयार नहीं थे.
इस अनिश्चितता और भ्रम को दूर करने के लिए मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले ने खुद कमान संभाली. वो छात्रों की सीधी मांग लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा करने पहुंचे. महज 15 मिनट में वापस लौटकर उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सूचित किया कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर पूरी तरह सहमत हो गई है. मंत्री द्वारा आंदोलन समाप्त करने की अपील के बाद, MPSC उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों ने आखिरकार 10 दिनों से चले आ रहे इस महा-आंदोलन को वापस लेने का ऐलान कर दिया.