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Rishi Shiv Prasanna: सोचिए, जिस उम्र में बच्चे या तो घंटों स्मार्टफोन पर गेम खेलते हैं या फिर खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, उसी उम्र में एक भारतीय बच्चा अपने असाधारण IQ के दम पर अल्बर्ट आइंस्टीन को टक्कर दे रहा है. हम बात कर रहे हैं ऋषि शिव प्रसन्ना की, जिन्होंने खुद को सिर्फ कार्टून या वीडियो गेम्स तक सीमित नहीं रखा, बल्कि बेहद कम उम्र में ऐसी उपलब्धियां हासिल कर लीं जिन्हें देखकर हर कोई हैरान है.
ऋषि शिव प्रसन्ना को आज उनकी अद्भुत प्रतिभा के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है. महज 12 साल की उम्र तक आते-आते वे न सिर्फ कई एंड्रॉइड ऐप्स डेवलप कर चुके हैं, बल्कि 8 किताबें भी लिख चुके हैं. आइए बाल प्रतिभा ऋषि शिव प्रसन्ना के बारे में जानते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब ऋषि शिव प्रसन्ना से मुलाकात की थी तब वो 12 साल के वंडर किड की प्रतिभा को देखकर हैरान रह गए थे. 8 साल की उम्र में ऐप डेवलपर बनने और 8 से ज्यादा किताबें लिखने वाले ऋषि शिव प्रसन्ना को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है. 8 साल की उम्र के 180 IQ वाले और सबसे कम उम्र के सर्टिफाइड Android डेवलपर होने के कारण ऋषि को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
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— Ministry of WCD (@MinistryWCD) April 25, 2025
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आधिकारिक X पर ऋषि शिव प्रसन्ना के बारे में जानकारी दी गई है. पोस्ट में उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऋषि मूल तौर पर कर्नाटक के मैसूर जिले के नंजनगूड कस्बे के रहने वाले हैं. इससे पहले वो साल 2023 में बेंगलुरु के उत्तरहल्ली इलाके में रहते थे. उनकी मां राचेश्वरी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर और पिता प्रसन्न कुमार एम. इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर पद पर हैं. ऋषि की प्रतिभा की जानकारी स्कूल शिक्षकों ने तब ही देख ली थी जब वो काफी छोटा था. टीचर्स ने देखा था कि वो अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तुलना में ज्यादा समझदार और नई चीजों को ज्यादा जल्दी समझते हैं.
ऋषि शिव प्रसन्ना बचपन से ही असाधारण प्रतिभा के धनी रहे हैं. उनकी इस सफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी जिज्ञासा और टेक्नोलॉजी के प्रति सीखने की ललक रही है. कम उम्र से ही उन्हें साइंस, अंतरिक्ष और ग्रहों के बारे में जानने में गहरा इंटरेस्ट था. इसी उत्सुकता ने उन्हें कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की ओर आकर्षित किया. ऋषि ने महज 5 साल की उम्र में कोडिंग सीखनी शुरू कर दी थी और 8 साल की उम्र आते-आते उन्होंने अपना पहला एंड्रॉयड ऐप भी डेवलप कर लिया था.
टेक्नोलॉजी पर अपनी मजबूत पकड़ के दम पर ऋषि ने बेहद कम उम्र में 3 उपयोगी मोबाइल ऐप्स विकसित किए, जो बच्चों और आम लोगों के लिए काफी मददगार साबित हुए.
ऋषि का कोविड हेल्पलाइन ऐप महामारी के दौरान बेंगलुरु के नागरिकों के लिए बेहद मददगार साबित हुआ था. टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उनके इसी असाधारण योगदान के लिए उन्हें इनोवेशन कैटेगरी के तहत 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2023' से सम्मानित किया गया.