'लाइट, कैमरा, करियर': Gen Z को क्यों भा रही है फिल्म इंडस्ट्री? जानिए कोर्सेज, फीस और कमाई
Career in Film Industry: फिल्म मेकिंग, एक्टिंग या डायरेक्शन में करियर बनाना चाहते हैं? तो उससे पहले ये जान लीजिए कि फीस स्ट्रक्चर, एडमिशन प्रोसेस और करियर स्कोप क्या है?
Career in Film Industry: आज का दौर नेम, फेम और ग्लैमर से भरा हुआ है. हर कोई अपने अंदर छिपे कलाकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए सामने लाने में जुटा है. डिजिटल स्पेस में पली-बढ़ी Gen Z भी इसमें पीछे नहीं है. स्नैपचैट और इंस्टाग्राम रिल्स पर अपने कंटेंट से तहलका मचाने के बाद अब इस पीढ़ी की नजरें सिनेमा और डिजिटल एंटरटेनमेंट जगत पर टिक गई हैं. कोई फिल्म प्रोड्यूसर बनना चाहता है, तो कोई सिनेमैटोग्राफी, वीडियो एडिटिंग या साउंड डिजाइनिंग के फील्ड में उतरना चाहता है.
वहीं, लाखों युवा अभिनय में अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री सिर्फ कैमरे के आगे दिखने का नाम नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे भी करियर के दर्जनों शानदार मौके मौजूद हैं? अगर फिल्म इंडस्ट्री में करियर बनाने का मन बना रहे हैं, तो एडमिशन लेने से पहले इसका कोर्स स्ट्रक्चर, संस्थान, फीस और पढ़ाई के बाद होने वाली कमाई का पूरा हिसाब-किताब जरूर समझ लें.
सिनेमा में करियर का असली मतलब क्या है?
जब भी कोई 'सिनेमा में करियर' बनाने की बात करता है, तो आमतौर पर लोगों के दिमाग में सिर्फ कैमरे के सामने दिखने वाले अभिनेता या अभिनेत्री का चेहरा आता है, लेकिन असलियत ये है कि एक 2 घंटे की फिल्म को पर्दे तक पहुंचाने के पीछे सैकड़ों लोगों की मेहनत और अलग-अलग टेक्निकल स्किल्स शामिल होती हैं.
हालांकि, सिनेमा जगत सिर्फ पर्दे के आगे चमकने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे भी करियर के कई शानदार और हाई-पेइंग विकल्प मौजूद हैं जैसे- डायरेक्टर और असिस्टेंट डायरेक्टर, स्क्रीनप्ले और डायलॉग राइटर, वीडियो और फिल्म एडिटर, साउंड इंजीनियर या म्यूजिक प्रोड्यूसर, सिनेमैटोग्राफर, आर्ट डायरेक्टर और सेट डिजाइनर, कॉस्ट्यूम डिजाइनर, मेकअप और हेयर आर्टिस्ट आदि.
सही राह कैसे चुनें?
सिनेमा की दुनिया में सफलता पाने का सीधा मूलमंत्र अपनी रुचि और क्षमता को पहचानना है. अगर आपको कहानियों में दिलचस्पी है तो लेखन चुनें, अगर दृश्यों और एंगल्स की समझ है तो कैमरे या एडिटिंग की राह पकड़ें. अपनी पसंद तय करने के बाद पूरा फोकस उसी स्किल को निखारने, उससे जुड़े प्रोफेशनल कोर्स करने और उससे संबंधित सटीक जानकारी जुटाने में लगाएं.
एक्टिंग में करियर कैसे बनाएं?
आज के दौर में एक्टिंग के क्षेत्र में मौकों की कोई कमी नहीं है. सिर्फ बॉलीवुड या क्षेत्रीय फिल्में ही नहीं, बल्कि वेब सीरीज, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, टीवी शोज, म्यूजिक वीडियोज, थिएटर और शॉर्ट फिल्मों के आने से टैलेंटेड एक्टर्स की मांग काफी बढ़ गई है. आमतौर पर लोग सोचते हैं कि एक्टिंग के लिए किसी पढ़ाई या डिग्री की जरूरत नहीं होती, लेकिन सच ये है कि फॉर्मल ट्रेनिंग आपकी बॉडी लैंग्वेज, वॉयस मॉड्यूलेशन, एक्सप्रेशन्स और कैमरा फेसिंग की स्किल को निखारने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है.
एक्टिंग सीखने और पहला ब्रेक पाने के लिए क्या करें?
प्रोफेशनल ट्रेनिंग चुनें:- एक्टिंग सीखने के लिए आप किसी नेशनल इंस्टीट्यूट (जैसे NSD दिल्ली, FTII पुणे, SRFTI कोलकाता), प्राइवेट एक्टिंग स्कूल, थिएटर ग्रुप या इंटेंसिव एक्टिंग वर्कशॉप जॉइन कर सकते हैं.
थिएटर और स्टेज प्रैक्टिस:- अपनी एक्टिंग को मांझने के लिए थिएटर ग्रुप्स के साथ जुड़कर नाटकों में हिस्सा लें. इससे लाइव परफॉर्मेंस और डायलॉग डिलीवरी में निखार आता है.
नेटवर्किंग और कास्टिंग डायरेक्टर्स से संपर्क:- इस इंडस्ट्री में सिर्फ कोर्स कर लेना काफी नहीं है. आपको कास्टिंग डायरेक्टर्स, प्रोडक्शन हाउस और इंडस्ट्री के लोगों के साथ प्रोफेशनल नेटवर्किंग बनानी होगी.
ऑडिशन्स और शोरील:- लगातार ऑडिशन्स दें और अपनी बेहतरीन एक्टिंग का 1-2 मिनट का 'शोरील या ऑडिशन वीडियो' तैयार रखें. आपकी लगातार प्रैक्टिस और सही ऑडिशन ही आपको आपका पहला ब्रेक दिलाएगा.
फिल्म डायरेक्टर कैसे बनते हैं?
अगर आपको कहानियों को विजुअल रूप में पर्दे पर उतारना, कलाकारों से बेहतरीन एक्टिंग कराना और पूरी फिल्म की रचनात्मक दिशा तय करना पसंद है, तो डायरेक्शन आपके लिए सबसे बेहतरीन करियर हो सकता है. एक निर्देशक फिल्म का 'कैप्टन ऑफ द शिप' होता है. उसे स्क्रिप्ट, कैमरा, लोकेशन, लाइटिंग, साउंड और पोस्ट-प्रोडक्शन जैसे हर विभाग के साथ तालमेल बिठाकर फिल्म के विजन को आकार देना होता है.
ट्रेनिंग और मुख्य कोर्सेज फिल्म मेकिंग और डायरेक्शन में सफल होने के लिए औपचारिक ट्रेनिंग और व्यावहारिक समझ बहुत काम आती है. भारत में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII, पुणे) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान इसके लिए जाने जाते हैं.
FTII, पुणे में कौन-कौन से कोर्स उपलब्ध हैं?
- निर्देशन और पटकथा लेखन
- सिनेमैटोग्राफी
- फिल्म एडिटिंग
- साउंड रिकॉर्डिंग या साउंड डिजाइन
- आर्ट डायरेक्शन या प्रोडक्शन डिजाइन
- स्क्रीन एक्टिंग
कितना आता है खर्च?
अब जो सवाल हर युवा या छात्र के मन में आता है, जो सिनेमा में अपना करियर बनाना चाहते हैं, वह ये है कि फिल्म की पढ़ाई के लिए आखिर कितने पैसे लगते हैं? वैसे तो सिनेमा में करियर बनाना बाहर से ही काफी महंगा लगता है. लेकिन फिल्म की पढ़ाई की फीस संस्थान, कोर्स की अवधि और विशेषज्ञता के हिसाब से काफी बदल सकती है. इसे समझने के लिए सरकारी और निजी संस्थानों में बड़ा अंतर हो सकता है.
फिल्म मेकिंग और सिनेमा कोर्सेज का फीस स्ट्रक्चर क्या है?
फिल्म मेकिंग में फीस और बजट को समझना हर इच्छुक छात्र के लिए बहुत जरूरी है. भारत के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों जैसे FTII पुणे और SRFTI कोलकाता में पढ़ाई प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के मुकाबले काफी सस्ती और हाई-क्वालिटी है. अगर सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट यानी SRFTI कोलकाता की बात करें, तो 2026 की आधिकारिक संरचना के अनुसार रेगुलर कोर्सेज में ट्यूशन फीस 47,861 रुपये प्रति सेमेस्टर तय की गई है. इसके अलावा एडमिशन के समय 8,493 रुपये वन-टाइम प्रवेश शुल्क और 71,038 रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में देने होते हैं.
वहीं, फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया यानी FTII पुणे के MFA इन सिनेमा प्रोग्राम में पहले सेमेस्टर की ट्यूशन फीस 46,885 रुपये है, जबकि हॉस्टल, डिपॉजिट और अन्य मदों को मिलाकर 62,689 रुपये का अतिरिक्त शुल्क जमा करना पड़ता है. इसके बाद के सेमेस्टर्स में ट्यूशन फीस 46,884 रुपये और हॉस्टल और अन्य शुल्क घटकर 19,408 रुपये रह जाता है.
शॉर्ट-टर्म और ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स के लिए कितनी फीस?
अगर आप कम बजट और कम समय में स्किल्स सीखना चाहते हैं, तो FTII के ऑनलाइन या शॉर्ट-टर्म कोर्सेज एक बेहतरीन जरिया हैं. बात करें स्क्रीनप्ले राइटिंग ऑनलाइन कोर्स की तो उसके लिए 20,000 से 22,000 रुपये तक फीस लगेगी. वहीं, फिल्म एंड AI सिनेमा स्पेशल वर्कशॉप की फीस 45,000 रुपये तक है. वहीं, अगर आप प्राइवेट संस्थानों के जरिए 3 साल के डिग्री कोर्सेज को करते हैं तो करीब 5 लाख से 15 लाख के बीच फीस हो सकती है.
कितनी कमाई होती है?
फिल्म इंडस्ट्री में कमाई कोई फिक्स्ड मंथली सैलरी जैसी नहीं होती है. ये आपके एक्सपीरिएंस या नेटवर्क की मजबूती के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. हजारों रुपये से लाखों रुपये तक की भी एक साथ कमाई हो सकती है. शुरुआत में जूनियर एक्टर या थियेटर आर्टिस्ट को 3,000 से 10,000 रुपये प्रति दिन पैसे दिए जा सकते हैं. मेकअप, स्टाइलिंग, एक्टिंग, जूनियर आर्टिस्ट और लाइटिंग क्रू को अक्सर हर दिन के हिसाब से पैसे मिलते हैं.
ये भी पढ़ें- मर्चेंट नेवी में करियर: कितनी करनी होगी पढ़ाई-लिखाई? कोर्स से लेकर सैलरी पैकेज तक सब कुछ यहां जानिए