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14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है. लंबे समय तक हिंदी को लेकर बहस मुख्य रूप से सरकारी कामकाज, शिक्षा और प्रशासन की भाषा तक सीमित रही. लेकिन इंटरनेट और स्मार्टफोन के विस्तार ने हिंदी की भूमिका को काफी बदल दिया है. अब हिंदी सिर्फ सरकारी दस्तावेजों या साहित्य की भाषा नहीं है, बल्कि वीडियो, सोशल मीडिया, ऑनलाइन सर्च, डिजिटल न्यूज और AI चैटबॉट्स तक पहुंच चुकी है.
आज सवाल यह नहीं है कि हिंदी इंटरनेट पर मौजूद है या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि क्या हिंदी इंटरनेट की सबसे बड़ी भाषाई ताकतों में से एक बन रही है?
कितने भारतीय इंटरनेट पर भारतीय भाषाएं इस्तेमाल कर रहे हैं?
IAMAI और Kantar की Internet in India Report 2024 के मुताबिक, 2024 में भारत में 886 मिलियन यानी 88.6 करोड़ एक्टिव इंटरनेट यूजर्स थे. इनमें करीब 98% यूजर्स ने इंटरनेट पर Indic भाषाओं में कंटेंट एक्सेस किया. वहीं शहरी भारत में 57% इंटरनेट यूजर्स ने अंग्रेजी के बजाय भारतीय भाषाओं में इंटरनेट कंटेंट को प्राथमिकता देने की बात कही.
यानी इंटरनेट का विस्तार सिर्फ यूजर्स की संख्या नहीं बढ़ा रहा, बल्कि यह भाषा के इस्तेमाल का तरीका भी बदल रहा है. खासकर ग्रामीण भारत इस बदलाव का बड़ा केंद्र है. 2024 में ग्रामीण भारत में 48.8 करोड़ एक्टिव इंटरनेट यूजर्स थे, जो देश के कुल इंटरनेट यूजर्स का 55% थे.
हिंदी की डिजिटल हिस्सेदारी कितनी बड़ी है?
Indic भाषाओं में हिंदी की मौजूदगी खास तौर पर महत्वपूर्ण है. IAMAI-Kantar के आंकड़ों में शहरी इंटरनेट यूजर्स की भाषा पसंद में हिंदी की हिस्सेदारी 24% बताई गई है. तमिल, तेलुगु, मलयालम, मराठी, बंगाली, कन्नड़ और दूसरी भारतीय भाषाएं भी तेजी से डिजिटल स्पेस में अपनी जगह बना रही हैं.
इसका मतलब यह भी है कि भारत का इंटरनेट सिर्फ English-first नहीं रह गया है. यूजर जिस भाषा में सोचता, बोलता और रोजमर्रा की जानकारी समझता है, उसी भाषा में इंटरनेट पर जानकारी खोजने की मांग भी बढ़ रही है.
क्या वीडियो ने हिंदी इंटरनेट को सबसे ज्यादा बढ़ाया?
भाषाई इंटरनेट की सबसे बड़ी ताकत वीडियो है. 2024 के आंकड़ों के मुताबिक Indic भाषाओं का इस्तेमाल करने वाले इंटरनेट यूजर्स में 81% वीडियो देखते हैं, जबकि 69% संगीत सुनते हैं. सोशल नेटवर्किंग में भी भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल 36% यूजर्स करते हैं. ऑनलाइन सर्च में यह आंकड़ा 19% है.
यही वजह है कि YouTube, Instagram, short-video platforms और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म पर हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में कंटेंट की मात्रा लगातार बढ़ी है.
अब यूजर सिर्फ खबर पढ़ना नहीं चाहता. वह पूछता है NEET का रिजल्ट कब आएगा?, सरकारी नौकरी की तैयारी कैसे करें?, कौन सा कोर्स बेहतर है?, टैक्स कैसे भरें? और इन सवालों के जवाब अपनी भाषा में चाहता है.
AI ने हिंदी के लिए क्या बदल दिया?
यहीं AI इस पूरी कहानी को और बड़ा बना देता है. पहले इंटरनेट पर भारतीय भाषाओं में पर्याप्त कंटेंट तैयार करना एक चुनौती थी. अनुवाद, टाइपिंग, वॉयस-टू-टेक्स्ट और कंटेंट प्रोडक्शन में समय लगता था.
AI ने इस प्रक्रिया को काफी तेज कर दिया है. अब हिंदी में सवाल पूछकर जानकारी हासिल करना, हिंदी टेक्स्ट को दूसरी भाषा में बदलना, आवाज को टेक्स्ट में बदलना और टेक्स्ट से कंटेंट तैयार करना आसान हो गया है.
Google-Kantar की 2025 की एक स्टडी में 8,000 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया था. Google के मुताबिक, 75% भारतीय रोजमर्रा की जिंदगी में एक ऐसे AI सहयोगी की इच्छा रखते हैं जो उन्हें आगे बढ़ने में मदद करे.
इसका मतलब है कि AI का अगला बड़ा विस्तार केवल अंग्रेजी में नहीं होगा. भारतीय भाषाओं में AI की उपयोगिता बढ़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा.
क्या AI हिंदी को और आसान बना देगा?
Kantar के विशेषज्ञ अर्नब दत्ता ने 2024 में भारतीय भाषाओं और इंटरनेट की पहुंच पर बात करते हुए कहा था कि ग्रामीण भारत में अंग्रेजी की समझ कम होने के कारण भाषा इंटरनेट अपनाने में बाधा बन सकती है. उन्होंने भारतीय भाषाओं और voice-based commands को इस बाधा को कम करने का महत्वपूर्ण तरीका बताया था.
यह बात AI के दौर में और महत्वपूर्ण हो जाती है. क्योंकि AI में यूजर को हर बार अंग्रेजी में लिखने की जरूरत नहीं है. वह अपनी भाषा में बोलकर भी सवाल पूछ सकता है.
यानी भविष्य का इंटरनेट सिर्फ "type and search" नहीं, बल्कि "बोलो और जवाब पाओ" वाला भी हो सकता है.
क्या हिंदी इंटरनेट की सबसे बड़ी भाषा बन जाएगी?
यहां थोड़ा सावधान रहना जरूरी है. भारतीय भाषाओं के इंटरनेट की तेजी को सीधे यह कहना कि हिंदी अकेले इंटरनेट की सबसे बड़ी भाषा बन गई है, सही नहीं होगा.
भारत भाषाई रूप से बेहद विविध देश है. रिपोर्ट के मुताबिक तमिल, तेलुगु और मलयालम जैसी भाषाओं में भी डिजिटल इस्तेमाल मजबूत है. कई यूजर्स एक साथ हिंदी, अंग्रेजी और अपनी मातृभाषा का इस्तेमाल करते हैं.
इसलिए असली बदलाव Hindi vs English नहीं, बल्कि English-only से Multilingual Internet की तरफ बढ़ना है.
क्या हिंदी कंटेंट की मांग अभी पूरी नहीं हुई?
Google News Initiative ने भारतीय भाषाओं के न्यूज पब्लिशर्स को लेकर 2024 में कहा था कि भारतीय भाषा के न्यूज कंज्यूमर अभी भी underserved हैं यानी उनकी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त विकल्प उपलब्ध नहीं हैं. Google के Indian Languages Program में 300 से ज्यादा न्यूज पब्लिशर्स और 9 भारतीय भाषाएं शामिल हुई थीं.
यह न्यूज इंडस्ट्री के लिए बड़ा संकेत है. यानी हिंदी में सिर्फ कंटेंट बनाना पर्याप्त नहीं होगा. कंटेंट विश्वसनीय, उपयोगी, तेज और यूजर की जरूरत के मुताबिक होना चाहिए.
यहीं हिंदी डिजिटल मीडिया के लिए बड़ा अवसर है खासकर शिक्षा, सरकारी नौकरी, स्वास्थ्य, कानून, करियर, बिजनेस और लोकल न्यूज जैसे क्षेत्रों में.
तो हिंदी का अगला पड़ाव क्या है?
हिंदी की यात्रा अब सरकारी कामकाज की भाषा से आगे बढ़कर डिजिटल उपयोग की भाषा तक पहुंच चुकी है. स्मार्टफोन, सस्ता इंटरनेट, वीडियो और अब AI इस बदलाव को और तेज कर रहे हैं.
आने वाले वर्षों में AI के जरिए हिंदी में सर्च, वॉयस असिस्टेंट, शिक्षा, ऑनलाइन सेवाएं और डिजिटल कंटेंट तेजी से बढ़ सकते हैं. लेकिन इस बदलाव की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हिंदी इंटरनेट पर कितनी मात्रा में नहीं, बल्कि कितनी अच्छी और भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध होती है.
यानी हिंदी का भविष्य सिर्फ भाषा दिवस मनाने में नहीं, बल्कि उस भाषा में डिजिटल दुनिया को कितना सक्षम बनाने में है.
जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
अर्नब दत्ता, Kantar के मुताबिक भारतीय भाषाओं और वॉइस कमांड की मदद से ज्यादा लोग आसानी से इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं. खासकर वे लोग, जिन्हें अंग्रेजी में परेशानी होती है.
AI के दौर में यह बात और अहम हो जाती है. अगर लोग अपनी भाषा में AI से सवाल पूछ सकें और आसानी से जवाब पा सकें, तो AI ज्यादा लोगों की पहुंच में आएगा.