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3 साल का डिग्री कोर्स, 18 महीने का ग्रेजुएट वीजा: क्या ब्रिटेन जाकर पढ़ाई नहीं कर पाएंगे भारतीय छात्र?

Britain Graduate Visa Rules: क्या आप भी ब्रिटेन की पढ़ाई करने के लिए जा रहे हैं? तो पहले ग्रेजुएट वीजा से जुड़े नए नियम के बारे में जान लीजिए जिसमें 2 साल की अवधि को कम कर सिर्फ 18 महीने कर दिया गया है, आइए जानते हैं ये नियम कब से लागू होना है?

3 साल का डिग्री कोर्स, 18 महीने का ग्रेजुएट वीजा: क्या ब्रिटेन जाकर पढ़ाई नहीं कर पाएंगे भारतीय छात्र?

Britain Graduate Visa Rules: जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की तरह ब्रिटेन भी भारतीय छात्रों की पहली पसंद रहा है. हायर एजुकेशन के लिए हर साल हजारों भारतीय छात्र यूके का रुख करते हैं, लेकिन हाल ही में वीजा अपडेट ने उनके लिए चिंता बढ़ा दी हैं. ब्रिटेन सरकार द्वारा ग्रेजुएट वीजा की अवधि घटाने के घोषणा की गई है, जिसके बाद से भारतीय छात्रों में असमंजस की स्थिति है. सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि जिस 3 साल के डिग्री कोर्स को पूरा करने में लाखों रुपये खर्च होते हैं, पढ़ाई पूरी होने के बाद उसके लिए महज 18 महीने का वीजा कैसे जायज है? 

दरअसल, इससे पहले यूके में ग्रेजुएट वीजा के तहत छात्रों को 2 साल तक रुककर काम करने की अनुमति मिलती थी, जिसे अब घटाकर 18 महीने कर दिया गया है. हालांकि, PhD और अन्य डॉक्टोरल कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स के लिए वीजा की अवधि पहले की तरह 3 साल ही रहेगी.

आखिर क्या है यूके ग्रेजुएट वीजा? 

यूके ग्रेजुएट वीजा को पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा भी कहा जाता है, जोकि ब्रिटेन सरकार की एक खास योजना है. इसके तहत इंटरनेशनल छात्रों को अपनी डिग्री कोर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद बिना किसी स्पॉन्सरशिप के यूके में रहकर नौकरी की तलाश करने की अनुमति मिलती है और वो यहां काम काम कर सकते हैं, लेकिन अब उन भारतीय छात्रों के लिए वीजा की अवधि कम होना चिंता का कारण बन रहा है जो डिग्री पूरी होने के बाद यूके में ही नौकरी करना चाहते हैं.

भारतीय छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?

ब्रिटेन में पढ़ाई करने के लिए जाने वाले छात्र या जिन छात्रों की पढ़ाई आगामी साल में पूरी होने वाली है, उन्हें ग्रेजुएट वीजा की अवधि कम होने से फर्क पड़ सकता है. नए नियमों के तहत 1 जनवरी 2027 या उसके बाद आवेदन करने वाले छात्रों को 24 महीने यानी 2 साल के बजाय सिर्फ 18 महीने का वीजा मिलेगा. ऐसे में छात्रों के पास पढ़ाई खत्म करने के बाद यूके में सेटल होने या जॉब ढूंढने के लिए सिर्फ डेढ़ साल का समय होगा और उन्हें ग्रेजुएशन के आखिरी साल से ही नौकरी ढूंढनी शुरू करनी होगी. 

दरअसल, भारतीय छात्रों के लिए यूके में पढ़ाई और रहने का खर्च काफी ज्यादा होता है. कम समय मिलने के कारण छात्रों के लिए अपनी पढ़ाई की लागत निकालना और वर्क वीजा में स्विच करने का मौका पाना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

नए नियमों से क्या बदलेगा और कैसे मिलेगी राहत? 

यूके सरकार के नए नियमों के लागू होने से उन विदेशी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी जो स्पॉन्सरशिप सिस्टम के तहत शोषण या आधुनिक गुलामी का शिकार हुए हैं. वर्कर्स को मजबूरन किसी एक ही शोषक स्पॉन्सर या कंपनी से बंधे रहना नहीं पड़ेगा. पीड़ित कर्मचारी अपने मौजूदा वीजा की बची हुई अवधि के दौरान किसी भी दूसरी कंपनी में कानूनी तौर पर नौकरी करने के लिए आजाद होंगे.

ये नया सुरक्षा नियम स्किल्ड वर्कर रूट के तहत आने वाले सभी कर्मचारियों पर लागू होगा, जिसमें केयर वर्कर और विदेश से भर्ती किए गए अन्य प्रोफेशनल शामिल हैं. ब्रिटेन सरकार के अनुसार, इस कदम से विदेशी कर्मचारियों को नौकरी और स्टेटस खोने या कंगाली के डर के बिना शोषण के खिलाफ आवाज उठाने और बाहर निकलने का सुरक्षित मौका मिलेगा.

यूके के पुराने स्पॉन्सरशिप नियमों में क्या-क्या खामियां थी? 

नए नियम के लागू होने से उन कर्मचारियों को फायदा हो सकता है जो कंपनी द्वारा शोषण के शिकार होते थे. दरअसल, पुराने नियमों के तहत विदेशी कर्मचारियों को अपने स्पॉन्सर से ही बंधे रहना पड़ता था. अगर कोई एम्प्लॉयर उनका मानसिक या आर्थिक शोषण भी करता, तो उनके पास नौकरी छोड़ने का ऑप्शन नहीं होता था. वो इस बात से परेशान रहते थे कि अगर आवाज उठाएंगे तो उनका वीजा स्टेटस तुरंत रद्द हो सकता है और उनके लिए आय का जरिया खत्म हो सकता है, जिस वजह से कर्मचारी शोषक कंपनी को छोड़ नहीं पाते थे.

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About the Author

Simran Singh

Simran Singh

सिमरन सिंह को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है. उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई हिमालयन यूनिवर्सिटी से की है. साल 2016 में उन्होंने मीडिया जगत में कदम रखा. इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक से लेकर डिजिटल मीडिया से जुड़ी रहीं. पिछले 3 साल से News24 में थी और वहां बतौर फीचर लीड कई सेक्शन को संभाला. फिलहाल, Zee News में शिक्षा, रोजगार और करियर सेक्शन संभाल रही हैं.
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