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Pilot Career: वो कौन सा एग्जाम था जिसे पास कर स्मित मच्छार बनें पायलट?

How to Become a Pilot: क्या आप भी कैप्टन स्मित मच्छार की तरह पायलट बनना चाहते हैं? तो आइए जानते हैं उन्होंने पायलट बनने के लिए क्या किया था? वो कौन सा कोर्स है जिसे करने के बाद विमान में कैप्टन बन सकते हैं? आइए पायलट बनने के लिए आयु सीमा से लेकर अन्य सभी डिटेल्स जानते हैं.

Written By Simran Singh
Published: Oct 02, 2026, 10:04 AM IST | Updated: Oct 02, 2026, 12:06 PM IST
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How to Become a Pilot: दुनिया भर में एक हीरो पायलट के तौर पर स्मित मच्छार को जाना जा रहा है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना विमान में सवार करीब 174 यात्रियों की जिंदगी बचाई. इसके साथ ही उन्होंने ये साबित कर दिया कि कैसे एक फ्लाइट कैप्टन की जिम्मेदारी अपने यात्रियों क लेकर होती है. आज उनकी हिम्मत की दादा चारों ओर की जा रही है. फ्लाईदुबई के बोइंग 737 बेड़े में डायरेक्ट-एंट्री कैप्टन के तौर पर काम कर रहे स्मित मच्छार के पास 13 सालों से ज्यादा कमर्शियल फ्लाइट का अनुभव है. उनकी तरह अगर आप भी फ्लाइट के कैप्टन बनना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं कि कैसे कोई पायलट बन सकता है? 

क्या पायलट का कार्स 10वीं या 12वीं की पढ़ाई के बाद किया जा सकता है? क्या पायलट बनने के लिए किसी मुख्य सब्जेक्ट से 12वीं पास करनी होती है? पायलट का कोर्स कितनी अवधि का होता है? पायलट कोर्स पूरा करने के बाद क्या ट्रेनिंग भी करनी पड़ती है? क्या भारत में रहकर पायलट कोर्स करने पर विदेश की फ्लाइट में कैप्टन की नौकरी मिल सकती है? एक पायलट की सैलरी कितनी होती है? आइए इन सभी के बारे में विस्तार से जानते हैं.  

स्मित मच्छार ने पायलट बनने के लिए कौन सा कोर्स किया था?

स्मित मच्छार ने पायलट बनने के लिए कमर्शियल पायलट लाइसेंस कोर्स किया था. इसके बाद उन्होंने  बड़े विमान बोइंग 737 को उड़ाने के लिए एडवांस्ड स्पेशलाइजेशन कोर्स भी किया था. उनके पायलट करियर की शुरुआत के लिए CPL ट्रेनिंग और एयरक्राफ्ट टाइप रेटिंग भी शामिल रही. हालांकि, पायलट बनने से पहले उन्होंने टेक्सटाइटल में इंजीनियरिंग और बिजनेस मैनेजमेंट की डिग्री भी हासिल कर रखी है.

वो कौन सा एग्जाम था जिसे पास कर स्मित मच्छार बने पायलट? 

कैप्टन स्मित मच्छार मूल रूप से भारतीय नागरिक हैं. उन्होंने पायलट बनने के लिए कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) का कोर्स किया था, जिसके लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा आयोजित 5 मुख्य लिखित परीक्षाओं को पास करना अनिवार्य होता है. CPL के लिए DGCA की इन थ्योरी परीक्षाओं में एयर नेविगेशन, एयर मेटियोरोलॉजी, एयर रेगुलेशन्स, एविएशन टेक्निकल जनरल और एविएशन टेक्निकल स्पेसिफिक शामिल हैं. 

इसके साथ ही पायलटों के लिए रेडियो टेलीफोनी लाइसेंस हासिल करना भी जरूरी होता है, जिसकी परीक्षा का आयोजन 'वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन' (WPC) विंग द्वारा किया जाता है. इसके अलावा उन्होंने 200 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी की और बोइंग 737 जैसे बड़े कमर्शियल जेट उड़ाने के लिए टाइप रेटिंग परीक्षा और सिम्युलेटर ट्रेनिंग को सफलता से पूरा किया.

कितने खर्च के साथ स्मित मच्छार ने पायलट ट्रेनिंग का कोर्स पूरा किया था?

कैप्टन स्मित मच्छार ने एक पॉडकास्ट में पायलट ट्रेनिंग कोर्स को लेकर हुए खर्च के बारे में जानकारी दी थी. उन्होंने खुद खुलासा किया था कि 19 साल की उम्र में अपनी पायलट की ट्रेनिंग न्यूजीलैंड से की थी, उस दौरान पायलट ट्रेनिंग कोर्स में उनके 16 से 17 लाख रुपये तक के बीच खर्च हुए थे. न्यूजीलैंड से कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग के दौरान करीब 17 लाख रुपये का खर्चा आया था.

भारत से कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग करने में कितना खर्च आता है? 

वर्तमान में अगर कोई युवा भारत से कमर्शियल पायलट (CPL) बनने की ट्रेनिंग लेना चाहता है, तो कुल खर्च काफी बढ़ चुका है. इसमें 200 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग और डीजीसीए थ्योरी परीक्षाओं के लिए करीब 50 लाख से 65 लाख रुपये का खर्च आता है. इसके बाद बोइंग या एयरबस जैसे बड़े कमर्शियल जेट उड़ाने के लिए 'टाइप रेटिंग' पर 15 लाख से 20 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च होते हैं. कुल मिलाकर पूरे कोर्स में लगभग 70 लाख से 85 लाख रुपये तक का खर्च बैठता है. वहीं, कैप्टन स्मित माछर ने साल 2010 में जब अपनी पायलट ट्रेनिंग शुरू की थी, तब उस दौर के हिसाब से उनका कुल शुरुआती खर्च 16 लाख से 17 लाख के आसपास ही रहा था.

क्या 10वीं के बाद पायलट बन सकते हैं?

नहीं, सिर्फ कक्षा 10वीं की परीक्षा पास कर लेने के बाद अगर आप पायलट बनने का सोच रहे हैं तो ये संभव नहीं है, लेकिन आप एविएशन में करियर बनाने के लिए नींव इस क्लास के बाद रख सकते हैं जिसके लिए 11वीं में वो स्ट्रीम चुननी होगी जिससे आगे चलकर पायलट के कोर्स के लिए आप एलिजिबल हो. 10वीं के बाद सही सब्जेक्ट और 16 साल की उम्र में स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (SPL) से इस पायलट बनने के इस सफर की नींव रखी जा सकती है.

10वीं के बाद कौन से सब्जेक्ट से पढ़ाई करें कि पायलट में करियर बना पाएं?

अगर पायलट में करियर बनाना है तो कक्षा 10वीं में अच्छे अंकों के साथ पास होना होगा जिसके बाद 11वीं कक्षा में साइंस स्ट्रीम ले पाएंगे. फिजिक्स, मैथ्स और केमिस्ट्री (PCM) सब्जेक्ट से पढ़ाई करने वाले और 12वीं में साइंस स्ट्रीम से फिजिक्स और मैथ्स, दोनों सब्जेक्ट में 50 प्रतिशत तक अंक लाने वाले कमर्शियल पायलट लाइसेंस ट्रेनिंग के लिए योग्य कहलाते हैं. 

हालांकि, 12वीं में कॉमर्स या आर्ट्स स्ट्रीम से जुड़े छात्र भी पायलट के लिए एलिजिबल हो सकते हैं, लेकिन नियम के अनुसार उन्हें पहले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) से फिजिक्स और मैथ्स का अलग से पेपर देना होगा. इसके बाद ही वो भी DGCA की CPL परीक्षा और पायलट ट्रेनिंग के लिए एलिजिबल हो सकेंगे.

Eligibility Criteria: पायलट कौन बन सकता है?

शैक्षणिक योग्यता

12वीं (साइंस स्ट्रीम): फिजिक्स और मैथ्स में 50% अंक जरूरी 

आर्ट्स या कॉमर्स छात्र: NIOS से फिजिक्स और मैथ्स विषय पास करके भी पात्र बन सकते हैं.

आयु सीमा

उम्र सीमा: ट्रेनिंग के लिए न्यूनतम 16 साल और CPL लाइसेंस के लिए 18 साल है.

अधिकतम सीमा: कोई तय सीमा नहीं है लेकिन एयरलाइंस में 30 से 35 वर्ष वालों प्राथमिकता दी जाती है.

मेडिकल फिटनेस

दो फिटनेस टेस्ट: Class 2 और Class 1 मेडिकल फिटनेस टेस्ट में पास होना जरूरी है. 

आंखों का टेस्ट: चश्मे के साथ या बिना की दृष्टि 6/6 होनी चाहिए और कलर ब्लाइंडनेस नहीं होनी चाहिए.

भाषा और कम्युनिकेशन स्किल्स

अंग्रेजी बोलना, पढ़ना और समझना अच्छी तरह आना चाहिए.

क्यों जरूरी है: अंतर्राष्ट्रीय एविएशन और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी ही है.

पायलट कोर्स कितने साल में पूरा होता है?

भारत में कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) कोर्स पूरा करने में करीब 1.5 से 2 साल यानी 18 से 24 महीने तक का समय लगता है. हालांकि, कुछ इंटरनेशनल या फास्ट-ट्रैक प्रोग्राम इसे 10 से 12 महीने में पूरा कराने का दावा भी करते हैं. अगर इस पूरी अवधि का गणित समझें, तो शुरुआत में 3 से 4 महीने DGCA की लिखित परीक्षाओं की तैयारी में लगते हैं. इसके बाद 200 घंटे की अनिवार्य उड़ान के लिए करीब 8 से 14 महीने की फ्लाइंग ट्रेनिंग होती है. ट्रेनिंग की ये अवधि काफी हद तक मौसम की स्थिति, एयरक्राफ्ट की उपलब्धता और छात्र की अपनी गति पर निर्भर करती है.

पायलट को कितनी सैलरी मिलती है?

पद औसतन सैलरी (प्रति माह)
जूनियर फर्स्ट ऑफिसर (ट्रेनिंग फेज)80,000 से 1.5 लाख रुपये तक
फर्स्ट ऑफिसर (कॉ-पायलट)1.5 लाख से 3.5 लाख रुपये तक
ATPL के बाद सीनियर फर्स्ट ऑफिसर3 लाख से 4.5 लाख रुपये तक
कैप्टन5 लाख से 10 लाख रुपये तक
इंटरनेशनल या सीनियर कैप्टन8 लाख से 15 लाख रुपये तक

भारत से पायलट कोर्स करने के बाद क्या विदेश में नौकरी मिल सकती है?

भारत से DGCA CPL हासिल करने के बाद विदेश की एयरलाइंस में नौकरी पा सकते हैं, लेकिन इसके लिए नियमानुसार संबंधित देश की एविएशन अथॉरिटी जैसे अमेरिका की FAA, इजरायली की IAA या CAAI, यूएई की GCAA, यूरोप की EASA से अपना लाइसेंस कन्वर्ट कराना होता है. इसके लिए उम्मीदवारों को संबंधित देश के एविएशन लॉ का पेपर और सिम्युलेटर टेस्ट को पास करना होता है. इसके बाद कतर एयरवेज, फ्लाइदुबई और एमिरेट्स जैसी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में अनुभवी भारतीय पायलटों को नौकरी मिल सकती है.

ये भी पढ़ें- टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई से 'हीरो पायलट' बनने तक: 174 यात्रियों की जान बचाने वाले स्मित मच्छार की एजुकेशन स्टोरी

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About the Author

सिमरन सिंह को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है. उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई हिमालयन यूनिवर्सिटी से की है. साल 2016 में उन्होंने मीडिया जगत में कदम रखा. इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक से लेकर डिजिटल मीडिया से जुड़ी रहीं. पिछले 3 साल से News24 में थी और वहां बतौर फीचर लीड कई सेक्शन को संभाला. फिलहाल, Zee News में शिक्षा, रोजगार और करियर सेक्शन संभाल रही हैं.
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