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Outcome of Modi-Putin BRICS Meeting: शुक्रवार को 11 सितंबर था. इसी दिन 133 वर्ष पहले शिकागो में स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म संसद में अपना ऐतिहासिक भाषण दिया था. स्वामी विवेकानंद का मानना था कि भारत की अमर आत्मा केवल अपने लिए नहीं जीती. इसने हमेशा संपूर्ण मानवता के कल्याण की कामना की है. आने वाले युग में भारत विश्व के क्षितिज पर एक मार्गदर्शक ज्योति बनकर उभरेगा.
ये एक सुखद संयोग है कि अमेरिका के शिकागो में स्वामी विवेकानंद के विश्व संवाद की 133वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिल्ली में ब्रिक्स समिट की शुरुआत हुई.
दुनिया के ताकतवर नेता नई दिल्ली में हैं. दो युद्धों के ताप से वैश्विक शांति को खतरा है. तेल सप्लाई में बाधा से आधी दुनिया ऊर्जा संकट झेल रही है. महंगाई जैसे सुलगते सवाल हैं. इसलिए दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स की बैठक पर पूरी दुनिया की उम्मीद भरी नजर है. इस उम्मीद के केंद्र में भारत है. आज दुनिया भारत के आर्थिक, सामरिक और रणनीतिक शक्ति से परिचित हो रही है.
ब्रिक्स समिट की अहमियत को समझने के लिए सबसे पहले हमें शुक्रवार को हुई दो मुलाकातों और शनिवार को होने वाली एक मुलाकात को बहुत बारीकी से समझना होगा. इन्हीं तीन द्विपक्षीय बैठकों पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की भी नजर है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई. ये दो नेताओं की सामान्य मुलाकात नहीं थी. दो पक्के मित्र राष्ट्रों की बैठक थी. इस बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई. किन मुद्दों पर सहमति बनी, इसका भविष्य पर क्या असर होगा. हम विस्तार से इसका विश्लेषण करेंगे.
दूसरी बड़ी बैठक पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच हुई. युद्ध के बीच पेजेशकियान का ब्रिक्स समिट में शामिल होने भारत आना बहुत महत्वपूर्ण है. ईरान कह चुका है कि मिडिल ईस्ट में शांति में भारत की अहम भूमिका होगी. आज पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति के बीच हुए संवाद में किन-किन मुद्दों पर चर्चा हुई हम इसे भी डिकोड करेंगे.
शनिवार को पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी. द्विपक्षीय संबंधों से लेकर, दुनिया के सप्लाई चेन और ईरान युद्ध तक चीन बड़ा स्टेक होल्डर है. इसलिए इस द्विपक्षीय बैठक में दुनिया को दिशा देने वाले किन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है. हम इसकी जानकारी भी आपको देंगे.
स्वामी विवेकानंद का विचार था कि मित्रता का अर्थ सिर्फ दुख या सुख साझा करना नहीं है. सच्चा मित्र वह है जो आपके संकट के समय आपका हाथ पकड़े, जब पूरी दुनिया आपके खिलाफ हो जाए तब भी आपके साथ चट्टान बनकर खड़ा रहे.
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भारत और रूस की मित्रता को स्वामी विवेकानंद के इन्हीं शब्दों से परिभाषित किया जा सकता है. मित्रता की पुस्तक में नया अध्याय जोड़ने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने भारत आए हैं. उनकी पीएम मोदी के साथ विपक्षीय वार्ता हुई.
द्विपक्षीय वार्ता के लिए राष्ट्रपति पुतिन जब भारत मंडपम पहुंचे तो यहां पीएम मोदी और उनकी विशेष बॉन्डिंग दिखी. रूसी राष्ट्रपति ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया तो पीएम मोदी ने पुतिन को गले लगा लिया. दो वैश्विक नेताओं का गले मिलना बताता है कि दोनों देशों के बीच संबंध कितने घनिष्ठ और मजबूत हैं.
भारत मंडपम में पीएम मोदी ने पुतिन को तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल की रूसी भाषा में अनुवादित प्रति भेंट की. अब समझते हैं, पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तिरुक्कुरल की प्रति क्यों भेंट की. इस उपहार का क्या खास संदेश है. ये तमिल भाषा का लगभग 2,000 वर्ष पुराना नैतिक-दार्शनिक ग्रंथ है. करीब 1330 दोहे वाले ग्रंथ की रचना संत कवि तिरुवल्लुवर ने की है.
मोटे तौर पर ग्रंथ में शामिल दोहे तीन बड़े विषयों पर आधारित है. पहला है अरम..यानी सदाचार, धर्म, नैतिकता. दूसरा है पोरुल यानी शासन, अर्थव्यवस्था, नेतृत्व और तीसरा है इनबम अर्थात प्रेम और मानवीय संबंध.
ये सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं है. इसमें शासन, न्याय, युद्ध और शक्ति का संदेश भी है. यही पुस्तक पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को भेंट की है. ये सिर्फ उपहार के तौर पर एक किताब देना नहीं है. इसका बहुत सुंदर और महत्वपूर्ण कूटनीतिक अर्थ भी है. इस भेंट के जरिए पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को संदेश दिया कि भारत के पास हजारों वर्षों की नैतिक और दार्शनिक परंपरा है. भारत अपने इस सांस्कृतिक कोष को दुनिया के साथ साझा कर रहा है.
इस किताब की प्रति भेंट कर पीएम मोदी ने जताया कि भारत का हजारों वर्ष पुराना सिद्धांत यही है कि सत्ता के साथ न्याय, शक्ति के साथ संयम और राष्ट्रहित के साथ मानवता को महत्व दिया जाना चाहिए. ध्यान रखिए राष्ट्रहित के साथ मानवता का महत्व इस ग्रंथ का मूल विचार है अहिंसा, न्याय, सत्य और संतुलित जीवन है. यानी पीएम मोदी ने एक उपहार के जरिए राष्ट्रपति पुतिन को फिर शांति का संदेश दिया.
डिप्लोमेसी में हर शब्द, हर एक्शन का विशेष अर्थ होता है. यहां एक पुस्तक के जरिए पीएम मोदी द्विपक्षीय बैठक से पहले ही ब्रिक्स के वैश्विक मंच से राष्ट्रपति पुतिन को शांति का संदेश दिया. बताया कि राष्ट्रहित के साथ मानवता का हित भी मत्वपूर्ण है. शांति का ये संदेश सिर्फ भारत के लिए नहीं युद्ध की आग से झुलस रही दुनिया के लिए भी अति महत्वपूर्ण है. क्योंकि वॉर के विध्वंसक प्रहार से सप्लाई चेन लड़खड़ा गई है और तेल का संकट खड़ा हो गया, दुनिया दो कूटनीतिक ब्लॉक में बंट गई है.
स्वामी विवेकानंद का विचार था कि संसार के सभी राष्ट्र एक ही विराट शरीर के अंग हैं. यदि एक अंग दुर्बल या संकट में है, तो पूरा विश्व स्वस्थ नहीं हो सकता. संपूर्ण मानवता का उत्थान ही सबका साझा लक्ष्य होना चाहिए.
मानवता के उत्थान और वैश्विक शांति के साझा लक्ष्य के साथ पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच करीब 45 मिनट तक बातचीत हुई. दोनों नेताओं ने सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दों पर ही चर्चा नहीं की. बैठक दो वर्ल्ड लीडर्स की थी. इसलिए चर्चा उन मुद्दों पर भी हुई जो वैश्विक विमर्श के केंद्र में हैं.
सबसे पहले समझते हैं कि 45 मिनट तक पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच किन किन मुद्दों पर चर्चा हुई. दोनों नेताओं के बीच रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, स्किल मोबिलिटी में सहयोग बढ़ाने पर बात हुई. ये द्विपक्षीय सहयोग का मुद्दा है.
इसका अर्थ ये है कि भारत और रूस अब अपने संबंधों को रक्षा सहयोग से आगे बढ़ाते हुए दूसरे क्षेत्रों में साझेदारी तक विस्तार करेंगे. रूस भारत को तेल सप्लाई के जरिए ऊर्जा सुरक्षा की गांरटी दे रहा है. वहीं भारत रूसी तेल का बड़ा खरीददार बनकर रूस को आर्थिक मजबूती दे रहा है. दोनों देश अतंरिक्ष क्षेत्र में सहयोग से नई तकनीक के विकास में काम करेंगे. स्किल मोबिलिटी के जरिए भारतीय प्रोफेशनल्स को रूस में रोजगार का अवसर मिलेगा.
दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी और बदलते जिओ पॉलिटिकल हालात में द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई. ये डिप्लोमेसी में द्विपक्षीय सहयोग का मुद्दा है.
मौजूदा वैश्विक संदर्भ में ये महत्वपूर्ण चर्चा है. रूस अमेरिका और पश्चिम देशों के बैन से जूझ रहा है. रूस से व्यापार करने पर ट्रंप ने टैरिफ की धमकी दी है. ऐसे में भारत और रूस की रणनीतिक सहयोग मजबूत करने का फैसला बताता है कि भारत अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से तय करेगा. भारत रूस के साथ रक्षा, तेल और परमाणु सहयोग जारी रखेगा, वहीं रूस चीन के लिए भारतीय हितों की अनदेखी नहीं करेगा.
इनरोप्रोम इंडिया के जरिए औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर पर बात हुई. इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी. ये भी द्विपक्षीय सहयोग का मुद्दा है.
इसके जरिए भारत और रूस रक्षा और तेल से आगे बढ़कर अपने व्यापारिक रिश्ते को फैक्ट्री लेवल पर ले जाएंगे. अभी भारत और रूस के बीच सालाना 5 लाख 74 हजार करोड़ रुपए का व्यापार होता है. इसे 2030 तक 9 लाख 56 हजार करोड़ रुपए तक करने का लक्ष्य है
इसके लिए रूस भारत को अपने बाजार में और ज्यादा पहुंच देगा. भारतीय फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट और खाद्य उत्पाद को रूस में बड़ा बाजार मिलेगा. भारत अपनी जरूरत के मुताबिक रूस से तेल और रक्षा उत्पाद खरीदेगा.
सबसे महत्वपूर्ण चर्चा पश्चिम एशिया और ब्लैक सी में जारी संघर्ष को लेकर हुई. पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच इस संघर्ष से प्रभावित समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बात हुई. ईरान अमेरिकी वॉर की वजह से होर्मुज और रूस-यूक्रेन जंग की वजह से ब्लैक सी के रास्ते सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. लड़ाई में तेल टैंकर्स को निशाना बनाया जा रहा है. ये वैश्विक मुद्दा है.
इसके जरिए भारत ने साफ किया है कि समुद्री व्यापार के लिए सुरक्षा जरूरी है. इससे सप्लाई चेन सुरक्षित होगा और तेल के दाम कंट्रोल होंगे. फर्टिलाइजर और दूसरी वस्तुओं की सप्लाई सुनिश्चित होगी.
पीएम मोदी ने बातचीत में दोहराया की संघर्षों के समाधान का रास्ता संवाद और कूटनीति से निकलना चाहिए. यानी पीएम मोदी ने संदेश दिया कि भारत अंतहीन युद्ध नहीं चाहता. भारत सैन्य कार्रवाई का बिना शर्त समर्थन नहीं करता है. रूस को यूक्रेन के साथ अपने विवाद का हस कूटनीति और संवाद के जरिए निकालना चाहिए. ग्लोबल साउथ और दुनिया के हित में युद्ध खत्म होना चाहिए.
ये संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि द्विपक्षीय बातचीत में राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को यूक्रेन युद्ध पर जानकारी शेयर की. पुतिन अमेरिकी वार्ताकारों विटकॉफ और कुशनर के साथ अपनी बातचीत और ट्रंप के साथ हुई फोन कॉल के बारे में पीएम मोदी को जानकारी दी.
बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि भारत शांति प्रयासों में सहयोग के लिए तैयार है. ये बड़ी और महत्वपूर्ण बात है. पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को बताया कि वैश्विक शांति के लिए भारत युद्ध खत्म कराने में भूमिका निभा सकता है.
अगर संबंधित पक्ष चाहें तो भारत युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की पहल करा सकता है, शांतिवार्ता के लिए ढांचा बना सकता है. बैक- चैनल बातचीत करा सकता है. अर्थात भारत वैश्विक शांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
द्विपक्षीय बैठक के बाद पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक ही कार में इनरोप्रोम इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन में पहुंचे. ये चौथी बार था जब राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी एक साथ कार में किसी कार्यक्रम में पहुंचे.
1 सितंबर 2025 को चीन में SCO समिट के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने करीब 10 मिनट तक पीएम मोदी का इंतजार किया था. उसके बाद दोनों नेता पुतिन की कार में बैठकर कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे. इस बीच दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक बातचीत भी हुई थी. यहीं से पीएम मोदी और पुतिन की कार डिप्लोमेसी की शुरुआत हुई थी.
4 दिसंबर 2025 को जब राष्ट्रपति पुतिन भारत दौरे पर आए थे तो पीएम मोदी उन्हें रिसीव करने दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे थे. एयरपोर्ट से पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक ही कार में पीएम आवास 7 लोककल्याण मार्ग पहुंचे थे. बाद में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा था कि पीएम मोदी के साथ कार में साथ जाना दोस्ती का प्रतीक है.
इसी साल 31 अगस्त को पीएम मोदी जब बिश्केक में SCO समिट में गए थे तो वहां पीएम मोदी, पुतिन की कार में बैठकर ओपनिंग सेरेमनी में पहुंचे थे. 11 सितंबर को फिर द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों नेता इनरोप्रोम इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन तक गए. ये दो नेताओं की मजबूत बॉन्डिंग के साथ, भारत और रूस के मजबूत रिश्तों और गहरी दोस्ती का भी प्रमाण है.
इनरोप्रोम इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन में दोनों नेताओं ने रूस की इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग की झलक देखी. खासतौर पर दोनों नेता बुलेट ट्रेन से जुड़े प्रोजेक्ट को देखने पहुंचे. इनरोप्रोम इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन भारत और रूस के बीच मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, निवेश को जोड़ने का सीधा प्लेटफॉर्म है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है.
इनरोप्रोम इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन में भविष्य के सहयोग की झलक देखने के बाद पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पहुंचे. BRICS बिजनेस फोरम में पार्टनर देशों के 2,000 से ज्यादा कारोबारी शामिल हुए. पीएम मोदी ने कहा कि भारत इनोवेशन और स्टार्टअप का हब है. भारत के UPI जैसे इनोवेशन को दुनिया अपना रही है.
ब्रिक्स की औपचारिक बैठक शनिवार से शुरू होगी. औपचारिक बैठक से पहले पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात की तस्वीरें बता रही हैं भारत और रूस की मित्रता रक्षा और तेल से आगे बढ़ चुकी है. मित्रता के इस विस्तार ने वैश्विक मंच पर ब्रिक्स को मजबूत कूटनीति संगठन बनाया है. साथ ही वर्ल्ड ऑर्डर में भारत की मजबूत भूमिका को भी रेखांकित किया है.