पास रहकर भी प्रेमानंद महाराज से नहीं सीख पाए सद्गुण, सच दिखाने पर शिष्यों ने जी न्यूज की टीम से क्यों की धक्का-मुक्की?
Premanand Maharaj News: प्रेमानंद महाराज के पास रहकर भी उनके शिष्य लगता है कि सद्गुण नहीं सीख पाए. जब जी न्यूज ने सच दिखाया तो शिष्यों ने तर्कों के आधार पर अपनी बात रखने के बजाय टीम से धक्का-मुक्की करनी क्यों शुरू कर दी.
Premanand Maharaj Controversy Update: चुनाव आयोग को लेकर देश की राजनीति में उबाल है. इस दौरान मर्यादाएं भी टूट रही हैं. लेकिन आज मर्यादा दिल्ली से क़रीब 160 किलोमीटर दूर वृंदावन में भी टूटी. वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के मुख्य आश्रम के बाहर ज़ी न्यूज़ की टीम पर हमला किया गया.
प्रेमानंद महाराज एक सम्माननीय संत हैं. हम उनका बहुत सम्मान करते हैं. लाखों लोग महाराज जी से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर भी उनको Follow करते हैं. उनका संदेश सुनते हैं. मार्गदर्शन लेते हैं. उनसे सीखते हैं. लेकिन उनके कुछ शिष्य उनके पास होकर भी उनसे कुछ सीख नहीं पा रहे. इसीलिए वो, मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं देते, सीधे हिंसा करते हैं.
सच दिखाने पर जी न्यूज टीम के साथ धक्का-मुक्की
गुरुवार को जी न्यूज की टीम के साथ यही हुआ. जी न्यूज की टीम वृंदावन में श्री हित राधा केलि कुंज आश्रम पहुंची. प्रेमानंद महाराज जी के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत का 13वां दिन था. मौत के रहस्य से अब तक पर्दा उठा नहीं है. हम आश्रम की तरफ़ से आधिकारिक बयान जानना चाहते थे. ज़ी न्यूज़ संवाददाता परिवेश वात्स्यायन को पहले बताया गया कि अभी कीर्तन का समय है, आप 10 बजे आइए.
जब जी न्यूज़ की टीम वहां इंतज़ार कर रही थी तो नज़र एक परिवार पर पड़ी जिसका बच्चा लापता है. वहां पुलिस भी मौजूद थी. हमारी टीम जब उस परिवार से बात कर थी, तभी भक्तों के वेश में खड़े कुछ लोगों ने कुतर्क करना शुरू कर दिया. वो इस बात से नाराज़ थे कि प्रेमानंद महाराज पर आरोप लगाने वाले फलाहारी बाबा की खबरें क्यों दिखाई जाती है. शाब्दिक हिंसा के बाद ये लोग हमले पर उतारू हो गए. पुलिस वहां मौजूद थी, लेकिन उन्हें इस बात का भी डर नहीं था. जी न्यूज की टीम पर हमला किया गया. कैमरा तोड़ने की कोशिश की गई. गाड़ी पर भी निशाना साधा गया.
आज जो शिष्य सबसे हिंसक व्यवहार कर रहा था, उससे जी न्यूज़ की टीम 2 दिन पहले भी मिली थी. जब हम बेलवन के पास प्रेमानंद जी के नए आश्रम जा रहे थे, तो उसने वहां हमें रोका था. बात करने के लिए तैयार नहीं था. आज वो आरोप लगा रहा था कि हमने उसकी बात नहीं दिखाई. वही इस हमले का सूत्रधार था.
कबीरदास जी ने लिखा है- संगत कीजै साधु की, कभी न निष्फल होय. लोहा पारस परसते, सो भी कंचन होय॥
इसका अर्थ ये है कि साधुओं की संगति पारस पत्थर की तरह है. उनके साथ रहकर लोहा भी सोने में बदल जाता है. यानी एक अज्ञानी या बुरा व्यक्ति भी संतों के प्रभाव में आकर महापुरुष या श्रेष्ठ इंसान बन जाता है.
पास रहकर भी प्रेमानंद से सद्गुण नहीं सीख पाए शिष्य
वैसे भी संतों के आस-पास ऐसे लोग उपयुक्त माने जाते हैं जो विनम्र, सेवा भाव वाले, जिज्ञासु और भक्ति-परायण हों. जो चापलूसी या स्वार्थ से दूर हों. हिंसा या लोभ-लालच रखने वाले लोगों की किसी संत के पास कोई आवश्यकता नहीं होती. ऐसे लोगों से संतों को स्वयं कोसों दूर रहना चाहिए. प्रेमानंद जी भी अक्सर अपने भक्तों को यही सीख देते रहते हैं.
सोचिए, प्रेमानंद जी इस तरह की सीख देते हैं. कहते हैं- किसी से वाद-विवाद न करो. वाद-विवाद से धर्म और ईष्ट देव की हानि होती है. लेकिन दुख इस बात का है कि कुछ लोग उनके आसपास रहकर भी ये समझ नहीं पाते. सीख नहीं पाते. स्वामी प्रेमानंद के आश्रम में रहने वाले कुछ लोगों ने इस ज्ञान को पूरी तरह भुला दिया है.
पिछले कुछ दिन से ऐसे आरोप लग रहे हैं कि प्रेमानंद जी को गुंडों ने घेर रखा है. उनके इर्द-गिर्द ऐसे लोग हैं, जिनका धर्म और अध्यात्म से कोई लेना-देना नहीं है. आज इन लोगों ने जी न्यूज की टीम के साथ जो बर्ताव किया, वो इसी धारणा को मज़बूत करता है.
सोचिए, साधक के रूप में मौजूद ये लोग इस बात से नाराज़ हैं कि हम दिनेश फलाहारी महाराज के आरोपों के बारे में क्यों दिखाते हैं. इनके मुताबिक़ अगर कोई आश्रम को लेकर कुछ आरोप लगाए तो उसको खबर के रूप में नहीं दिखाना चाहिए. ये अपने मुताबिक़ मीडिया को चलाना चाहते हैं.
निष्पक्षता से खबरें दर्शकों तक पहुंचा रहा जी न्यूज
सच्चाई ये है कि DNA में हमने बुधवार को ही दिनेश फलाहारी महाराज के आरोपों पर विराट कोहली की सफाई दिखाई थी. विराट कोहली ने 5 करोड़ रुपये लेकर स्वामी प्रेमानंद जी के आश्रम में जाने का खंडन किया था. हमने विराट कोहली की सफाई के बाद दिनेश फलाहारी महाराज से इस पर सवाल भी पूछे थे.
हमने ये भी कहा था कि दिनेश फलाहारी महाराज को आरोप लगाते समय सबूत भी देना चाहिए. क्या ये सब प्रेमानंद जी के शिष्यों को नज़र नहीं आया. प्रेमानंद जी, वृंदावन में आपके आश्रम और साधकों से जुड़ी जो खबरें आ रही हैं, वही हम दिखा रहे हैं. आप तक भी ये खबरें जरूर पहुंची होंगी.
अभी तक आश्रम के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाया है. आश्रम से कुछ बच्चों के ग़ायब होने के आरोप भी लगे हैं. जब लापता लोगों के पोस्टर लगते हैं, तो उन्हें फाड़ दिया जाता है. प्रेमानंद जी के करीबी गर्वीली शरण पर आरोप है कि वो यमुना के डूब क्षेत्र में कॉलोनी बसा रहे हैं. वहां की जमीन बेच रहे हैं. वो जमीन जिसकी बिक्री नहीं हो सकती. आश्रम के पड़ोस में रहने वाला अग्रवाल परिवार भी गर्वीली शरण पर सवाल उठा रहा है.
लेकिन प्रेमानंद महाराज पर किसी ने सवाल नहीं उठाया. ज़ी न्यूज़ ने कभी ये नहीं कहा कि प्रेमानंद जी पर प्रश्न चिह्न है. हमारा मानना है कि प्रेमानंद जी आरोपों से अलग हैं. हमने उनके खिलाफ कुछ भी न तो लिखा है, न कहा है. उनके ख़िलाफ हमारा कोई एजेंडा नहीं है. आश्रम को लेकर जो ख़बरें आ रही हैं, वही हम दिखा-बता रहे हैं. हम आपके इर्द-गिर्द रहने वाले उन लोगों पर सवाल उठा रहे हैं जिनकी भूमिका संदिग्ध है.
साधकों के भेष में असामाजिक तत्वों ने किया हमला
अगर इन आरोपों को आपके शिष्य ग़लत मानते हैं, तो उनको सफाई देनी चाहिए. ज़ी न्यूज़ वो सफाई भी दिखाएगा. इसी उद्देश्य से आज हमारे संवाददाता केलि कुंज आश्रम गए थे. लेकिन आरोपों पर अपना पक्ष रखने के बदले प्रेमानंद जी के शिष्य हिंसा पर उतारू हो गए. साधकों के भेष में मौजूद ये असामाजिक तत्व शायद सच्चाई सुनना पसंद नहीं करते हैं. इसलिए वो हिंसा के दम पर पत्रकारों का मुंह बंद करना चाहते हैं.
इन्हें लगता है कि इस तरह से धमकाकर हमें चुप करा देंगे. इनकी सोच ये है कि इस तरह का व्यवहार करने से ज़ी न्यूज़ सवाल पूछना बंद कर देगा. अगर इन लोगों ने इस मंशा से जी न्यूज की टीम पर हमला किया तो उन्हें पता होना चाहिए कि हम ऐसे हमलों की परवाह नहीं करते हैं. आगे भी इसी तरह सवाल पूछते रहेंगे और निर्भीक होकर सच दिखाते रहेंगे.
ज़ी न्यूज़ की टीम पर इस हमले के बाद ब्रज के लोग भी बेहद नाराज़ हैं. आज स्थानीय लोगों ने मथुरा SSP के दफ़्तर जाकर ज़ी न्यूज़ की टीम पर हमले की शिकायत दी. उन्होंने हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. अब देखना है कि मथुरा पुलिस इस मामले में क्या एक्शन लेती है.
आश्रम से जुड़े लोग सच्चाई छिपाने के लिए अब हमले पर उतारू हो गए हैं. लेकिन ज़ी न्यूज गर्वीली शरण पर लगे आरोपों का सच देश को दिखाता रहेगा. हम पिछले 2 दिन से DNA में दिखा रहे हैं कि किस तरह यमुना के डूब क्षेत्र की ज़मीन में कॉलोनी बसाई जा रही है. गैर-क़ानूनी तरीक़े से इस ज़मीन की ख़रीद-बिक्री हो रही है. इसके पीछे गर्वीली शरण का नाम लिया जा रहा है.
यमुना डूब क्षेत्र में कॉलोनी बसा रहा गर्वीली शरण
2 साल पहले मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की तरफ से गर्वीली शरण को कॉलोनी बसाने के ख़िलाफ़ नोटिस भी दिया गया था. लेकिन इसके बावजूद ये काम जारी है. आज हमने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के दफ़्तर जाकर उस नोटिस के बारे में भी पूछा. लेकिन हैरानी की बात ये है कि खुद प्राधिकरण को पता नहीं है कि नोटिस कब जारी किया गया था और इसमें क्या लिखा गया था. हमारे सवाल पूछने के बाद प्राधिकरण कह रहा है कि जांच करेंगे. मामले को देखेंगे.
एक बार फिर हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमने प्रेमानंद जी महाराज के ख़िलाफ़ कोई आरोप नहीं लगाया है. वृंदावन के स्थानीय लोग भी प्रेमानंद जी पर कोई आरोप नहीं लगा रहे. सवालों के घेरे में सिर्फ वो लोग हैं जिन्होंने धर्म और अध्यात्म के नाम पर संदिग्ध काम किए हैं. जिन्होंने प्रेमानंद महाराज को भी अंधेरे में रखा है. उन्हें धोखा दिया है और सिस्टम को भी धोखा दे रहे हैं.