जमुई के बाद समस्तीपुर में बेटी से दरिंदगी: रामराज के दावे वाले बिहार में सुरक्षित क्यों नहीं लड़कियां? अपराधियों के हौसले कैसे हुए बुलंद
Bihar Samastipur Girl Molestation News: बिहार में जमुई के बाद अब समस्तीपुर में भी बेटी से दरिंदगी का मामला सामने आया है. सवाल है कि रामराज के दावे वाले बिहार में आखिरकार लड़कियां सुरक्षित क्यों नहीं हैं.
Bihar Samastipur Girl Molestation Viral News: बिहार की सरकार बेटियों के सम्मान की रक्षा नहीं कर पाने और अपराधी हितैषी सोच के कारण सवालों में है. बिहार में बीच सड़क पर बेटियों की अस्मिता को कलंकित किया जा रहा है. उनकी सम्मान और मर्यादा को रौंदा जा रहा है और मुख्यमंत्री संवेदनहीनता की सीमा लांघ रहे हैं.
पिछले एक हफ्ते में दो तस्वीरें ऐसी आई हैं, जिनमें कुछ गुंडे बेटियों का वस्त्रहरण करने का प्रयास करते दिख रहे हैं और वहां के मंत्री कह रहे हैं कि ऐसी घटनाएं तो अमेरिका-जापान में भी होती हैं. जमुई के बाद अब समस्तीपुर में भी एक लड़की को लज्जित और प्रताड़ित किया गया है, लेकिन मुख्यमंत्री अपनी व्यवस्था और बेटियों की सुरक्षा पर आत्ममंथन करने के बजाय अपराधियों के इस दुस्साहस को रीलबाजी का शौक बताकर अपराध की तीव्रता को कम करने की कोशिश कर रहे हैं.
जमुई के बाद समस्तीपुर में लड़की के साथ अभद्रता
सीएम को चाहिए था कि वो बेटियों की सुरक्षा के लिए, उन्हें बचाने के लिए..पुलिस-प्रशासन का मार्गदर्शन करते. सख्त निर्देश देते. लेकिन बिहार के सीएम, अपराधियों को अपराध करने के बाद कानून से बचने के टिप्स दे रहे हैं.
आचार्य चाणक्य का मानना था कि "यदि कोई शासक अपनी प्रजा की स्त्रियों की रक्षा करने में अक्षम है तो उसका राजदंड व्यर्थ है और उसका विनाश निश्चित है." दुर्भाग्य से चाणक्य की धरती पर ही एक के बाद एक बेटियों के साथ दुराचार हो रहा है.
जमुई के बाद अब समस्तीपुर में कुछ अपराधियों ने एक लड़की के साथ अभद्रता की है. उसके सम्मान के साथ खिलवाड़ किया है. हमारी बाईं तरफ वो तस्वीर देख रहे हैं, जिसमें कुछ बदमाश मिलकर एक लड़की को परेशान कर रहे हैं. कोई उसका बाल पकड़कर खींच रहा है. कोई हाथ पकड़कर खींच रहा है. कोई धक्का मार रहा है. गाली दे रहा है और ऊपर से इस पशुता का वीडियो भी बना रहा है.
भीड़ के बीच दरिंदे करते रहे प्रताड़ित
लड़की अपना मान-सम्मान बचाने के लिए चीख रही है. हाथ जोड़ रही है, लेकिन दरिंदे उसे दिनदहाड़े बीच सड़क पर प्रताड़ित कर रहे हैं. राक्षसी प्रवृत्ति के ये अपराधी लड़की को प्रताड़ित करते हुए बेखौफ और बेफिक्र दिख रहे हैं. ना कोई डर है, ना कोई परवाह है. एक लड़की के साथ दरिंदगी हो रही है और आसपास सड़क पर राहगीर भी खड़े हैं. लड़की को कोई नहीं बचा रहा है. वीडियो वायरल होने के बाद अब पुलिस ने 4 लोगों को पकड़ा है.
58 सेकंड के वीडियो में बिहार की सुरक्षा व्यवस्था बिल्कुल बेलिबास होती दिख रही है. दिख रहा है कि कैसे अपराधी को कोई भय नहीं है. वो लड़की कह रही है कि वो अपने भाई को बुलाएगी, लेकिन उन दरिंदों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है.
एक लड़की के साथ ऐसी ही हैवानियत जमुई में भी हुई थी. वहां पर भी इसी तरह लड़की को खींचा गया था. उसकी इज्जत से खिलवाड़ किया गया था. ये वही बिहार है, जहां की सरकार ने बेटियों को साइकिल दी, ताकि वो स्कूल जाकर पढ़ सकें. पंचायतों और स्थानीय निकायों में पचास फीसदी आरक्षण है. पुलिस में 35 प्रतिशत बेटियों को भर्ती किया गया है. वहां पर ये स्थिति है कि आपराधिक प्रवृत्ति के लोग बिना किसी भय के लड़कियों से छेड़खानी कर रहे हैं और वीडियो बनाकर अपनी इस आपराधिक कुंठा को सोशल मीडिया पर प्रकट भी कर रहे हैं.
कार्रवाई के बजाय ये क्या कह रहे सम्राट चौधरी
दुस्सासनों के इस दुस्साहस पर बिहार के मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि हीरो बनने के लिए रील बनाओगे तो ऐसे ही पकड़े जाओगे. ये एक मुख्यमंत्री का बयान है. जो कह रहे हैं कि रील बनाओगे तो ऐसे ही पकड़े जाओगे. मतलब, सम्राट चौधरी कहना क्या चाहते हैं?
क्या वो अपनी पुलिस की तारीफ करना चाह रहे हैं? या अपराधियों को चेतावनी दे रहे हैं कि घटना की रील मत बनाओ? या फिर वो अपराध को रीलबाजी का शौक बताकर अपराध की तीव्रता को कम करना चाहते हैं. सम्राट चौधरी को शायद नहीं पता है कि अगर ये रील वायरल नहीं होती, तो उनकी पुलिस को पता भी नहीं चलता कि बिहार में कैसी-कैसी हैवानियत होती है.
जमुई वाली घटना को ही देख लीजिए. 19 सितंबर की शाम करीब 7 बजे जमुई-लखीसराय रोड पर मंडवा पहाड़ी के पास सुनसान इलाके में ये घिनौनी घटना हुई थी. 21 सितंबर को इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब जाकर सम्राट चौधरी जी की जमुई पुलिस ने संज्ञान लिया.
क्या जमुई मामले में हुआ फर्जी एनकाउंटर?
फिर 22 सितंबर को मुख्य आरोपी नंदन यादव और उसके एक अन्य साथी हरेराम यादव को पुलिस ने एक मुठभेड़ के बाद सुबह करीब 5 बजे गिरफ्तार किया था. बताइए, अगर रील नहीं बनती और वो वायरल नहीं होती, तो क्या बिहार पुलिस को घटना के बारे में पता चलता..क्या एक्शन होता?
वैसे तो घटना नहीं होनी चाहिए थी, न वीडियो बनना चाहिए था, न ही उस हैवानियत को पीड़ित का चेहरा दिखाते हुए तस्वीर वायरल होनी चाहिए थी. लेकिन अगर वीडियो वायरल नहीं होता, तो जमुई की पुलिस को क्या फर्क पड़ता? वो तो सो रही थी.
फिर जब उसने एनकाउंटर भी किया तो पता नहीं किसी धातु की बनी गोली आरोपी को पैर में मारी थी? हरेराम यादव नाम के जिस आरोपी के पैर टूटने का दावा किया गया था, जो 24 घंटे पहले चल नहीं पा रहा था, वो दौड़ने लगा. लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दावा कर रहे हैं कि अपराध करके रील बनाओगे तो उनकी पुलिस छोड़ेगी नहीं. तेजस्वी यादव पूछ रहे हैं कि मुख्यमंत्री अपराधियों को चेतावनी दे रहे हैं या फिर अपराध से बचने का आइडिया दे रहे हैं?
बिहार में लड़कियों के साथ लगातार बढ़ रहे अपराध
सम्राट चौधरी आज से सरकार में नहीं हैं. वो पहले डिप्टी सीएम थे, तब भी दावा करते थे कि बिहार में बेटियों के साथ कोई अपराध नहीं होता और अब वो मुख्यमंत्री हैं. लेकिन बिहार में बेटियों के साथ अपराध की दर क्या है, वो भी समझिए.
बिहार में 2025 में 2 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए थे. 2025 में रेप के जो 2 हजार से अधिक मामले आए थे, उनमें से 1,150 से अधिक मामले नाबालिग बच्चियों से संबंधित यानी पॉक्सो कानून के तहत दर्ज किए गए थे. 2026 में अब तक बेटियों के साथ अपराध की 160 से 170 घटनाएं दर्ज हुई हैं.
ये जो जमुई और समस्तीपुर में घटना हुई है. ये भी पॉक्सो के तहत ही दर्ज की गई हैं. सबसे बड़ी बात ये है कि ये वो मामले हैं, जिनका वीडियो वायरल हुआ, तब जाकर पुलिस ने संज्ञान लिया और पुलिस के दस्तावेज में केस दर्ज हुआ. ऐसे मामले में तो अमूमन कोई शिकायत ही नहीं करता है. केस दर्ज ही नहीं होता है. ऐसे में केस आंकड़ों में नहीं आता और मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि वीडियो बनाओगे तो ऐसे ही फंसोगे? इससे शर्मनाक और संवेदनहीन बयान और क्या हो सकता है? हो
अमेरिका-जापान में भी होती हैं ऐसी घटनाएं- अशोक चौधरी
अशोक चौधरी बिहार के मंत्री हैं. उनकी 28 साल की बेटी उस समस्तीपुर की सांसद हैं, जहां पर 18 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ हैवानियत हुई है. फिर भी वो कह रहे हैं कि ऐसी घटना तो अमेरिका-जापान में भी होती है.
होती होगी लेकिन बिहार कोई जापान या अमेरिका नहीं है. हम उस देश के लोग हैं जहां महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को राजधर्म सिखाते हुए कहते हैं कि स्त्रियों का सम्मान पुरुषों से कहीं अधिक ऊपर है. इसलिए अमेरिका या जापान से तुलना करने के बजाय बिहार में बेटियों की सुरक्षा सम्मान और अपराधियों को सजा देने की आवश्यकता है.
बिहार में जो बेटियों के साथ हैवानियत के मामले दर्ज होते हैं उनमें फास्ट ट्रैक कोर्ट में भी 100 में से 11 आरोपियों को ही सजा मिल पाती है. और बाकी अदालतों में तो 100 में से सिर्फ 2 आरोपियों को सजा मिलती है. फिर भी व्यवस्था और बेटियों की रक्षा पर आत्ममंथन करने की बजाय बिहार की सरकार में संवेदनहीन और शर्मनाक बयान देने की प्रतिस्पर्धा चल रही है. उन्हें लग रहा है कि ऐसे ही होता है.