जिनपिंग की US विजिट पर भारत की नजर क्यों? ट्रेड वॉर थमा तो देश के आईटी और सर्विस सेक्टर को क्या पड़ जाएगा असर
Xi Jinping's US Visit: जिनपिंग की US विजिट पर भारत की भी नजरें लगी हुई हैं. इसकी वजह क्या है. अगर दोनों में सुलह हो गई तो भारत के आईटी और सर्विस सेक्टर पर क्या असर पड़ने वाला है.
Impact of Xi Jinping's US visit on India: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यूएस यात्रा पर भारत की नजरें भी लगी हुई हैं. असल में अमेरिका भारत के लिए निर्यात का सबसे बड़ा बाज़ार और सबसे बड़ा तकनीकी साझेदार है. वहीं चीन से भारत सबसे ज़्यादा आयात करता है.
ऐसे में ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच समझौते का असर भारत पर भी पड़ेगा. एक तरफ़ जहां नए मौक़े मिल सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ़ कुछ चुनौतियां भी खड़ी होंगी. पहले बात चुनौतियों की. पिछले कुछ सालों के दौरान अमेरिका और दूसरे देशों की बड़ी कंपनियों ने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत को एक मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में चुना है.
ट्रंप-जिनपिंग वार्ता पर भारत की भी नजर
अमेरिका और चीन के बीच संबंध सुधरने पर इन कंपनियों के बीच चीन छोड़ने की जल्दबाज़ी नहीं रहेगी. इससे भारत में विदेशी निवेश की रफ़्तार धीमी होगी. भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर कमज़ोर होगा. चीन की कंपनियों को अमेरिकी मार्केट में आसान पहुंच मिल जाएगी. इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाज़ार में चीनी कंपनियों से मुक़ाबला करना होगा.
दूसरी तरफ़ दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध ख़त्म होने से दुनिया की अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी. इससे भारत के IT और सर्विस सेक्टर को फ़ायदा होगा क्योंकि अमेरिकी कंपनियों का खर्च बढ़ेगा.
सेफ रहेगी भारत की सप्लाई चेन
वहीं अमेरिका और चीन के बीच तनाव घटने से दुनिया के बाक़ी देशों की तरह भारत की सप्लाई चेन भी सुरक्षित रहेगी. भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर महत्वपूर्ण पुर्जों और कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर है. इससे भारतीय कंपनियों को राहत मिलेगी.