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90 फीट के हनुमान से क्यों डरे ट्रंप समर्थक? अमेरिकी एंटी-हनुमान लॉबी का DNA टेस्ट

अमेरिका के टेक्सस में 90 फीट ऊंची हनुमान जी की विशाल प्रतिमा ट्रंप समर्थकों के निशाने पर है. मूर्ति गिराने की धमकी के बाद हिंदू संगठनों ने विरोध जताया है. प्रतिमा को लेकर अमेरिका में सियासी और धार्मिक विवाद गहराता जा रहा है.

Written By Tahir Kamran
Published: Sep 22, 2026, 11:08 PM IST | Updated: Sep 22, 2026, 11:11 PM IST
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अमेरिका के टेक्सस में हनुमान जी की विशाल मूर्ति लगी है. हनुमान जी की ये मूर्ति ट्रंप समर्थकों के निशाने पर आ गई है. ट्रंप के समर्थक हनुमान जी की इस प्रतिमा के खिलाफ नफरत फैलाने में लगे हैं. वो खुलेआम ये बताते हुए घूम रहे हैं कि अगर मिड टर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी जीत गई तो इस मूर्ति को गिरा दिया जाएगा. आखिर अमेरिका जैसे देश में हनुमान जी की एक मूर्ति से वहां के कट्टरपंथी क्यों नाराज हैं? अमेरिका खुद को समान अवसर और सभी धर्मों का देश बताता है.

लेकिन इसके बावजूद हिंदुओं के आराध्य हनुमान जी के खिलाफ अपमानजनक बातें क्यों कही जा रही हैं? जो अमेरिका किसी दूसरे देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ छोटी-मोटी घटना होने पर भी लंबी-चौड़ी रिपोर्ट बनाता है, उसे हिंदुओं के खिलाफ इस तरह की धमकी नजर क्यों नहीं आती? आज अमेरिका के इस दोहरे रवैये की वैचारिक मरम्मत जरूरी है. लेकिन पहले सुनिए किस तरह हनुमान जी की मूर्ति को लेकर अमेरिका में नफरत फैलाई जा रही है.

हनुमान जी की मूर्ति गिराने की धमकी दे रहा ये व्यक्ति ट्रंप का बड़ा समर्थक है. ये अपने कट्टर विचारों के लिए कुख्यात है. अमेरिका में रहने वाले भारतीयों और हिंदू संगठनों ने इस कट्टरपंथी ट्रंप समर्थक की धमकी का जोरदार विरोध किया है. टेक्सस में हिंदू आबादी करीब 4 लाख है और हिंदुओं ने इस नफरत के खिलाफ एकजुट होकर मजबूती से लड़ने का संकल्प जताया है.

हनुमान जी की ये भव्य मूर्ति टेक्सस के सबसे बड़े शहर ह्यूजटन के पास शुगर लैंड में है. ये मूर्ति श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर के बाहर है. आधिकारिक तौर पर इसका नाम स्टैच्यू ऑफ यूनियन यानी मेल-जोल की प्रतिमा रखा गया. कांसे की बनी प्रतिमा को ये नाम इसलिए दिया गया क्योंकि हनुमान जी ने भगवान राम और सीता जी को फिर से मिलाने में मदद की थी.

मूर्ति बनाने से पहले मंदिर से जुड़े लोगों ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा किया. जितने भी जरूरी परमिशन हैं, वो प्रतिमा की स्थापना से पहले हासिल किए गए. इस विशाल मूर्ति का निर्माण भारतीय वास्तुकला के अद्भुत उदाहरण के रूप में किया गया है. ये प्रतिमा धार्मिक महत्व की तो है ही, साथ ही वास्तुकला और इंजीनियरिंग की भी शानदार मिसाल है.

90 फीट ऊंची और 90 हजार किलो वाली ये प्रतिमा करीब 2 साल पहले बनकर तैयार हुई थी. इस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा अगस्त 2024 में की गई थी. इसे इतना मजबूत बनाया गया है कि ये 290 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले तूफान का भी सामना कर सकती है. टेक्सस में अक्सर विनाशकारी तूफान आते रहते हैं. इस मूर्ति को बनाने पर 80 लाख डॉलर यानी करीब 75 करोड़ रुपये खर्च हुए. टेक्सस के साथ-साथ अमेरिका के दूसरे हिस्सों में रहने वाले हिंदुओं ने मिलकर मूर्ति की स्थापना के लिए दान दिया था.

हनुमान जी की ये मूर्ति यानी स्टैच्यू ऑफ यूनियन अमेरिका में चौथी सबसे बड़ी प्रतिमा है. इससे बड़ी सिर्फ 3 प्रतिमाएं हैं- बर्थ ऑफ द न्यू वर्ल्ड, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और फ्लोरिडा में मौजूद पेगासस एंड ड्रैगन. लेकिन जैसे ही हनुमान जी की ये विशाल मूर्ति बनकर तैयार हुई, इसके खिलाफ विवाद खड़ा किया जाने लगा. ये कोई पहला मौका नहीं है जब हनुमान जी की इस मूर्ति के खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी के नेता और समर्थक जहर उगल रहे हैं. एक साल पहले भी ट्रंप की पार्टी के नेता अलेक्जेंडर डंकन ने इसी तरह की धमकी दी थी. इसे आप अमेरिकी कट्टरपंथियों का हिंदूफोबिया भी कह सकते हैं.

वैसे इस बार, ट्रंप समर्थकों की हिंदुओं से इस नफरत की सबसे बड़ी वजह है चुनाव. रिपब्लिकन पार्टी के कट्टरपंथी सिर्फ वोट के लिए हनुमान जी को निशाना बना रहे हैं. सच तो ये है मित्रों, अमेरिका में बढ़ती महंगाई की वजह से रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ लोगों में जबरदस्त नाराजगी है. यही वजह है कि ट्रंप के समर्थक, दूसरे देशों से आने वाले लोगों और धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं. वो रिपब्लिकन पार्टी के ईसाई मतदाताओं को रिझाने के लिए इस तरह की बयानबाजी का सहारा ले रहे हैं. वो लोगों में डर फैलाते हैं कि इतनी ऊंची मूर्ति बनाकर दूसरे देशों से आए लोग टेक्सस पर कब्जा कर रहे हैं. लोगों को ये कहकर भी डराते हैं कि भारतीय यहां के लोगों की नौकरी छीन रहे हैं. यही वजह है कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम बढ़ता जा रहा है.

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About the Author

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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