क्या मक्का महासंकट आने वाला है? यमन की जंग, सऊदी की रणनीति और बढ़ते खतरे को समझिए
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच मक्का के नजदीक ड्रोन अटैक ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. सऊदी अरब ने ड्रोन को मार गिराया. हूती गुट ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है. यमन में भी संघर्ष तेज है.
ईरान, कुवैत, यूएई, बहरीन और जॉर्डन जैसे मुस्लिम देश कई महीनों से किस्तों में युद्ध झेल रहे हैं और अब सऊदी अरब भुगत रहा है. सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि, अब इस्लाम का सबसे पवित्र स्थल..मक्का खतरे में है. खतरे की गंभीरता को आप ऐसे भी समझ सकते हैं, कि सऊदी अरब ने मक्का पर हमले का रेड अलर्ट जारी किया है.
सऊदी अरब में मक्का के नजदीक एक ड्रोन अटैक किया गया था. सऊदी अरब की सरकार का आरोप है कि ये ड्रोन यमन के हूती लड़ाकों ने दागा था और इसका निशाना इस्लाम का पाक मक्का शहर था. इस ड्रोन को सऊदी अरब की सेना ने हवा में ही मार गिराया है. यानी इस ड्रोन अटैक से जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन ड्रोन अटैक की वजह से मक्का में रेड अलर्ट जारी करना पड़ा था. इस अलर्ट की वजह से ना सिर्फ मक्का के नागरिक बल्कि मक्का आए जायरीन यानी श्रद्धालु भी सहम गए थे.
ये सबको मालूम है कि सऊदी अरब पर ईरान समर्थित हूती लड़ाके लगातार हमले कर रहे हैं, लेकिन मक्का पर हमला हो जाएगा. इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि सऊदी अरब के गिरगिट सखा, यानी कथित इस्लामिक नाटो के सदस्य पाकिस्तान और तुर्किए भी इस ड्रोन अटैक पर ज्यादा सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं. तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप एर्दोआन ने इस हमले पर कोई बयान जारी नहीं किया है. पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने सिर्फ सोशल मीडिया पर हमले की निंदा करके खानापूर्ति कर दी है.
पाकिस्तान और तुर्किए पर सवाल
इसी ढुलमुल रवैये की वजह से आज हम तुर्किए और पाकिस्तान को सऊदी अरब का गिरगिट सखा कह रहे हैं. इस्लाम को कथित बुनियाद बनाकर इन्होंने सऊदी अरब से दोस्ती कर ली, यानी सऊदी के सखा बन गए, लेकिन जब इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल पर हमला हुआ...तो तुर्किए और पाकिस्तान दोनों ने गिरगिट की तरह रंग बदल लिया. ईरान के पलटवार के डर से दोनों ने सऊदी अरब का साथ छोड़ दिया. सऊदी अरब के गिरगिट सखा बिल में छिपे बैठे हैं, लेकिन सऊदी अरब खामोश नहीं है. इस हमले को लेकर सऊदी अरब ने एक सख्त बयान जारी किया है.
सऊदी अरब की सेना ने कहा है - मक्का पर हमला करने की कोशिश इस दुनिया की सबसे शर्मनाक हरकत है. मक्का वो पवित्र स्थल है जहां से इस्लाम का संदेश पूरी दुनिया में फैला है. आज भी दुनिया भर के करोड़ों मुस्लिम अपनी इबादत करने मक्का आते हैं. अल्लाह की इबादत करने वालों के अंदर ऐसे हमलों से दहशत भरना एक कायराना करतूत के सिवा और कुछ नहीं करार दिया जा सकता है.
1979 के बाद मक्का में फिर अलर्ट
ये 47 साल बाद है जब मक्का में हमले को लेकर कोई अलर्ट जारी किया गया है. इससे पहले वर्ष 1979 में रेडियो के जरिए अलर्ट जारी किया गया था, उस वक्त 600 से ज्यादा कट्टरपंथियों ने मक्का की ग्रांड मॉस्क को कब्जाने की नापाक कोशिश की थी.
47 साल बाद अलर्ट जारी होना बताता है कि मिडिल ईस्ट के तनाव की आंच अब इस्लाम के पवित्र स्थल मक्का तक भी पहुंच गई है. हालांकि ईरान समर्थित हूती गुट ने मक्का पर हमले की मंशा से इंकार कर दिया है, लेकिन इस हमले के बाद इस्लामिक जगत की मीडिया में जो हेडलाइंस सामने आईं...उन्होंने भी सऊदी अरब के गिरगिट सखाओं को एक्सपोज किया है.
एक हेडलाइन में लिखा है - Saudi-led coalition intercepts Houthi drone headed for Mecca. इसका हिंदी में अर्थ है - सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मक्का पर हूती गुट के ड्रोन अटैक को निष्क्रिय कर दिया है.
इस खबर में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन का जिक्र किया गया है. कथित इस्लामिक नाटो की बुनियाद पाकिस्तान ने डाली थी, यानी हमला नाकाम करने का क्रेडिट इन गिरगिट सखाओं को नहीं दिया गया है. इस खबर में जिस गठबंधन की बात की गई है. वो है यमन में सऊदी अरब और हूती विरोधी गुट का गठजोड़.
यमन में हूती गुट के खिलाफ पलटवार
15 सितंबर के संस्करण में हमने आपको बताया था, कि अपने ऊपर दबाव कम करने के लिए सऊदी अरब से हूती विरोधी गुट को सैन्य संसाधनों की मदद मिल रही है. जो कल हमने बताया था वो आज सच साबित हो गया है. जब पाकिस्तान और तुर्किए नाम के गिरगिट सखा काम नहीं आए, तो सऊदी अरब ने नई रणनीति को अमली जामा पहना दिया है. सऊदी अरब की रणनीति का नतीजा क्या हुआ है. इसे समझने के लिए मिडिल ईस्ट पर एक स्पेशल रिपोर्ट में समझाया गया है.
ये आज के यमन की तस्वीरें हैं. यमन के जिस पश्चिमी हिस्से पर हूती गुट ने कब्जा किया था. वहां अब सऊदी समर्थित खेमे ने धावा बोल दिया है. इस पलटवार का एक ही मकसद है...किसी भी कीमत पर पश्चिमी यमन से हूती लड़ाकों को पीछे धकेलना. दरअसल अगस्त के महीने में हूती लड़ाकों ने पश्चिमी यमन पर बड़ी तादाद में हमले करने शुरु कर दिए थे.
हूती लड़ाकों ने सबसे पहले तायज, अल-जॉफ, मरीब और ढेल जिलों पर कब्जा किया था. इसके बाद हूती गुट ने आगे बढ़कर मोखा, धुबाब और पेरिम द्वीप को भी कब्जा लिया था. मोखा और पेरिम द्वीप दो ऐसे इलाके हैं जो सऊदी अरब के बाब-अल-मंदेब के करीब हैं. इस पोजीशन से हूती लड़ाके लगातार सऊदी अरब से निकलते तेल के जहाजों पर हमला कर रहे थे.
हूती गुट के हाथों पहले ही सऊदी अरब के तेल संयंत्रों को बड़ा नुकसान हो चुका था, जब तेल का अहम रूट भी हाथों से जाता दिखा तो सऊदी समर्थित हादी गुट ने पलटवार शुरु कर दिया. सबसे भीषण लड़ाई तायज़ में हो रही है. तायज़ से ही वो हाईवे जाता है जिसके जरिए पश्चिमी यमन को कब्जाने वाले हूती गुट की रसद जा रही है. इसी वजह से सऊदी समर्थित हादी गुट लगातार तायज पर अपना दबाव बढ़ा रहा है.
तेल की सप्लाई और ईरान के युद्ध की वजह से आज यमन दोबारा सुलग उठा है. हूती गुट ने ईरान का झंडा उठा रखा है तो विरोधी हादी गुट को सऊदी अरब से मदद मिल रही है. गोलियों की तड़तड़ाहट और बारूदी धमाकों के बीच पिस रही है यमन की जनता. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक सितंबर में तेज हुए टकराव की वजह से लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं.
यही इंसानियत की सबसे बड़ी बदकिस्मती है. सत्ता में बैठे लोग अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जंग की चिंगारी भड़का देते हैं और इस आग में झुलसता है एक आम इंसान, जिसका ना महत्वकांक्षाओं से कोई रिश्ता होता है और ना ही जंग से.
मक्का हमले पर भारत की प्रतिक्रिया
मक्का में हुए हमले और मिडिल ईस्ट में चल रहे खूनी टकराव को लेकर भारत ने संवेदना जताई है. भारत ने इस्लाम के पवित्र स्थल यानी मक्का पर हमले की कोशिश की आलोचना की है, साथ ही ये भी कहा है कि टकराव के दौरान नागरिकों को निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं करार दिया जा सकता.