DNA: क्या इंटरनेशनल हुआ SIR विवाद? कैसे जेल जाने से बचे दिपके और दिल्ली के व्यापारियों को 3 हजार करोड़ की चपत क्यों?
देश में SIR विवाद अब दिल्ली से लंदन तक फैल चुका है. इस मुद्दे को लेकर हो रहे लगातार प्रदर्शनों और नाकेबंदी से दिल्ली के व्यापारियों को 3,000 करोड़ का झटका लगा है. आइए जानते हैं पूरा मामला...
इस समय देश में SIR सबसे बड़ा सियासी मुद्दा बना हुआ है. कई दिनों से SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन हो रहा है, लेकिन अब इस प्रदर्शन को इंटरनेशनल बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. आज SIR को लेकर लंदन में सीजेपी और बीजेपी समर्थक आमने-सामने आ गए. भारत में सीजेपी का सपोर्ट करने आए यूट्यूबर ध्रुव राठी भी अब लंदन पहुंच गए हैं. ध्रुव राठी ने अब लंदन में विरोध प्रदर्शन की कमान संभाली है.
इधर दिल्ली में कल कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च निकालने की कोशिश में गिरफ्तार किए गए अभिजीत दिपके पर भी कोर्ट का फैसला आ गया, कोर्ट ने उनको सशर्त जमानत दी है. यानी अब दिपके अपने सहयोगी आशुतोष रांका और सौरव दास की तरह तिहाड़ जेल नहीं जाएंगे.
अभिजीत दिपके को किन शर्तों पर मिली जमानत?
आज आपको जानना चाहिए कोर्ट ने उनको किन शर्तों के साथ जमानत दी और दिल्ली से लंदन तक आज SIR के विरोध और समर्थन में क्या-क्या हुआ.
16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने की कोशिश कर रहे अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने उनके घर से निकलते ही प्रिवेंटिव डिटेंशन में लिया था.
24 घंटे बाद जब वो घर पहुंचे तो उन्होंने किसी से बात नहीं की.. कैमरे के सामने हाथ हिलाकर अंदर चले गए.
आज 17 अक्टूबर को दिपके को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के SEM कोर्ट में पेश किया गया.
कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत देते हुए एक साल तक शांति बनाए रखने और 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर हस्ताक्षर करवाकर रिहा कर दिया. उन्हें ज्यूडिशियल कस्टडी नहीं भेजा गया.
लंदन में भारतीय हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन
उधर लंदन में भारतीय हाई कमीशन के बाहर SFI UK ने ज्ञानेश कुमार के विरोध में प्रदर्शन किया, यहां पर आजादी के नारे लगे.
भारत के SIR पर आज लंदन में किस तरह शोर-शराबा हुआ, ये आपने देखा. वहीं दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर कई महिला और छात्र संगठनों ने भी आज मार्च निकाला. इस प्रदर्शन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नेता एनी राजा समेत कई लेफ्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया.
प्रदर्शनकारियों ने SIR विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं के साथ कथित तौर पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और मारपीट के आरोप लगाए. और घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की. लेकिन पिछले कई दिनों से SIR के विरोध में जारी आंदोलन में एक्टिव कांग्रेस ने आज कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं किया. आज राहुल, प्रियंका या कांग्रेस का कोई बड़ा नेता सड़कों पर नहीं निकला. कहा जा रहा है कांग्रेस अब फेस्टिव मोड में आ गई है.
1 नवंबर को रामलीला मैदान में बड़ी रैली
फिलहाल दिवाली तक कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक की सड़कों पर बड़ा प्रदर्शन करने की योजना नहीं है.
दिवाली से पहले सिर्फ 1 नवंबर को रामलीला मैदान में बड़ी रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें इंडिया ब्लॉक अपनी ताकत दिखाएगा.
इस दौरान कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन छोटे-छोटे प्रदर्शन करते रहेंगे.
राज्यों में भी लोकल यूनिटों को SIR का विरोध करने के लिए कहा गया है.
हालांकि राहुल गांधी ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्टैंडबाय मोड में रहने के लिए कहा है, जिससे राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए जरूरत पड़ने पर राजधानी में लोगों को इकट्ठा किया जा सके.
दिल्ली के कारोबारियों को 3,000 करोड़ का झटका
कांग्रेस अब त्योहारों के बाद फिर से प्रदर्शन तेज कर सकती है. ये खबर दिल्ली के व्यापारियों के लिए राहत देने वाली है, क्योंकि व्यापारी लगातार प्रदर्शनों की वजह से होने वाले नुकसान से परेशान हैं. दिल्ली में व्यापारी संगठन CTI के मुताबिक, अब तक धरना-प्रदर्शन और प्रतिबंधों की वजह से कारोबारियों को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से करीब 2,000 करोड़ और 13 से 16 अक्टूबर के बीच करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर दिवाली तक प्रदर्शन और रास्तों पर पाबंदियां जारी रहीं, तो नुकसान 10,000 करोड़ रुपये के पार जा सकता है.
CTI के मुताबिक, दिल्ली के 700 से ज्यादा बाजारों का कारोबार प्रभावित हुआ है, जिनमें सदर बाजार, चांदनी चौक, करोल बाग और कनॉट प्लेस प्रमुख हैं. नुकसान में सबसे बड़ा हिस्सा रिटेल व्यापार का है, जिसे करीब 1,800 करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा किया गया है.
थोक व्यापार को 600 करोड़ का नुकसान
वहीं थोक व्यापार को 600 करोड़ का नुकसान हुआ है. जबकि होटल-रेस्टोरेंट और सर्विस सेक्टर को 300 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है. ट्रांसपोर्ट, ऑटो-टैक्सी और पर्यटन क्षेत्र को 180 करोड़ का नुकसान हुआ. वहीं दिहाड़ी मजदूरों और छोटे उद्योग-धंधों को 120 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जाहिर की गई है.
व्यापारियों ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखी चिट्ठी
CTI का दावा है कि होटल, रेस्टोरेंट, सिनेमा हॉल, सैलून और जिम जैसे कारोबारों में भी ग्राहकों की कमी और बुकिंग रद्द होने का असर पड़ा है.
व्यापारियों के मुताबिक त्योहारी सीजन में जब सबसे ज्यादा सेल होती है, उस वक्त मेट्रो सेवाएं बंद होने, रास्तों पर नाकेबंदी और जाम के कारण बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और सामान की सप्लाई प्रभावित हुई है. CTI ने सरकार से दिवाली तक प्रमुख इलाकों में प्रदर्शनों पर रोक लगाने, प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान तय करने और कारोबारियों को राहत देने की मांग की है. इसके लिए व्यापारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चिट्ठी भी लिखी है.
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