Xi Jinping US Visit Issues: युद्ध में व्यापार का मौका देखने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब अमेरिका में एक ख़ास मेहमान के स्वागत की तैयारी भी कर रहे हैं. वे मेहमान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं, जो अगले हफ़्ते अमेरिका के दौरे पर जाने वाले हैं. जिनपिंग का ये दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ठीक 11 साल बाद वो व्हाइट हाउस पहुंचेंगे. इन 11 सालों में जिनपिंग कई बार अमेरिका गए हैं लेकिन व्हाइट हाउस नहीं.
इससे पहले आखिरी बार वो 24 सितंबर 2015 को व्हाइट हाउस के दौरे पर पहुंचे थे. अब ठीक उसी तारीख यानी 24 सितंबर को एक बार फिर व्हाइट हाउस में जिनपिंग व्हाइट हाउस के मेहमान होंगे. दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच भविष्य के कूटनीतिक और आर्थिक संतुलन को तय करने के लिहाज़ से ये दौरा महत्वपूर्ण बताया जा रहा है. ट्रंप ने इसी साल मई में अपने चीन दौरे में जिनपिंग को अमेरिका आने का न्योता दिया था, जिसके बाद चीन के राष्ट्रपति की ये यात्रा हो रही है.
जिनपिंग के इस दौरे का एजेंडा क्या है? ट्रंप ने जिनपिंग के स्वागत के लिए कैसी तैयारियां की हैं? जिनपिंग के दौरे से ठीक पहले 100% टैरिफ वाला बिल पास कर अमेरिका ने क्या संदेश दिया है? इन सवालों को डिकोड करने से पहले आपको दोनों देशों के रिश्तों को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य जानना चाहिए.
अमेरिका और चीन के संबंधों के बारे में अक्सर ये कहा जाता है कि दोनों देश आपसी अविश्वास के रिश्ते में बंधे हुए हैं. नहीं नहीं, उलझे हुए हैं. यानी दोनों देश एक-दूसरे के हर क़दम को शक की नज़र से देखते हैं. लेकिन मजबूरियों के कारण उन्हें एक-दूसरे के साथ मेज पर बैठना पड़ता है. अब इसी अविश्वास के बीच जिनपिंग और ट्रंप के बीच बातचीत होने वाली है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में छपी खबर के मुताबिक़ जब जिनपिंग का प्लेन 23 सितंबर को वॉशिंगटन में सेना के एयरबेस पर लैंड करेगा तो उनका स्वागत करने के लिए खुद ट्रंप मौजूद रहेंगे. ऐसा आम तौर पर नहीं होता है. अमेरिकी राष्ट्रपति किसी राष्ट्राध्यक्ष का स्वागत व्हाइट हाउस में करते हैं. ये सामान्य कूटनीतिक प्रोटोकॉल के उलट है.
चीन की कूटनीति में शी जिनपिंग को अमेरिकी राष्ट्रपति के बिल्कुल बराबर माना जाता है. हवाई अड्डे पर खुद ट्रंप की मौजूदगी दुनिया में चीन के प्रभाव और सम्मान को स्वीकार करने का एक बड़ा संकेत है. वहीं ट्रंप को उम्मीद है कि इससे समिट की शुरुआत सकारात्मक माहौल में हो सकेगी.
हालांकि मई में जब ट्रंप चीन के दौरे पर गए थे तो उनका स्वागत करने के लिए जिनपिंग हवाई अड्डे पर नहीं पहुंचे थे. एयरपोर्ट पर ट्रंप का स्वागत करने के लिए चीन के उप राष्ट्रपति को भेजा गया था.
जिनपिंग का स्वागत करने के लिए ट्रंप ने व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में एक हेलीपैड भी बनवाया है. इसे जिनपिंग के दौरे से पहले तैयार करने में ट्रंप ने पूरी ताक़त झोंक दी.
ट्रंप ने जिनपिंग को व्हाइट हाउस क्यों बुलाया ? 11 साल बाद.. व्हाइट हाउस जाएंगे जिनपिंग
ट्रंप-जिनपिंग की 'हाई लेवल मीटिंग' का सीक्रेट— Zee News (@ZeeNews) September 18, 2026
गुरुवार को फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप ने सोशल मीडिया पर व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर की तैयारियों का एक वीडियो भी पोस्ट किया. यानी स्टेट डिनर की कमान खुद मेलानिया ट्रंप ने संभाल ली है. इससे आप समझ सकते हैं कि ट्रंप प्रशासन जिनपिंग के इस दौरे को कितना महत्व दे रहा है.
ट्रंप और जिनपिंग की इस मुलाक़ात से पहले दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच फ़ोन पर भी बातचीत हुई है. गुरुवार को मार्को रुबियो और वांग यी के बीच बातचीत के दौरान इस समिट का एजेंडा तय करने की कोशिश की गई.
जिनपिंग का ये दौरा उस समय हो रहा है, जब अमेरिकी संसद ने चीन समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ लगाने का बिल पास किया है. अब इस बिल को सिर्फ़ ट्रंप की मंज़ूरी का इंतज़ार है.
सोचिए, जिस वक़्त व्हाइट हाउस में जिनपिंग के लिए रेड कार्पेट बिछाने की तैयारी की जा रही है, उसी वक़्त अमेरिका ने चीन पर टैरिफ का भारी बोझ डालने की भी तैयारी कर ली है. एक तरफ़ स्वागत और दूसरी तरफ़ भारी-भरकम टैरिफ. अमेरिका के इस क़दम ने चीन को नाराज़ कर दिया है. चीन के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वो अमेरिका के इस आर्थिक दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है. साथ ही ये धमकी भी दी है कि वो अमेरिका के खिलाफ कड़े जवाबी कदम उठाएगा.
चीन पहले भी अमेरिका की कार्रवाई का जवाब देता रहा है. चाहे वो टैरिफ हो, कूटनीतिक कार्रवाई हो या चीन की कंपनियों पर प्रतिबंध का मामला हो. अमेरिका के हर एक्शन पर चीन से रिएक्शन ज़रूर आता है. यही वजह है कि ट्रंप ने चीन पर 100 टैरिफ लगाने का ऐलान अभी नहीं किया है. वो इसे जिनपिंग की यात्रा तक टाल रहे हैं. जानकारों का मानना है कि ट्रंप इस बिल को चीन के खिलाफ़ एक हथियार की तरह इस्तेमाल करेंगे. वो शिखर सम्मेलन की मेज पर जिनपिंग के सामने अपनी बात मनवाने के लिए इस बिल का डर दिखा सकते हैं.
यानी इस अविश्वास की पृष्ठभूमि में ट्रंप और जिनपिंग की मुलाक़ात होने जा रही है. आपको ये भी जानना चाहिए, ट्रंप-जिनपिंग के बीच शिखर सम्मेलन में क्या-क्या अहम मुद्दे होंगे.
दोनों देशों के बीच सबसे अहम मुद्दा है ट्रेड और टैरिफ. चीन का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस लगातार बढ़ रहा है. ये 200 अरब डॉलर से ज़्यादा है. यानी चीन, अमेरिका से आयात की तुलना में 200 अरब डॉलर ज़्यादा का सामान निर्यात करता है. ट्रंप मिड टर्म चुनाव से पहले अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए चीन का बाज़ार खुलवाने की पूरी कोशिश करेंगे. लेकिन जिनपिंग 100% टैरिफ वाला सवाल ज़रूर पूछेंगे.
दूसरा बड़ा मुद्दा है ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट संकट. ईरान के साथ चीन के अच्छे संबंध हैं और वो ईरान के तेल का सबसे बड़ा ख़रीदार है. ट्रंप प्रशासन चाहता है कि जिनपिंग ईरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उसे पीछे हटने के लिए मजबूर करें. इसके बदले में अमेरिका चीन की कुछ वित्तीय संस्थाओं से प्रतिबंध हटाने या ढील देने का दांव खेल सकता है.
दोनों देशों के बीच एक मुद्दा AI के लिए होड़ भी है. अमेरिका-चीन के बीच मुक़ाबला सिर्फ़ व्यापार तक सीमित नहीं है. दोनों देश AI में बढ़त हासिल करने की भी कोशिश कर रहे हैं. AI में चीन का दबदबा अमेरिका के लिए खतरा होगा. यही वजह है कि अमेरिका, चीन को एडवांस चिप बनाने वाली तकनीक देने पर रोक लगा रहा है.
वहीं चीन ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने तकनीकी प्रतिबंध नहीं हटाए तो वो रेयर अर्थ की सप्लाई पूरी तरह रोक देगा. इससे अमेरिका की टेक और डिफेंस इंडस्ट्री ठप हो जाएगी. साथ ही एक अहम मुद्दा ताइवान का होगा. चीन लगातार ताइवान को लेकर अमेरिका पर दबाव बनाता रहा है. जिनपिंग ने ट्रंप से बातचीत में अमेरिकी हथियारों की बिक्री का मुद्दा भी उठाया है.
यानी ये शिखर सम्मेलन पूरी तरह से Give and Take की कूटनीति पर आधारित होगा. जिनपिंग चीन को आर्थिक स्थिरता देने और अमेरिकी प्रतिबंधों की रफ्तार को धीमा करने की कोशिश करेंगे. वहीं ट्रंप ईरान युद्ध और अपनी घटती लोकप्रियता के बीच व्यापार के क्षेत्र में चीन से रियायत वसूलने का प्रयास करेंगे. इन सबके बीच दुनिया की नज़र इस बात पर होगी कि दोनों के बीच भरोसा बनेगा या अविश्वास की खाई और गहरी होगी.