DNA : दिल्ली से मुंबई तक मालगाड़ियों का नया ‘एक्सप्रेसवे’, 326 KM के 3 नए सेक्शन शुरू, अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने से माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी. इससे उद्योग, व्यापार, एक्सपोर्ट और देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है.
DNA : भारतीय रेल को अक्सर देश की जीवन रेखा कहा जाता है. रेलवे सिर्फ परिवहन का साधन नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था और विकास की रीढ़ भी है. आज भारतीय रेल ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक और महत्वपूर्ण यात्रा पूरी की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के आख़िरी तीन हिस्सों का उद्घाटन किया. इसके साथ ही भारत में मालगाड़ी का एक विशाल नेटवर्क पूरी तरह चालू हो गया.
तीन सेक्शन की शुरुआत
प्रधानमंत्री ने आज कॉरिडोर के तीन सेक्शन की शुरुआत की. तीनों हिस्सों को मिलाकर कुल 326 किलोमीटर आज कॉरिडोर से जुड़े. इनकी लागत 20,700 करोड़ है. इस तरह वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पूरी तरह से तैयार हो गया है.
आम तौर पर जो पटरी पैसेंजर ट्रेन के लिए होती है, उसी पर मालगाड़ी भी चलती है. लेकिन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने ये पूरी तरह बदल दिया है. अब मालगाड़ी के लिए एक विशेष ट्रैक है. इस पर सिर्फ मालगाड़ी चलेगी. आसान शब्दों में कहें तो फ्रेट कॉरिडोर की तुलना एक्सप्रेसवे से की जा सकती है. जिस तरह ट्रकों के लिए एक्सप्रेसवे होता है, उसी तरह मालगाड़ियों के लिए एक अलग रेल एक्सप्रेसवे बनाया गया है. इस पर भारी वजन उठाने वाली मालगाड़ी पूरी स्पीड में और पैसेंजर ट्रेन की रुकावट के बिना चलेगी.
वेस्टर्न कॉरिडोर की दादरी से होगी शुरुआत
वेस्टर्न कॉरिडोर की शुरुआत उत्तर प्रदेश में गौतम बुद्ध नगर जिले के दादरी से होती है. ये नई दिल्ली स्टेशन से करीब 40 किलोमीटर दूर है. ये कॉरिडोर दादरी को मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से जोड़ता है यानी वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली और मुंबई को जोड़ने के लिए मालगाड़ी का एक विशेष नेटवर्क तैयार हो गया है. कुल मिलाकर ये 1,506 किलोमीटर का नेटवर्क है.
जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से सीधा संपर्क स्थापित होने से आयात-निर्यात वाले सामान की आवाजाही तेज होगी. इससे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाहों के बीच संपर्क मज़बूत होगा यानी औद्योगिक केंद्रों का सामान कम समय में और कम लागत पर निर्यात के लिए भेजा जा सकेगा. साथ ही आयात होने वाले सामान भी तेजी से अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे.
आम तौर पर ये कॉरिडोर मौजूदा रेलवे लाइन के साथ-साथ चलता है. लेकिन जो घनी आबादी वाले इलाके हैं या जिन रेलवे स्टेशन पर अधिक भीड़ है, उनसे ये बचकर निकलता है. आज फ्रेट कॉरिडोर का जो विशाल नेटवर्क पूरी तरह बनकर तैयार हुआ है, उसको तैयार करने में 20 साल से भी ज़्यादा समय लगा.
फ्रेट कॉरिडोर में अब तक क्या-क्या हुआ?
2004 में इस प्रोजेक्ट की योजना बनाई गई थी. इसे सिर्फ़ माल ढोने वाले रेलवे नेटवर्क के तौर पर सोचा गया था जिससे दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा रूट पर भीड़ कम की जा सके. इसकी वजह ये थी कि सीमित ट्रैक के कारण मालगाड़ियां अक्सर देर से चलती थी. लेकिन, परियोजना को मंजूरी 2 साल बाद यानी 2006 में मिली. इसके लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया नाम की एक सरकारी कंपनी बनाई गई. लेकिन जमीन अधिग्रहण में देरी और निर्माण की चुनौतियों के कारण इसका काम लंबे समय तक अटका रहा. ट्रैक बिछाने का काम 2014 में जाकर तेजी से शुरू हुआ. यानी प्रोजेक्ट लॉन्च होने के 8 साल बाद. यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट की डेडलाइन लगातार बढ़ती रही और अब 2026 में ये कॉरिडोर पूरा हुआ है. कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देरी के लिए UPA सरकार पर निशाना साधा.