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प्लेन हाईजैक की साजिश या मौत का खेल? 34 हजार फीट के ऊपर हुआ वो खूनी संघर्ष, जिससे हिल गई दुनिया की सुरक्षा एजेंसियां!

Israel Plane Hijack News Details: दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रहे पैसेंजर प्लेन को बुधवार को हाईजैक करने की कोशिश की गई. इस दौरान 34 हजार फीट की ऊंचाई पर खूनी संघर्ष हुआ, जिसे जानकर दुनिया की सुरक्षा एजेंसियां हिल गईं!

Edited By Devinder Kumar
Published: Oct 01, 2026, 12:03 AM IST | Updated: Oct 01, 2026, 12:11 AM IST
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Israel Plane Hijack News in Hindi: सोचिए कि आप विमान से कहीं सफर कर रहे हों. विमान अपनी गति में हो और फिर पायलट पर को-पायलट जानलेवा हमला कर दे तो क्या होगा? जो आप सोच रहे हैं, बिल्कुल वही 174 यात्रियों के साथ 34 हजार फीट ऊपर हुआ है. दुबई से इजरायल जा रहे एक विमान में को-पायलट ने कैप्टन पर हमला करके उसे अपने कंट्रोल में लेने की कोशिश की. लेकिन विमान उड़ा रहे भारतीय कैप्टन ने को-पायलट के मंसूबे को समझ लिया. भारतीय पायलट ने जब को-पायलट को रोकने की कोशिश की, तो उसने चाकू से हमला कर दिया. उसे बुरी तरह जख्मी कर दिया, लेकिन खून से लथपथ कैप्टन ने 174 लोगों को बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी.

एक झटके के साथ नीचे आ गया प्लेन

हालांकि इस दौरान विमान अचानक एक ही झटके में हजारों फीट नीचे आ गया. उसमें मौजूद लोगों की सांसें फूलने लगीं. इजरायल को सूचना मिली कि विमान को हाईजैक कर लिया गया है. सवाल है कि एक को- पायलट ही प्लेन को क्यों हाईजैक करने वाला था? को- पायलट कैसे चाकू लेकर प्लेन में चढ़ गया? जिस प्लेन को दोनों पायलट ने हवा में छोड़ दिया, उसकी इमरजेंसी लैंडिंग कैसे हुई? इन्हीं सवालों के साथ अब हम 720 सेकंड्स की 'लाइफ इमरजेंसी' को डिकोड करेंगे.

विद्वानों का मानना है कि नेतृत्व करने वालों की असली परीक्षा ये नहीं है कि वो कितनी जल्दी निर्णय लेते हैं, बल्कि ये है कि दबाव में कितना धैर्य, शांति और सहनशीलता बनाए रख सकते हैं. उन लोगों में तो असीम धैर्य की आवश्यकता होती है, जो हवा में सैकड़ों लोगों का नेतृत्व करते हैं. UAE से उड़े फ्लाईदुबई के विमान को उड़ा रहे भारतीय पायलट स्मित ने यही किया.

फ्लाईदुबई के इस विमान ने भारतीय समय के अनुसार सुबह 8 बजकर 55 मिनट पर दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरी थी. इस विमान को भारतीय कैप्टन स्मित उड़ा रहे थे उनके साथ को-पायलट ओमान का रहने वाला एक शख्स था. एक घंटा 55 मिनट तक उड़ान भरने के बाद विमान के केबिन में लड़ाई शुरू हो गई. तब विमान इजरायल की सीमा के बेहद करीब जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में उड़ान भर रहा था.

इस विमान में 174 यात्री सवार थे, जिनमें से करीब 100 से ज्यादा यात्री इजरायल के रहने वाले थे. तभी अचानक कॉकपिट से हंगामे की आवाज आने लगी. दोनों पायलट के बीच हाथापाई होने लगी. विमान पूरी तरह से अनियंत्रित होकर दो मिनट के अंदर करीब साढ़े 17 हजार फीट नीचे आ गया. सामान्य तौर पर एक मिनट में एक विमान डेढ़ हजार से तीन हजार फीट नीचे आता है. यहां पर 2 मिनट में साढ़े 17 हजार फीट नीचे विमान का आना, मतलब 174 यात्रियों से भरा हुआ विमान अपनी गति से 6 गुना से भी ज्यादा तेज रफ्तार से नीचे आ गया.

प्लेन को कब्जे में लेना चाह रहा था ओमानी को-पायलट

एक बेहद डरावनी और जानलेवा स्थिति होती है. इसे एविएशन की भाषा में 'रैपिड डिसेंट' या 'डाइव' कहा जाता है. ये ऐसी स्थिति है, जिसमें अगर यात्री ने सीट बेल्ट न बांधी हो, तो सिर सीधे विमान की छत से टकरा सकता है, जिससे गंभीर चोटें या मौत भी हो सकती है.

इससे यात्रियों के कान के पर्दे फट सकते हैं, नाक और कान से खून आ सकता है और साइनस में असहनीय दर्द हो सकता है.
इस दौरान यात्रियों को हार्ट अटैक आने की आशंका होती है. मतलब, यात्रियों के लिए यह 'नियर-डेथ एक्सपीरियंस' था. डर की वजह से सभी यात्री चीख रहे थे. हजारों फीट ऊपर, बादलों के पार, जहां कोई अपना नहीं होता. वहां पायलट हर मुसाफिर की जिंदगी का विधाता रहता है. विमान का ओमानी को-पायलट विमान को अपने कंट्रोल में लेना चाह रहा था और कैप्टन स्मित अपना कर्तव्य निभाते हुए उन 174 यात्रियों के लिए रक्षक बनकर खड़े थे.

कॉकपिट के अंदर को-पायलट लगातार कैप्टन स्मित पर हमला कर रहा था और प्लेन को क्रैश करने या उसे अपने कंट्रोल में लेने की कोशिश कर रहा था. लेकिन चाकू के कई वार सहने के बाद भी कैप्टन स्मित अड़े रहे और अपना कर्तव्य निभाते रहे.
इस दौरान 720 सेकंड्स तक 174 लोगों की जिंदगी अधर में लटकी रही.

फ्लाईदुबई की फ्लाइट नंबर FZ1073 में दो पायलटों के बीच खूनी झड़प हुई थी. को-पायलट ने पायलट पर ताबड़तोड़ चाकुओं से हमला करके उसे जख्मी कर दिया था. जब विमान तेजी से नीचे की ओर गिर रहा था, उसी दौरान ये हमला हुआ. यात्रियों को चीखने की आवाजें सुनाई पड़ीं. पायलट को को-पायलट ने चाकू मारकर नीचे गिरा दिया था. चारों तरफ खून फैला हुआ था.

इजरायली यात्रियों ने हमलावर को किया काबू

विमान को तेजी से नीचे गिरता देख, आगे की सीटों पर बैठे इजरायली यात्री दौड़कर कॉकपिट की तरफ भागे. इजरायली यात्रियों और केबिन क्रू ने मिलकर हमलावर को पकड़कर पायलट से अलग किया. चाकू से घायल पायलट की हालत गंभीर थी. विमान में मौजूद एक इजरायली डॉक्टर ने तुरंत उसका इलाज किया.

विमान में ऑफ-ड्यूटी दो पायलट भी सफर कर रहे थे. हमलावर को बाहर करने के बाद दोनों पायलट कॉकपिट के अंदर गए, जिनमें से एक ने तुरंत फ्लाइट का कंट्रोल अपने हाथों में लिया और विमान को क्रैश होने से बचाकर दोबारा स्थिर किया. जब दोनों पायलट लड़ रहे थे, तभी उन दोनों में से किसी ने इमरजेंसी बटन दबा दिया था. लिहाजा, इजरायल तक ये खबर पहुंच चुकी थी कि दुबई से आ रहा विमान संकट में है.

ओमानी को-पायलट के लड़ते हुए कैप्टन स्मित ने विमान का सामान्य इमरजेंसी का अलर्ट कोड 'Squawk 7700' दबा दिया. जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी तो कुछ ही क्षणों के अंदर विमान के ट्रांसपोंडर से दूसरा कोड 'Squawk 7500' दबाया गया.

जैसे ही ये कोड दबाया गया, दुनिया भर के एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम और इजरायली सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं. जिस जॉर्डन के ऊपर से विमान उड़ रहा वो अलर्ट मोड में चला गया. संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इजरायल, हर देश में हड़कंप मच गया.

प्लेन में कौन-कौन से अलर्ट कोड होते हैं?

इजरायल में मोसाद, इजरायली एयर फोर्स से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक कैसे एक्शन में आ गया, ये हम आपको विस्तार से बताएंगे. लेकिन पहले आपको विमान के अलर्ट कोड के बारे में बताना चाहेंगे.

Squawk 7700 का मतलब होता है सामान्य आपातकाल. मतलब, जब विमान में कोई बड़ी तकनीकी खराबी, इंजन फेलियर, आग लगने या किसी यात्री को गंभीर मेडिकल इमरजेंसी हो, तो ये अलर्ट कोड दबाया जाता है. जब विमान का रेडियो सिस्टम पूरी तरह खराब हो जाए और पायलट का ATC से संपर्क टूट जाए, तो अलर्ट कोड Squawk 7600 एक्टिवेट किया जाता है.

Squawk 7500 कोड एक्टिव होने का मतलब है विमान का हाईजैक हो जाना. जब विमान के भीतर क्रू या यात्रियों पर कोई बाहरी या आंतरिक हमला होता है, तो ये कोड एक्टिवेट किया जाता है. फ्लाईदुबई के इस विमान में पहले Squawk 7500 अलर्ट कोड एक्टिवेट हुआ और फिर Squawk 7700. विमान के हाईजैक होने वाला कोड जैसे ही एक्टिवेट होता है, वैसे ही जमीन पर मौजूद एयर ट्रैफिक कंट्रोल की रडार स्क्रीन पर विमान का सिग्नल लाल या चमकने लगता है.

ATC उस संदिग्ध विमान के रास्ते में आने वाली अन्य सभी उड़ानों को हटाकर आसमान का पूरा रास्ता खाली कर देता है, ताकि वह सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कर सके. जैसे ही ये कोड एक्टिवेट हुआ, वैसे ही इजरायल में हड़कंप मच गया. इजरायल का पूरा सिस्टम सक्रिय हो गया.

हाई अलर्ट पर सक्रिय हो गईं इजरायली एजेंसियां

सबसे पहले इजरायल की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गईं. इजरायल के एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सेना ने तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट की तरफ आने वाले हवाई रास्ते को पूरी तरह अलर्ट पर डाल दिया. सुरक्षा एजेंसियां इस बात के लिए तैयार थीं कि अगर विमान उनकी सीमा में आता है, तो उसे कैसे संभालना है. इजरायली वायुसेना ने बिना एक पल गंवाए अपने लड़ाकू विमानों को आसमान में रवाना कर दिया.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इमजरेंसी बैठक बुलाई. सुबह सुबह पीएमओ में बुलाई गई बैठक में रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज और तमाम अधिकारी मौजूद थे. इस बैठक में स्थिति की गंभीरता पर चर्चा हुई और विमान को लेकर सभी संभावित खतरों और जवाबी कार्रवाई की रणनीति पर चर्चा की गई.

इजरायल की सरकार और सेना किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए खुद को तैयार कर चुकी थी, क्योंकि विमान के हाईजैक होने के कारण दुनिया में कई घटनाएं हो चुकी हैं. न्यूयॉर्क का जो 9/11 आतंकी हमला हुआ था, उसमें भी ऐसे ही यात्रियों से भरे विमानों को अगवा करके वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराया गया था.

1968 में इजरायल की राष्ट्रीय एयरलाइन 'एल अल' के एक विमान को फिलिस्तीनी संगठन ने हाईजैक कर लिया था. 1976 में आतंकवादियों ने 'एयर फ्रांस' के एक विमान का अपहरण कर लिया और उसे युगांडा ले गए. इस विमान में 258 यात्री सवार थे.

भारत के जांबाज पायलट ने बचा ली लोगों की जान

इसीलिए इजरायल कोई चांस लेने के लिए तैयार नहीं था. उसने अपने लड़ाकू विमानों को संदिग्ध विमान की तरफ बढ़ने और उसे हवा में ही चारों तरफ से घेरने का आदेश दिया था, ताकि वह इजरायल की सीमा में घुसकर किसी शहर को निशाना न बना सके. इजरायल के रक्षा मंत्री ने इस घटना को जिहादी हमला कहा है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इसके पीछे जो भी हैं, उनसे सख्ती से निपटा जाएगा.

इजरायल के वैचारिक और सांस्कृतिक संरक्षक माने जाने वाले महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का मानना था कि "कठिनाइयों के बीच ही अवसर छुपे होते हैं और संकट के समय मिलने वाली अप्रत्याशित मदद इस बात का प्रमाण है कि कोई अनजानी दिव्य शक्ति हमारा मार्गदर्शन कर रही है.

इसी दिव्य शक्ति ने कैप्टन स्मित को इतना हौसला दिया कि उन्होंने अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर 174 लोगों की जान बचा ली. यहां आपको फ्लाईदुबई के जांबाज पायलट कैप्टन स्मित के बारे में संक्षेप में जानकारी देना चाहेंगे. फ्लाईदुबई जॉइन करने से पहले, कैप्टन स्मित भारत की प्रमुख विमानन कंपनी स्पाईसजेट में सीनियर कमांडर और 'लाइन ट्रेनिंग कैप्टन' के रूप में काम कर चुके हैं.

कैप्टन स्मित एक बेहद अनुभवी पायलट हैं. उनके प्रोफाइल के अनुसार, उनके पास 9,750 से अधिक घंटों का उड़ान अनुभव है, जिसमें से 6,400 से अधिक घंटे उन्होंने 'पायलट-इन-कमांड' यानी मुख्य कैप्टन के रूप में बिताए हैं.
वे जून 2022 से फ्लाईदुबई में बतौर 'डायरेक्ट-एंट्री कैप्टन' अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर उतारा गया प्लेन

आज जब मुश्किल क्षण आया तो कैप्टन स्मित ने पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य को पूरा किया. जिस वक्त 174 लोगों को बचाने के लिए कैप्टन स्मित लड़ रहे थे, उस वक्त उसी विमान में संयोग से दो ऑफ-ड्यूटी पायलट भी मौजूद थे. उन्होंने तुरंत विमान के फ्लाइट कंट्रोल्स और थ्रॉटल को अपने हाथों में लिया. उन्होंने मैनुअल इनपुट देकर विमान की तेजी से गिरती रफ्तार को रोका और उसे हवा में एक सुरक्षित ऊंचाई पर लाकर स्थिर किया. फिर उन्होंने हाईजैक वाले अलर्ट की जगह फिर से इमरजेंसी अलर्ट वाला बटन दबाया. तब तक आपातकालीन लैंडिंग का अनुरोध मिलने के बाद सऊदी विमानन अधिकारियों ने तुरंत पूरे एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट और आपातकाल घोषित कर दिया था.

प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज एयरपोर्ट पर फायर टेंडर्स, एंबुलेंस और मेडिकल टीम को रनवे पर तैनात कर दिया गया, ताकि विमान के उतरते समय किसी भी स्थिति को कंट्रोल किया जा सके. ये तैयारी इसलिए थी, क्योंकि तब तक विमान इमरजेंसी मोड पर था. जैसे ही फ्लाईदुबई का संदिग्ध विमान नीचे उतरा, वैसे ही सऊदी सुरक्षा बलों ने उस विमान को चारों तरफ से घेर लिया. जांच पूरी होने तक किसी को भी विमान से बाहर आने की अनुमति नहीं दी गई.

लैंडिंग के तुरंत बाद सऊदी अरब की स्वास्थ्य टीमों ने विमान में प्रवेश किया. कॉकपिट में हुई चाकूबाजी में गंभीर रूप से घायल मुख्य पायलट कैप्टन स्मित और को-पायलट को तुरंत हिरासत में लिया गया. उन्हें सऊदी अरब के स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया. उसके बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया.

इजरायल के जो यात्री विमान में मौजूद थे, वो सऊदी अरब से बाद में इजरायल लाए गए. इजरायली सुरक्षा एजेंसियां अपने यात्रियों को लेने के लिए इजरायल से ही एक विशेष विमान सऊदी अरब भेजना चाहती थीं. लेकिन दोनों देशों के बीच आधिकारिक राजनयिक संबंध न होने के कारण सऊदी अरब ने इजरायली विमान को अपने देश में लैंड करने की इजाजत नहीं दी. इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात की मदद ली गई है. यूएई का एक विशेष विमान सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ और अमीराती विमान ताबुक से सभी 174 इजरायली नागरिकों को सुरक्षित लेकर सीधे इजरायल के तेल अवीव पहुंचा.

क्या प्लेन को क्रैश करवाने की साजिश थी?

जिस को-पायलट ने हमला किया उसके बारे में जांच-पड़ताल की जा रही है. इजरायल की जांच एजेंसी को यह संदेह है कि 9/11 की तरह ही विमान से हमला करने के लिए को-पायलट हाईजैक करने की कोशिश कर रहा था. इसकी भी जांच चल रही है कि कहीं को-पायलट वहीं पर विमान को क्रैश तो नहीं करवाना चाहता था. क्योंकि ऐसा भी पहले हो चुका है.

2015 में जर्मनविंग्स फ्लाइट के को-पायलट ने मुख्य कैप्टन को टॉयलेट जाने के बहाने कॉकपिट से बाहर कर दिया. इसके बाद उसने दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया और विमान को आल्प्स के पहाड़ों में क्रैश कर दिया, जिससे विमान में सवार सभी 150 लोगों की मौत हो गई थी.

2014 में मलेशिया एयरलाइंस का विमान गायब हो गया. इस रहस्यमयी ढंग से गायब हुए विमान के पीछे भी एक मुख्य थ्योरी यह है कि कैप्टन ने जानबूझकर विमान का संपर्क तोड़ा और इसे हिंद महासागर में ले जाकर क्रैश कर दिया.

यही कारण है कि इजरायल की खुफिया एजेंसियां मोसाद और शिन बेट इसे एक आतंकी हमले की साजिश मानकर जांच कर रही हैं. उनका लक्ष्य यह पता लगाना है कि इस पायलट के पीछे किसी आतंकी संगठन या विदेशी साजिश तो नहीं है.

मोसाद और शिन बेत की टीमें हुई सक्रिय

कहते हैं कि जब आसमान में कोई साजिश रची जाती है, तो जमीन पर मोसाद और शिन बेत के खुफिया तंत्र उसकी हर एक परत को उधेड़ने के लिए एक हो जाते हैं. एक का काम सरहदों के पार मास्टरमाइंड को ढूंढना है, तो दूसरे का मकसद देश की सुरक्षा के हर सुराग को खंगालना है. 174 यात्रियों की जिंदगी दांव पर लगाने वाले को-पायलट की पूरी कुंडली खंगाली जा रही है. फ्लाईदुबई विमान में जो हुआ, वो सिर्फ एक घटना नहीं है. ये एक चेतावनी है.

दुनियाभर में हर दिन एक लाख से एक लाख तीस हजार तक विमान उड़ते हैं. उनमें एक करोड़ तीस लाख से ज्यादा यात्री हवाई सफर करते हैं. भारत में ही हर दिन 4 से 5 लाख लोग हवाई सफर करते हैं. किसी भी सामान्य समय में एक साथ आसमान में 10 लाख यात्री हवा में सफर कर रहे होते हैं.

सोचिए, इन कमोबेश हर विमान में सवार यात्रियों की जिंदगी दो पायलटों के हाथों में होती है. उन्हीं के भरोसे लोग जिंदगी दांव पर लगाकर आसमान में सफर करते हैं. हम और आप हर कोई उन्हीं पर विश्वास करके चलते हैं और जब उन्हीं की सोच दूषित हो जाए. वही जब किसी तरह की साजिश का शिकार हो जाए. वही जब लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने के लिए तैयार हो जाएं तो समझ सकते हैं कि ये कितना बड़ा संकट है.
 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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