UNGA में 75 देशों के बहिष्कार के बावजूद अकेले नेतन्याहू कैसे भारी पड़े? 'नरसंहार' पर विरोधियों को एक-एक कर किया चित
Benjamin Netanyahu UN Speech: UNGA में 75 देशों के बहिष्कार के बावजूद इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू अकेले ही सब पर भारी पड़ गए? गाजा में कथित 'नरसंहार' के आरोपों पर उन्होंने एक-एक करके विरोधियों को करारा जवाब दिया.
Message to World from Benjamin Netanyahu UN Speech: अमेरिका के न्यूयार्क में चल रहे संयुक्त राष्ट्र की आमसभा में हर तरफ इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चर्चे हैं. पूरी दुनिया का फोकस ट्रंप-जिनपिंग से हटकर नेतन्याहू पर शिफ्ट हो चुका है. ये इसलिए हुआ है, क्योंकि UNGA में नेतन्याहू ने 75 देशों का अकेले मुकाबला किया है. आज आपको जानना चाहिए, संयुक्त राष्ट्र में 75 देशों पर एक अकेला इजरायल कैसे भारी पड़ गया? इस विश्लेषण में सबसे पहले आपको इजरायल की पूर्व प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर का एक बयान सुनना चाहिए.
गोल्डा मेयर ने कहा था, 'अगर हमारे दुश्मन हथियार डाल दें, तो शांति हो जाएगी, लेकिन अगर हमने हथियार डाल दिए, तो हमारा वजूद मिट जाएगा.'
इजरायल के पास जीत के सिवाय कोई विकल्प नहीं
यही इजरायल का संपूर्ण दर्शन है. इजरायली सेना और वहां के नागरिकों को पता है कि उनके पास हारने का कोई विकल्प नहीं है. उनके पास पीछे हटने के लिए दुनिया में कोई दूसरी जगह नहीं है. जब किसी को दीवार से सटा दिया जाता है, तो वो सबसे खूंखार पलटवार करता है. इस बार इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कूटनीतिक मंच से अपने सभी दुश्मनों पर एक साथ पलटवार किया है.
इजरायल ने इससे पहले भी कई बार गठबंधन सेनाओं को हराया है. इस बार नेतन्याहू का मुकाबला एक दो नहीं पूरे 75 देशों से था. लेकिन हमेशा की तरह इजरायल ने हथियार नहीं डाले. अमेरिका में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी के बावजूद नेतन्याहू ने कैसे पूरी दुनिया की लाइमलाइट चुरा ली.कूटनीतिक मंच पर इजरायल पर अटैक करने वाले एक एक दुश्मन को उन्होंने चुन चुन कर जवाब दिया.
आज आपको ये भी समझना चाहिए हर तरफ दुश्मनों से घिरे इजरायल जैसे देश का नागरिक होना कितना चुनौतीपूर्ण है. इजरायल का एक एक नागरिक इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए कितनी तपस्या करता है.
दुनिया के सबसे बड़े मंच पर तुर्किए, ईरान और पाकिस्तान समेत मुस्लिम बहुल देशों के राजनयिक जब बाहर निकल रहे थे. तब उनको कायर कहकर नेतन्याहू ने अपने भाषण का आरंभ किया. संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतने देशों के प्रतिनिधियों का अचानक एक साथ बाहर निकल जाना कोई सामान्य विरोध नहीं था. ये इजरायल का एक सुनियोजित कूटनीतिक बहिष्कार था. इजरायल को नीचा दिखाने की कोशिश थी. इजरायल को दुनिया में अलग थलग करने का प्रयास था. इजरायल के मनोबल को संयुक्त राष्ट्र में तोड़ने की कोशिश थी. जिसमें एक तरफ पूरे 75 देश थे. दूसरी तरफ इजरायल अकेला खड़ा था.
नेतन्याहू के आते ही बॉयकाट कर गए 75 देश
जिन देशों ने नेतन्याहू के आते ही उनका बॉयकॉट किया, उनकी संयुक्त आबादी लगभग 400 करोड़ है. जबकि छोटे से देश इजरायल की आबादी लगभग 1 करोड़ है. यानी एक व्यक्ति के मुकाबले 400 लोग खड़े थे. लेकिन फिर भी इजरायल ने अपना युद्ध जारी रखा.
60 लाख यहूदियों के नरसंहार यानी होलोकॉस्ट की राख से उठकर खड़े हुए इजरायल का एक ही उसूल है. नेवर अगेन'. यानी वो इतिहास दोबारा कभी नहीं दोहराया जाएगा. इसी जीवटता ने इजरायल को दुनिया का वो घातक योद्धा बना दिया है, जो अपने दुश्मनों को चुन चुन कर जवाब देता है और नेतन्याहू ने भी ऐसा ही किया.
नेतन्याहू ने शुरुआत उनके भाषण का बहिष्कार करने वालों को कायर बोलने से की. उनका गुस्सा इन देशों के लिए यहीं पर खत्म नहीं हुआ. जब नेतन्याहू के पोडियम पर पहुंचने के बाद दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि अपनी अपनी कुर्सियों को छोड़कर जाने लगे तो नेतन्याहू बहुत गौर से देख रहे थे. किन किन देशों के प्रतिनिधियों की कुर्सी खाली हो रही है. उनकी नजर सऊदी अरब और कतर जैसे देशों की खाली कुर्सी पर भी पड़ी. अरब देशों के प्रतिनिधियों ने भी नेतन्याहू के भाषण का बहिष्कार किया था. नेतन्याहू ने अपने भाषण में उन देशों पर भी निशाना साधा जिनकी वो मदद करते रहे हैं. लेकिन आज वो भी इजरायल के बहिष्कार में शामिल हो गए.
नेतन्याहू का गुस्सा इसलिए भी भड़का क्योंकि ईरान के हमलों में सिर्फ सऊदी अरब, कतर, कुवैत और बहरीन में 28 लोगों की मौत और 5 लाख करोड़ रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान हुआ है. लेकिन ये देश बहिष्कार इजरायल का कर रहे हैं . इसके अलावा इजरायल हूती विद्रोहियों के खिलाफ युद्ध में सऊदी अरब की मदद कर रहा है. सउदी अरब को इस युद्ध में हूती के खिलाफ खुफिया जानकारियां दे रहा है. इजरायल ने हूती विद्रोहियों की सैन्य तैनाती, उनके हथियारों और भविष्य के संभावित ऑपरेशनों का इंटेलिजेंस मैप बनाने में भी सऊदी अरब की मदद की है. इसलिए भी नेतन्याहू अरब देशों के प्रतिनिधियों के इस बहिष्कार को पाखंड बता रहे हैं.
इजरायली पीएम ने एक-एक कर खोली सबकी पोल
ये वो देश हैं, जो परदे के पीछे से इजरायल का सहयोग चाहते हैं. लेकिन इस्लामिक जगत के सामने मजबूरी की वजह से उसके खिलाफ खड़े हो जाते हैं. कुछ देश ऐसे हैं, जो खुलकर इजरायल का विरोध करते हैं. इस लिस्ट में सबसे ऊपर ईरान का नाम आता है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान सबसे बड़ा निशाना इजरायल पर साधा था. इजरायल के बारे में मशहूर है कि वो अपने दुश्मन के हर हमले का जवाब जरूर देता है.
नेतन्याहू ने खुले मंच से ऐलान किया कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करना उनके सबसे आसान फैसलों में से एक था. नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल पिछले तीन साल से सात मोर्चों पर युद्ध लड़ रहा है. जिसमें हमास, हिजबुल्लाह, हूती, ईरान और इराक-सीरिया के आतंकी गुट शामिल हैं. नेतन्याहू ने इस सभी का रिमोट कंट्रोल ईरान के पास होने की बात कही.
ईरानी प्रतिनिधिमंडल नेतन्याहू का भाषण शुरू होते ही कुर्सी खाली छोड़कर चला गया था. उस खाली कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए नेतन्याहू ने भविष्यवाणी की कि बहुत जल्द ईरान के नेतृत्व का पतन तय है. अपने भाषण में नेतन्याहू ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के उन सभी आरोपों का जवाब दिया जो पेजेश्कियन ने इजरायल पर लगाए थे.
पेजेश्कियान ने यूएन में कहा था कि हमारा परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, जबकि इजरायल के पास बम हैं. जबकि नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान, इजरायल और दुनिया को तबाह करने के लिए परमाणु बम बना रहा था. इसीलिए इजरायल ने बिना हिचकिचाए उनके परमाणु ठिकानों को जमींदोज़ कर दिया.
पेजेश्कियान ने अपने भाषण में ईरान को एक शांतिप्रिय पीड़ित देश और इजरायल को आतंकवादी बताने की कोशिश की थी, जवाब में नेतन्याहू ने ईरान की सरकार को हत्यारी और तानाशाह करार दिया. ईरानी राष्ट्रपति ने इजरायल पर गाजा में 80,000 नागरिकों को मारने और नरसंहार करने का आरोप लगाया था. नेतन्याहू ने गाजा में नरसंहार के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे "सदी का सबसे बड़ा झूठ करार दिया. नेतन्याहू ने कहा इजरायल केवल ईरान के प्राक्सी गुटों से अपना बचाव कर रहा है.
ईरान के आतंक को दुनिया के सामने किया जाहिर
नेतन्याहू ने इजरायल पर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए आंकड़े भी रखे और कुछ चीजें भी दिखाईं. ये भी ईरान को एक जवाब था. मसूद पेजेश्कियान जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण देने आए तो उनके पास अमेरिका और इजरायल के हमले में मारे गए सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और स्कूली छात्रों की तस्वीरें थीं. नेतन्याहू भी अपने साथ कुछ चीजों को लेकर पहुंचे थे.
नेतन्याहू ने UNGA के मंच से एलन मस्क की कंपनी का एक पोर्टेबल स्टारलिंक मिनी डिवाइस निकालकर दुनिया को दिखाया. उन्होंने इस डिवाइस को दिखाते हुए ईरान की इंटरनेट सेंसरशिप पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि यह वो डिवाइस है जो लोगों को सच जानने, अपनी बात कहने और आज़ादी से सोचने की ताकत देता है. नेतन्याहू ने कहा कि वो ये स्टारलिंक डिवाइस UN अध्यक्ष के पास ईरानी डेलिगेशन के लिए छोड़कर जा रहे हैं. जिससे जब ईरानी अधिकारी बगावत करके भागें तो इसके जरिए इंटरनेट का इस्तेमाल करके दुनिया को असली कहानी बता सकें.
नेतन्याहू ने अपने भाषण के बीच में हाथ में एक पेजर भी उठाया. इस पेजर को बाकायदा लहराते हुए उन्होंने हिजबुल्लाह पर हमले की बात दुनिया को याद दिलाई. नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह इस पेजर को कभी नहीं भूलेगा. आपको याद होगा कि किस तरह लेबनान में हिजबुल्लाह के पास मौजूद पेजर में इजरायल ने एक साथ धमाके किए थे. इजरायल के इस खुफिया हमले में हिजबुल्लाह से जुड़े 12 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 2,800 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
ऐसी तैयारी ही इजरायल को हमेशा अपने दुश्मनों से आगे रखती है. नेततन्याहू जब UN पहुंचे, तो वो सिर्फ कागजों पर लिखा भाषण नहीं लाए थे. वो अपने साथ दुश्मनों का खौफ और उनकी बर्बादी के सबूत भी लाए थे. नेतन्याहू ने यह पेजर दिखाकर दुनिया को बता दिया कि इजरायल की पहुंच दुश्मन की जेब और उनके घरों तक है. मंच से जब नेतन्याहू ने पेजर लहराया होगा तो लेबनान में बैठे हिजबुल्लाह के कमांडरों के सामने वो दृश्य जरूर घूमने लगा होगा. जब उनकी जेब में मौजूद पेजर में धमाके शुरू हो गए थे.
जो कहता है, वो करके ही दम लेता है इजरायल
नेतन्याहू ने स्टारलिंक डिवाइस दिखाकर ईरान के नेताओं को ओपन चैलेंज इसलिए दिया. इसी मंच से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन दावा करके गए थे कि ईरान की जनता इस्लामिक रिजीम के साथ खड़ी है. जबकि नेतन्याहू ने बताया कि ईरान की सरकार कैसे इंटरनेट बंद करके लोगों की आवाज दबा रही है. नेतन्याहू ने दुश्मनों को ये संदेश भी दिया वो सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक और साइकोलॉजिकल वॉरफेयर से भी दुश्मनों का दम घोंट सकता है.
जब नेतन्याहू यूएन में भाषण दे रहे थे, उस वक्त ईरान के प्रतिनिधि अपनी सीट पर अमेरिकी हमले में मारे गए कुद्स फोर्स के जनरल कासिम सुलेमानी की फोटो रखकर चले गए थे. लेकिन नेतन्याहू जिस स्टारलिंक किट को ईरानी प्रतिनिधियों के लिए छोड़कर गए. ईरानी प्रतिनिधियों के लौटने के बाद इजरायल के प्रतिनिधि उसे लेकर ईरान के प्रतिनिधियों के पास पहुंचे. उन्होंने उनसे कहा कि यह तुम्हारे लिए बहुत उपयोगी हो सकता है. क्या तुम इसे लेकर तेहरान वापस ले जाना चाहते हो?
ऐसा करके इजरायल के प्रतिनिधियों ने दिखाने की कोशिश की कि उनके प्रधानमंत्री जो काम देकर जाते हैं. उसे इजरायली पूरा करने का प्रयास करते हैं. यूएन के मंच से जिस देश ने इजरायल पर जितना तीखा हमला ला...नेतन्याहू ने उसे उतना ही जोरदार जवाब दिया. इजरायल के खिलाफ नफरत फैलाने वालों में तुर्किए के राष्ट्रपति अर्दोआन का नाम भी टॉप पर आता है.
अर्दोआन ने गाजा को दुनिया का सबसे बड़ा बच्चों का कब्रिस्तान और बच्चों के अंग कटने का सबसे बड़ा केंद्र कहा. उन्होंने इजरायल पर तीन साल में 74,000 फिलिस्तीनियों को मारने का आरोप लगाया. साथ ही, यरूशलम के पवित्र स्थलों पर मुसलमानों-ईसाइयों की पहुंच रोकने की साजिश की बात कही. जब नेतन्याहू की बारी आई तो उन्होंने तुर्किए के सारे पाप एक साथ गिना दिए. नेतन्याहू ने तुर्किए को यहूदी-विरोधी झूठ फैलाने वाला सबसे नया देश बताया.
नेतन्याहू ने अर्दोआन को ऐसा तानाशाह करार दिया जो हमास के आतंकी सरगनाओं को पनाह देता है. जिसने हजारों कुर्द नागरिकों की हत्या करवाई है. जिसने अर्मेनिया में नरसंहार किया है. नेतन्याहू ने कहा अर्दोआन के पास पत्रकारों और विपक्षी नेताओं को जेल में डालने का विश्व रिकॉर्ड है. इसके अलावा तुर्किए ने उत्तरी साइप्रस पर गैरकानूनी कब्जा किया है. NATO सदस्य ग्रीस की सीमाओं का बार-बार उल्लंघन करता है और अब सीरिया पर भी कब्जा करना चाहता है. नेतन्याहू ने कहा कि वो येरुशलम पर अर्दोआन के कब्जे का सपना कभी पूरा नहीं होने देंगे
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि यहूदियों के पास जो जीवटता और अपनी रक्षा करने की जो अद्भुत क्षमता है, वो इतिहास में किसी और के पास नहीं दिखती.
ब्रिटेन और फ्रांस को समझाया उपनिवेशवाद का पाठ
ये उस दौर की बात है, जब ब्रिटेन और इजरायल मजबूत सहयोगी थे. अब परिस्थितियां बदल गई हैं. इजरायल के पुराने सहयोगी रहे ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने हाल ही में गाजा युद्ध को लेकर इजरायली निर्यात पर प्रतिबंध लगाए थे. इसके अलावा, पश्चिमी देशों द्वारा इजरायल की नीतियों को 'उपनिवेशवाद' से जोड़ा जा रहा था. नेतन्याहू ने इसका हिसाब भी कर दिया है.
नेतन्याहू ने इन दोनों बड़े देशों को उनके ही औपनिवेशिक इतिहास की याद दिलाई. नेतन्याहू ने कहा कि जो इजरायल जैसे छोटे से देश पर उपनिवेशवाद का आरोप लगाते हैं. उन्होने ही इस शब्द का अविष्कार किया है. यानी जिस ब्रिटेन का इतिहास आधी दुनिया पर कब्जा करने का है. उससे इजरायल को अपनी आत्मरक्षा की लड़ाई में उपदेश नहीं चाहिए.
इजरायल का इतिहास रहा है कि उस पर हमला करने वाला दुश्मन कहीं भी छिप ले, वह उससे बदला लेकर ही रहता है. जिस न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का हेडक्वार्टर है. उसके मेयर ममदानी भी इजरायल के घोर विरोधी हैं. नेतन्याहू को ममदानी युद्ध अपराधी कह चुके हैं. ममदानी ने नेतन्याहू को चैलेंज दिया था कि अगर इजरायल के प्रधानमंत्री न्यूयॉर्क आए तो उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा. लेकिन नेतन्याहू न्यूयॉर्क आए, अपना भाषण दिया और न्यूयॉर्क में ही खड़े होकर ममदानी को भी आइना दिखा दिया.
संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायली पीएम ने जो किया, वो अचानक नहीं हुआ . नेतन्याहू की इस आक्रामक शैली की स्क्रिप्ट यानी पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी . वर्ष 2025 में नेतन्याहू के भाषण के दौरान 77 देशों के प्रतिनिधियों ने वॉकआउट किया था . तब भी मुद्दा गाजा का युद्ध ही था . इसलिए इस बार नेतन्याहू पूरी तरह तैयार थे. संयुक्त राष्ट्र में वो किस तरह विरोधियों की वैचारिक मरम्मत करेंगे..इसकी झांकी एक हफ्ते पहले से दिखा रहे थे.
मीम बनाकर विरोधी देशों का उड़ाया मजाक
22 सितंबर को नेतन्याहू के अधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक मीम शेयर किया गया था. इस मीम के जरिए नेतन्याहू ने संदेश दिया था कि संयुक्त राष्ट्र में बैठे इजरायल विरोधी किरदार, तोते की तरह एक ही स्क्रिप्ट रटकर आए हैं. इस एजेंडा का मकसद इजरायल को बदनाम करना है और इजरायल कथित झूठ को स्वीकार नहीं करेगाा. भाषण से एक हफ्ते पहले नेतन्याहू लगातार गाजा की हकीकत को दुनिया के सामने रख रहे थे.
अब हम आपको नेतन्याहू के गाजा और आतंकवाद से जुड़े पोस्ट दिखाने जा रहे हैं . 17 सितंबर को नेतन्याहू ने लिखा - जुडिया और समारिया में इजरायली फौजियों ने आतंकी हमलों को नाकाम कर दिया है. 20 सितंबर के पोस्ट में लिखा गया कि फिलिस्तीन से इजरायल पर हर दो घंटे में एक हमला होता है. दुनिया का मीडिया आतंकी हमलों में मारे गए इजरायलियों की कहानियां नहीं दिखाएगा. 22 सितंबर के पोस्ट में लिखा गया कि आज मैंने आतंकी हमले में मारी गईं नेतानेल शुक्रों के परिवार से बात की है. 23 सितंबर को फिर एक पोस्ट सामने आया, जिसमें लिखा था कि इजरायली फौज ने गाजा में हमास के फाइनेंसर मोहम्मद अबू अलवान को मार गिराया है.
फिर 24 सितंबर को यानी कल नेतन्याहू ने UN में खड़े होकर इजरायल विरोधियों को सच का आइना दिखा ही दिया . दुनिया का कथित लिबरल हिस्सा गाजा को नरसंहार की तरह देख रहा था, उसे हवा-पानी दे रहा था. लेकिन नेतन्याहू और इजरायल अपने स्टैंड पर टिके रहे. नेतन्याहू ने ना सिर्फ अपने भाषण बल्कि अपने हर भाव से एक ही संदेश दिया - इजरायल ने नरसंहार नहीं किया, बल्कि इजरायल खुद नरसंहार का शिकार बना था. इस देश ने आतंक पर पलटवार किया है . इजरायल का यही स्टैंड दुनिया के कथित बुद्धीजीवियों को हजम नहीं होता. UNGA के मंच से नेतन्याहू का मैसेज ये भी है कि इजरायल को इस कथित लिबरल लॉबी के विचारों या आलोचनाओं से फर्क नहीं पड़ता है.
अगर आप इजरायल जाएंगे तो आपको शादियों से लेकर पार्टीज तक में एक मुहावरा जरूर सुनने को मिलेगा. ये मुहावरा है - एम इजरायल हाय. यहूदी भाषा में इसका अर्थ है कि इजरायल के लोग जीवित रहेंगे. इस मुहावरे से संदेश दिया जाता है - कि यहूदियों ने सदियों तक नरसंहारों और जबरन विस्थापन को सहा है. यहूदियों की नस्ल खत्म करने की सैकड़ों कोशिशें की गई हैं लेकिन इजरायल के बच्चे यानी यहूदी जीवट के साथ आगे बढ़ते रहेंगे.
अपने वजूद के लिए लड़ता रहता है इजरायल
तकरीबन एक करोड़ की आबादी, दुनिया की अर्थव्यवस्था का सिर्फ 0.57 प्रतिशत हिस्सा और चारों तरफ मौजूद दुश्मन देश. ऐसी विकट परिस्थितियों में भी , जिंदगी जीने की इच्छा ही इजरायल के वजूद का आधार बनी हुई है. इजरायल की इसी फाइटिंग स्पिरिट का एक हिस्सा है उसकी फौज. कुछ अपवादों को छोड़ दें तो हर इजरायली नागरिक के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग लेना और फौज में सेवा करना अनिवार्य है.
एक इजरायली नागरिक के लिए हथियार उठाने की प्रक्रिया सिर्फ साढ़े सोलह साल की उम्र में शुरु हो जाती है. इस उम्र में ये जांचना शुरु कर दिया जाता है कि नौजवान फौज में सेवा देने के लायक है या नहीं. 18 साल की उम्र में फौज की नौकरी शुरु हो जाती है. पुरुषों को सेना में कम से कम 2 साल और 8 महीने तक काम करना पड़ता है. महिलाओं के लिए ये समय सीमा 2 साल है. इजरायली सरकार और फौज के पास ये अधिकार भी होता है कि 40 साल तक की आयु वाले पुरुष या महिला को जंग या आपातकाल में सेना से जुड़ने के लिए बुलाया जा सकता है. यानी हर इजरायली बच्चा जब दुनिया को समझना शुरु करता है, ठीक उसी वक्त उसे दुश्मन से लड़ना और खुद को जिंदा रखना भी सिखा दिया जाता है. यही है 'एम इजरायल हाय' का सार.
सेना की इसी ट्रेनिंग की वजह से हर इजरायली हथियारों से परिचित होता है. जरूरत प़ड़ने पर हथियारों की यही जानकारी दुश्मन से लड़ने में भी काम आती है. इजरायल की फाइटिंग स्पिरिट कभी नहीं बदलती. हमेशा एक जैसी रहती है.
इजरायल हथियारों का बड़ा निर्माता है लेकिन ऐसा नहीं है कि हर इजरायली को आसानी से हथियार मिल सकता है . इजरायली कानून के मुताबिक बंदूक खरीदने की न्यूनतम उम्र 21 साल है. हथियारों का लाइसेंस देने के लिए तीन मानदंडों को प्राथमिकता दी जाती है. पहला मानदंड है कि नागरिक इजरायल-गाजा बॉर्डर जैसे किसी हाई रिस्क इलाके में रहता है. दूसरा मानदंड है कि आवेदक सेना में सेवा दे चुका है या फिर वर्तमान में सेना के साथ कार्यरत है और तीसरा मानदंड है कि आवेदक किसी ऐसे पेशे या दफ्तर से जुड़ा है जिसपर आतंकी हमले की आशंका ज्यादा है. आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि इजरायल में डॉक्टर भी बंदूक रखते हैं. पहले हमास के हमलों के टारगेट इजरायली अस्पताल ज्यादा होते थे, इसी वजह से इजरायल में डॉक्टर भी हथियार रखने लगे थे.
योनाथन नेतन्याहू को माना जाता है नेशनल हीरो
इजरायली नागरिकों का जीवट और सेना की अनिवार्य ट्रेनिंग की वजह से ही, 7 अक्टूबर 2023 को जब हमास ने आतंकी हमला किया था. तब ना सिर्फ इजरायली सेना बल्कि इजरायली नागरिकों ने भी हमास के आतंकियों से लोहा लिया था. अगर ये बहादुर इजरायली ना होते, तो आतंकी हमलों में मरने वाले लोगों की तादाद कहीं ज्यादा होती.
इजरायल के जिस संघर्ष और हिम्मत को बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से दर्शाया है. शौर्य का वो भाव नेतन्याहू परिवार की रगों में बहता है. बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई योनाथन नेतन्याहू को तो इजरायल में राष्ट्रीय हीरो का दर्जा दिया गया है.
वर्ष 1976 में फिलिस्तीनी आतंकियों ने एयर फ्रांस के एक हवाई जहाज को हाईजैक कर लिया था. आतंकी इस हवाई जहाज को युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट पर ले गए थे. जहाज में सवार यहूदियों और दूसरे यात्रियों को बचाने के लिए इजरायली सेना ने एक ऑपरेशन चलाया था. इस ऑपरेशन की कमान योनाथन नेतन्याहू के हाथों में ही थी. योनाथन के सैनिकों ने दूसरे देश की धरती से सैकड़ों यहूदियों को आतंकियों के चंगुल से रिहा करा लिया था, हालांकि आतंकियों और युगांडा की सेना के साथ हुई लड़ाई में योनाथन की मौत हो गई थी लेकिन उनकी कमान में गया हर इजरायली सैनिक सकुशल वापस लौटा था.
कभी आतंकियों की साजिश तो कभी पड़ोसी अरब देशों के हमले. इजरायल का इतिहास प्रतिरोध से भरा हुआ है. इसी प्रतिरोध की एक झलक बेंजामिन नेतन्याहू के उस भाषण में भी दिखी, जब उन्होंने गाजा में कथित नरसंहार वाले प्रोपेगेंडा को ध्वस्त कर दिया.
गाजा के नाम पर 75 देशों के प्रतिनिधियों ने नेतन्याहू के भाषण का बहिष्कार कर दिया, लेकिन इंसानियत के इन कथित दूतों को गाजा के सिवा कुछ और नजर नहीं आता है. अब हम एक ऐसी तस्वीर दिखाने जा रहे हैं, जो शायद इन कथित शांतिदूतों की आंखें खोल दे.
अफगानिस्तान में पाकिस्तानी नरसंहार क्यों नहीं देखती दुनिया
आग की लपटों और धुएं के काले गुबार से भरा ये वीडियो अफगानिस्तान के कांधार का है. अपनी सुरक्षा की खोखली दलील देकर पाकिस्तानी एयरफोर्स ने कांधार पर बमबारी की है. पाकिस्तान का दावा था कि ये हमला आतंकवादी कैंप पर किया गया, लेकिन जिस जगह पाकिस्तानी बम गिरे वो अफगान शरणार्थियों का कैंप था. पिछले एक हफ्ते के अंदर पाकिस्तान ने दूसरी बार अफगानिस्तान पर हवाई हमला किया है. अगर पिछले एक साल की बात करें तो पाकिस्तानी फौज के हमलों में तकरीबन 500 अफगान मारे जा चुके हैं और 1200 से ज्यादा घायल हो चुके हैं.
गाजा में तो हमास के आतंकियों का सफाया किया गया था. आतंकियों की मौत पर इजरायल विरोधी हायतौबा करते हैं, लेकिन बेगुनाह अफगानों की मौत पर खामोश हो जाते हैं. ठीक उसी तरह जैसे आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बोलती बंद हो गई थी.
UNGA के मंच पर शहबाज शरीफ भी पहुंचे थे . इसी बीच दो बार शहबाज से आतंकवाद को लेकर सवाल पूछे गए.
आतंकवाद और बेगुनाहों की हत्या को कभी भी न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता. इसी वजह से शहबाज शरीफ मुंह छिपाकर चले गए, लेकिन भारत के विदेशमंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तानी मीडिया के प्रोपेगेंडा का ऐसा जवाब दिया, कि दुनिया देखती रह गई.
आज आतंकवाद और उसके प्रायोजकों को इसी भाषा में जवाब देना जरूरी हो गया है, ताकि ये दुनिया समझ पाए कि आजादी की लड़ाई की कथित चादर ओढ़कर जो बंदूक उठाई जाती है, उससे संघर्ष की नहीं बल्कि आतंकवाद की गोली चलाई जाती है .