क्या इजरायल मानेगा ट्रंप और हूती के बीच हुआ समझौता? लाल सागर में हमले रुकने की गारंटी में कितना है दम?
सऊदी अरब पर हमला कर रहे कट्टरपंथी संगठन हूती से अमेरिका ने एक अहम डील की है. एक बड़ी इंटरनेशनल मीडिया एजेंसी के मुताबिक, इस डील में हूती ने यह गारंटी दी है कि वह अमेरिका और इजरायल के जहाज पर हमला नहीं करेगा. इसका मतलब यह हुआ कि हूती इजरायल से तो नहीं भिड़ेगा, लेकिन सऊदी अरब पर हमला करना नहीं छोड़ेगा. आइए जानते हैं पूरा मामला...
खाड़ी के पानी में एक ऐसा गुप्त समझौता हुआ है, जिसने मिडिल ईस्ट के पूरे समीकरण को हिलाकर रख दिया है. गाजा के नाम पर लाल सागर में इजरायली और अमेरिकी जहाजों पर मिसाइलें दागने वाले यमन के हूती लड़ाकों ने अब अचानक यू-टर्न ले लिया है. ओमान में अमेरिका के साथ हुई एक सीक्रेट बातचीत के बाद हूतियों ने भरोसा दिया है कि वे अमेरिका और इजरायल के जहाजों को हाथ भी नहीं लगाएंगे, बल्कि उनके निशाने पर सिर्फ सऊदी अरब के तेल टैंकर होंगे. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि हूती गुट ने इजरायल के आगे यह सरेंडर अपनी मर्जी से किया है या फिर मोसाद के उस खौफनाक 'ऑपरेशन लकी ड्रॉप' की दहशत से, जिसने उनके शीर्ष कमांडरों का सफाया कर दिया था? आइए अमेरिका और हूती के बीच इजरायल वाली डील को डिकोड करते हैं.
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अमेरिका और यमन के हूती लड़ाकों के बीच बातचीत को लेकर एक रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ओमान की मध्यस्थता के बीच अमेरिकी प्रतिनिधियों और हूती गुट के कमांडरों के बीच बातचीत हुई. बातचीत के बाद अमेरिका ने यमन पर हमले न करने का भरोसा दिया है. इसके बदले उसने अपने जहाजों और इजरायल के जहाजों पर हमला नहीं करने की गारंटी भी ले ली. हूती गुट ने यह आश्वासन दिया है कि वह अब न तो अमेरिका और न ही इजरायली जहाजों पर हमले करेगा. हूती गुट के हमलों का निशाना सिर्फ और सिर्फ सऊदी अरब से निकलने वाले तेल के जहाज होंगे, यानी लाल सागर के मुहाने पर मौजूद हूती लड़ाके अब अमेरिकी और इजरायली जहाजों को सुरक्षित गुजरने देंगे.
गाजा पर मिसाइल दागने वाले हूती के यू-टर्न पर सवाल
यह खबर वाकई हैरान करने वाली है. ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका ही वह देश था, जिसने यमन के हूती कब्जे वाले हिस्सों पर बमबारी की थी. अब खाड़ी से तेल निकालने के लिए ट्रंप ने अपने विरोधी हूती गुट से ही हाथ मिला लिया है, लेकिन लोग इस शॉकिंग न्यूज के एक हिस्से को बिल्कुल नहीं समझ पा रहे हैं. हूती गुट ने समझौता तो अमेरिका के साथ किया, लेकिन साथ ही इजरायली जहाजों पर हमले न करने का भरोसा क्यों दे दिया? गाजा के नाम पर जिस इजरायल पर हूती लड़ाकों ने मिसाइलें दाग दी थीं, आज हूती उसी इजरायल की सुरक्षा की गारंटी क्यों दे रहे हैं?
इजरायल पर नरमी: हूती की मेहरबानी या मोसाद का खौफ?
अमेरिका के साथ हुए समझौते में इजरायल की सुरक्षा का जिक्र हूती गुट की मेहरबानी है या मजबूरी? अब हम आपके सामने इसी सवाल का विश्लेषण करने जा रहे हैं.
अगर सामरिक और सैन्य दृष्टि से देखा जाए तो हूती लड़ाकों का समझौता मजबूरी ज्यादा नजर आता है. वर्ष 2025 में गाजा युद्ध के दौरान ईरान की तरह यमन में भी इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की मौजूदगी से जुड़ी खबरें सामने आई थीं. 28 अगस्त 2025 को तो मोसाद ने वह कर दिखाया था, जिसकी कल्पना न तो हूती गुट ने की थी और न ही उसके सरपरस्त ईरान ने.
मोसाद ने हूती गुट के कथित प्रधानमंत्री और उसके कमांडरों की मीटिंग की लोकेशन और वक्त पता कर लिया था. इस जानकारी के आधार पर ही ऑपरेशन लकी ड्रॉप शुरू किया गया था. ऑपरेशन में इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त बमबारी की थी. इस बमबारी में हूती गुट के सबसे बड़े नेता अहमद रहावी समेत 8 वरिष्ठ मंत्री और कमांडर मारे गए थे. मोसाद का यह इतिहास बताने के लिए काफी है कि हूती गुट के अंदर अब भी इजरायल का खौफ मौजूद है.
क्या इजरायल इस समझौते को मानेगा?
अमेरिका ने प्रस्ताव सामने रखा. हूती गुट ने इजरायल पर हमला न करने की भी शर्त मान ली, लेकिन यहां भी एक बड़ा सवाल खड़ा होता है. क्या इजरायल इस समझौते को मानेगा? रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते की मीटिंग में इजरायली प्रतिनिधि शामिल नहीं थे. अगर इजरायल राजी होता तो उसके प्रतिनिधि भी मुलाकात में जरूर आते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है. इसका सीधा मतलब है कि इजरायल ने संदेश दिया है कि यह जरूरी नहीं कि वह हर अमेरिकी समझौते का सम्मान करे. इजरायल की इस नीति के दो हालिया उदाहरण पूरी दुनिया के सामने हैं.
ट्रंप ने गाजा में सीजफायर के बाद कथित बोर्ड ऑफ पीस बना दिया था, इसके बावजूद इजरायल अब तक गाजा में अपने दुश्मनों का सफाया कर रहा है. दूसरी तरफ लेबनान से युद्धविराम के बावजूद... इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं. आज से एक हफ्ते पहले यानी 10 सितंबर को इजरायल ने लेबनान में अल-ताहिर पहाड़ियों को बमबारी करके धूल में मिला दिया है. अल-ताहिर पहाड़ियों में हिजबुल्लाह का सबसे बड़ा अड्डा था, लेकिन इजरायल ने युद्धविराम को ताक पर रखकर अपने सैन्य लक्ष्य को पूरा करके ही दम लिया.
इजरायल की सर्वोपरि नीति: क्या हूती पर रुकेगा वार?
यह दो उदाहरण बताते हैं कि इजरायल के लिए अपनी सुरक्षा ही सर्वोपरि नीति है. जब गाजा में ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस को इजरायल ने तरजीह नहीं दी, तो हूती गुट को बख्श देने की बात पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता है.