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DNA: धनतेरस पर आज की खरीदारी और सोना-चांदी, शेयर बाजार का विश्लेषण

धनतेरस पर जानिए सोना-चांदी की खरीदारी का शुभ मुहूर्त और आज के शेयर बाजार का विशेष विश्लेषण. बाजार के एक्सपर्ट्स की राय के साथ पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

DNA: धनतेरस पर आज की खरीदारी और सोना-चांदी, शेयर बाजार का विश्लेषण
Image Credit: DNA: धनतेरस पर बंपर खरीदारी या बाजार में सतर्कता? जानिए आज गोल्ड-सिल्वर रेट्स

DNA में जिस खबर के साथ आज हम विश्लेषण की शुरुआत कर रहे हैं..वो विश्लेषण से ज्यादा एक संवाद है. पारिवारिक संवाद. और ये पारिवारिक संवाद..धनतेरस पर आपकी खरीदारी से जुड़ा है. आपके खरीदे सोने-चांदी के एक सिक्के ने कैसे भारतीय अर्थव्यवस्था की चांदी कर दी. यही हमारे संवाद का विषय है. आज जब दुनिया भर के बाजार..तेजी से गिर रहे थे तो भारत का शेयर बाजार क्यों बढ़ रहा था. इसे आपको किस तरह देखना चाहिए..आगे क्या उम्मीद रखनी चाहिए. इसपर भी हम बात करेंगे. आपमें से ज्यादातर लोगों को..दिवाली गिफ्ट भी मिल गया होगा. इस बार, सबसे महंगा दिवाली गिफ्ट किसने दिया और किन्हें मिला. दिवाली पर उपहार देने की परंपरा कहां से शुरू हुई..इसकी भी चर्चा होगी. लेकिन शुरुआत करते हैं धनतेरस पर आज के पहले शुभ समाचार से. देश के शेयर बाजार में आज जबरदस्त तेजी रही.

सेंसेक्स में आज 1700 से ज्यादा अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई. सेंसेक्स आज 81 हजार के पार पहुंच गया है. इतना ही नहीं, निफ्टी ने भी 25 हजार अंक का आंकड़ा पार कर लिया. शेयर बाजार में तेजी से निवेशकों की संपत्ति आज डेढ लाख करोड़ रुपये बढ़ी. पिछले 7 कारोबारी सेशन के दौरान सेंसेक्स में 7,700 प्वाइंट से ज़्यादा की बढ़त दर्ज की गई है. कल भी सेंसेक्स में 2000 से ज्यादा अंकों की तेजी आई थी. गुरुवार को विदेशी खरीदारों ने भारतीय शेयर बाजार में 15 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया. ये पिछले छह वर्षों में विदेशी निवेशकों द्वारा, एक दिन के अंदर लगाई गई सबसे बड़ी रकम है. 9 महीनों के बाद शेयर बाजार दोबारा उच्च स्तर पर पहुंच गया है. इससे पहले मार्च 2026 में शेयर मार्केट 80 हजार अंकों के पार पहुंचा था. यहां आपको ये भी जानना चाहिए कि पिछले 10 सालों में, अंकों के लिहाज से धनतेरस के दिन ये सबसे बड़ा उछाल है.

अमेरिका मिड टर्म चुनाव के बाद शेयरों में उछाल

गौर करने वाली बात ये है, कि भारतीय शेयर बाजार उस वक्त ऊपर चढ़ा है..जब दुनिया के सभी बड़े बाजार को नुकसान उठाना पड़ा. अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में गिरावट की शुरुआत अमेरिका से हुई थी. भारतीय शेयर बाजार की उपलब्धि को बेहतर तरीके से समझने के लिए, आपको अमेरिकी शेयर बाजार की हालिया गतिविधियां और हालत देखनी और समझनी चाहिए. अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजे आने के बाद यानी 5 नवंबर को...अमेरिकी शेयर बाजार को एक ही दिन में 2 लाख 35 हजार 387 अरब रुपए का नुकसान हुआ. ये आंकड़ा दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था का करीब 2 प्रतिशत है. इतना ही नहीं, अमेरिकी शेयर बाजार में ये पिछले 19 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट है. बाजार को हुए नुकसान से सबसे ज्यादा वो कंपनियां प्रभावित हुई हैं, जो AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी हैं . चुनावी नतीजे आने के दो दिनों के अंदर, ट्रंप की कंपनी के शेयर तकरीबन 36 प्रतिशत नीचे आ गए हैं . गुरुवार को एक समय ट्रंप मीडिया के शेयर अपने सबसे निचले स्तर पर थे, ट्रंप की कंपनी का एक शेयर 357 रुपए तक पहुंच गया था .

अचानक गिरे एआई की वजह से इजाफा होने वाले बाजारों के शेयर

अमेरिका के AI स्टॉक्स में गिरावट का असर, दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ता नजर आया . जिन बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से इजाफा हो रहा था, वो अचानक बुरी तरह गिर गए.  दक्षिण कोरिया के स्टॉक मार्केट में 5.28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई . जापान का निकी तकरीबन 2 प्रतिशत नीचे बंद हुआ . ताइवान के शेयर बाजार में तो 8 प्रतिशत तक की गिरावट आई . इतना ही नहीं, AI का किंग कहे जाने वाले चीन के बाजार में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयर 4 से 5 प्रतिशत नीचे बंद हुए .

दुनिया के शेयर टूट रहे थे और भारतीय शेयर बाजार मजबूती की बढ़ा

जब पूरी दुनिया के शेयर बाजार टूट रहे थे, तब भारत का शेयर बाजार मजबूती के साथ नए मील के पत्थर स्थापित कर रहा था...अब आप ही बताइए, है ना ये धन से जुड़ा शुभ समाचार . मित्रो धनतेरस पर सभी अपनी क्षमता के हिसाब से सोना या फिर चांदी खरीदने की कोशिश करते हैं, तो हमारे इस धन विश्लेषण में अब हम सोने और चांदी की ही बात करेंगे . आपको भी धन से जुड़े इस दूसरे शुभ समाचार को ध्यान से देखना और समझना चाहिए.

एक लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार

CAIT यानी कॉन्फेडेरेशन ऑफ इंडिया ट्रेडर्स का अनुमान..धनतेरस पर देशभर में 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा कारोबार का है. इसमें से 60 हजार करोड़ रुपए की बिक्री, सोने और चांदी से हो सकती है. पिछले साल भी धनतेरस पर इतनी ही वैल्यू का सोना और चांदी खरीदा गया था . ये तथ्य बताता है कि अस्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था के बावजूद, भारत में सोने और चांदी की बिक्री कम नहीं हुई है.  आज धनतेरस के दिन, सर्राफा बाजार में सोने का भाव 1 लाख 41 हजार पर है . ये पिछले 10 सालों में धनतेरस के दिन सोने का सबसे ज्यादा भाव है . इस बार बाजार में दिवाली सप्ताह के दौरान सोने और चांदी की चमक कितनी और किस वजह से बढ़ी है, ये भी आपको समझना चाहिए.

हालांकि इस तस्वीर का एक और पहलू भी है . आज सोने के दाम तकरीबन ढाई हजार रुपए नीचे आए हैं . इसकी वजह कच्चे तेल के बढ़ते दाम और मजबूत अमेरिकी डॉलर को माना जा रहा है, लेकिन बाजार के जानकार ये भी मान रहे हैं...कि जिस स्तर पर सोना और चांदी इस वक्त खड़े हैं, वो एक सपोर्ट है . इसका मतलब है कि जल्द सोने और चांदी के दाम में ज्यादा बदलाव नहीं होने वाला है . ये भी उन लोगों के लिए अच्छी खबर है, जिन्होंने सोने या चांदी में निवेश किया है, या फिर करना चाहते हैं . अगर दाम स्थिर रहते हैं, तो बाजार का मूड भी स्थिर रहता है...जो निवेशक के अंदर घबराहट नहीं पैदा करता . धनतेरस और दिवाली जैसे अवसर पर सोना-चांदी के बाद जिस सेक्टर में सबसे ज्यादा खरीदारी दिखती है वो है ऑटोमोबाइल सेक्टर. यानी गाड़ियों की खरीद. इस साल, त्योहार के सीजन में गाड़ियों की बिक्री बढ़ी है .


FADA य़ानी फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, त्योहार का सीजन शुरु होने से पहले ही गाड़ियों की बिक्री बढ़ गई. अक्टूबर के महीने में देश भर के अंदर, सवा पांच लाख से ज्यादा गाड़ियां खरीदी गई हैं . देश के इतिहास में ये पहली बार है, जब एक महीने के अंदर 5 लाख से ज्यादा गाड़ियों की बिक्री हुई. 51 प्रतिशत कार डीलर्स ये मानते हैं, कि नवंबर खत्म होते होते गाड़ियों की बिक्री का ये आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है . एक अनुमान के मुताबिक धनतेरस के दिन देशभर में 1 लाख पैसेंजर व्हीकल्स की डिलीवरी की उम्मीद है . दिवाली पर एक और बड़ा बाजार..गिफ्ट का होता है. यानी वो तोहफे या भेंट जो हम अपने करीबियों को देते हैं. इस बाजार से आपमें से शायद हर परिवार किसी ना किसी तरह से जुड़ा है. मित्रों, समय के साथ गिफ्ट्स का ये बाजार भी काफी बदला है. उपहार देना..मंगल कामना का प्रतीक माना जाता है. एक जमाने में लोग कपड़े और आभूषण देते थे, आज कपड़े और गहने के साथ..गिफ्ट्स की लिस्ट में कई अलग वैरायटीज भी जुड़ गई हैं. इसमें सोनपापड़ी और काजू कतली जैसी मिठाइयां भी हैं और महंगी गाड़ियां भी.

कुछ कर्मचारियों को गिफ्ट में कार तक मिली

आप जानकर हैरान हो जाएंगे, कि इस साल हरियाणा की एक कंपनी ने, अपने कर्मचारियों को गिफ्ट में SUV कार तक दी हैं. एक सर्वे के अनुसार, त्योहार के सीजन में 10 प्रतिशत लोग गिफ्ट में सोने, चांदी के सामान देते हैं . 5 प्रतिशत लोग मिठाई और नमकीन देते हैं . 3 प्रतिशत लोग फल या ड्राई फ्रूट देना पसंद करते हैं . 3 प्रतिशत लोग कंफेक्शनरी के आइटम गिफ्ट करते हैं . 5 प्रतिशत लोग होम डेकोर से जुड़ा सामान देते हैं . इनके साथ, गोर्मे फूड यानी प्रीमियम क्वालिटी के खाद्य उत्पाद भी आजकल ट्रेंडिंग गिफ्ट्स का हिस्सा बने हुए हैं. क्या इस लिस्ट में वो गिफ्ट भी शामिल हैं, जो आपने त्योहारों के सीज़न के लिए चुने हैं...या फिर आपकी पसंद कुछ और है. ZEE NEWS के सोशल मीडिया पेज पर जाकर हमें जरूर बताइएगा. इन दिनों एक शब्द बहुत प्रचलन में है. ये शब्द है GEN-Z यानी वो लोग, जिनका जन्म वर्ष 1997 से लेकर 2012 के बीच हुआ है. GEN-Z किस तरह अपने गिफ्ट डिसाइड करता है, किसे गिफ्ट देता है. ये भी बड़ा दिलचस्प है.

एआई की सलाह पर गिफ्ट खरीद रहे जेन जी

एक सर्वे के मुताबिक 25 प्रतिशत GEN-Z, AI की सलाह लेकर गिफ्ट खरीदते हैं . 74 प्रतिशत युवा अपने माता-पिता को गिफ्ट देना पसंद करते हैं . 30 प्रतिशत ऐसे हैं जो सेल्फ गिफ्टिंग करते हैं, यानी ये लोग खुद को ही तोहफा दे देते हैं. GEN-Z के गिफ्टिंग पैटर्न की सबसे खास बात ये है कि तोहफों के लिए ये ब्रैंड कॉन्शियस होते हैं. यानी गिफ्ट के लिए GEN-Z ऐसे उत्पाद खरीदते हैं जो बड़े ब्रांड्स के होते हैं. इस साल त्योहारों के सीजन में..42 हजार करोड़ रुपये के गिफ्ट बिकने का अनुमान है. ये दावा व्यापारियों के सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठन CAIT का है. इन 42 हजार करोड़ में से तकरीबन 17 हजार करोड़ रुपए का बाजार कॉरपोरेट गिफ्ट का है. यानी वो तोहफे जो कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए खरीदती हैं.

गिफ्ट के कारोबार में उछाल

सिर्फ राजधानी दिल्ली की बात करें तो इस सीजन में, उपहार के कारोबार में..बढ़त की उम्मीद जताई जा रही है. अब हम आपको, सनातन के दर्शन में उपहार का महत्व और इतिहास बताते हैं. इस जानकारी से आपको पता चलेगा, उपहार देना आज की नहीं, बल्कि भारत में सदियों पुरानी परंपरा है. प्राचीन भारत में दान की परंपरा थी. ऋषियों और ब्राह्मणों को राजा दान देते थे. समय के साथ दान की ये परंपरा राजा के दरबारों से बाहर निकलकर भेंट में बदल गई . खासकर गृहस्थ धर्म का पालन करने वाले लोगों के लिए, रिश्तेदारों और जानकारों को भेंट देना शुभ माना जाता था . शुभ कार्यों में मंगल कामना के लिए शगुन देना भी भेंट का एक स्वरूप माना गया था.

सबसे ज्यादा गिफ्ट में दी जा रही हैं ये मिठाइयां

अब हम, आपके लिए मिठाई वाले गिफ्ट का विश्लेषण करेंगे. मित्रो, दिवाली पर अभी भी सबसे ज्यादा दिये जाने वाले गिफ्ट में मिठाइयों का डब्बा..टॉप पर होता है. आपमें से बहुत से लोग हमारी इस बात से सहमत होंगे कि जब दिवाली पर मिठाई का जिक्र आता है तो हंसी का पात्र बन जाती है सोन-पापड़ी. ये वो मिठाई है जिसका एक दौर में बड़ा क्रेज था. बेसन, घी और शक्कर से बनी सोन-पापड़ी हर घर में नजर आती थी . सोन-पापड़ी की डिमांड बढ़ने की कुछ खास वजह भी थीं .चूंकि सोन-पापड़ी को बनाने में बेसन जैसा सामान लगता है तो ये मिठाई जेब के लिए मुफीद थी . सोन-पापड़ी आसानी से खराब नहीं होती है, ये भी एक वजह थी कि लोग इसे तोहफे में देते थे . चूंकि ये सूखी मिठाई है, तो एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में मिठाई का आकार भी खराब नहीं होता था . इसी वजह से सोन-पापड़ी सबकी फेवरेट बन गई थी . लेकिन दिवाली पर सोन-पापड़ी का ओवरडोज..धीरे-धीरे उपहास और हंसी-मजाक में बदल गया.

सोन पापड़ी की घटी मांग

हमारे समाज में ये मिठाई फिल्म के विलेन की तरह कुख्यात हो गई. लोगों को लगता था, कि घर में जो मिठाई का डिब्बा आया है, कहीं उसमें सोन-पापड़ी ना हो. कभी-कभी इतनी सोन-पापड़ी आती थी, कि लोग दूसरों को मिठाई देने के लिए, घर में आई सोन-पापड़ी का ही इस्तेमाल कर लेते थे. आज सोन-पापड़ी की मांग पहले से कम हुई है, लेकिन देवानंद साहब की तरह एक सदाबहार मिठाई है..जिसकी डिमांड आज भी वैसी ही है. ये मिठाई है काजू कतली. काजू, घी और चाशनी से बनी काजू कतली आज भी लोगों की फेवरेट है. काजू कतली..कैसे मिठाई के गिफ्ट मार्केट को डॉमिनेट कर रही है. ये समझने के लिए आपको DNA की ग्राउंड रिपोर्ट देखनी चाहिए . मित्रो त्योहारों का सीजन अभी शुरु ही हुआ है, आगे दिवाली है, गोवर्धन पूजा है और भाई दूज भी है. इस पूरे सीजन में हम त्योहारों से जुड़े शुभ समाचार आप तक लाते रहेंगे, और त्योहारों की खुशी को भी आपके साथ साझा करते रहेंगे .

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Ravindra Pratap Singh

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रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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