)
Canva का नाम तो आपने सुना ही होगा. मोबाइल पर पोस्टर बनाना हो, शादी का कार्ड तैयार करना हो या कोई डिजाइन बनाना हो, करोड़ों लोग इस कंपनी के टूल का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अब इसी कैनवा ने अपने 22 प्रतिशत कर्मचारियों को संकट में डाल दिया है. कंपनी ने करीब 1200 लोगों की नौकरी की भूमिका में बदलाव के संकेत दिए हैं. कुछ को दूसरे शहरों में जाने के लिए कहा जाएगा. कुछ को कंपनी से विदाई भी लेनी पड़ सकती है. यानी जिस कंपनी में ये लोग अपना भविष्य बना रहे थे, उस पर संकट के बादल नजर आ रहे हैं.
कैनवा की CEO मेलानी पर्किन्स ने कर्मचारियों को बताया कि कंपनी की तरक्की की रफ्तार एक दशक में पहली बार धीमी हुई है. इसलिए कंपनी अब अपने काम करने का तरीका बदलना चाहती है.
ये बदलाव क्या होंगे वो भी आपको जानना चाहिए. कैनवा के इस नए फैसले में अलग-अलग विभागों को मिलाया जा रहा है. बीच के प्रबंधन को हटाया या फिर घटाया जा रहा है. छोटी टीमों से ज्यादा काम लेने की तैयारी है. इसके साथ ही AI डिजाइन बनाने के पुराने तरीके को भी कंपनी ने बदलना शुरू कर दिया है. अब कई काम ऐसे AI टूल से हो रहे हैं, जिनके लिए पहले अलग-अलग लोगों की जरूरत पड़ती थी.
#DNAमित्रों | मेटा..केनवा..गूगल, दिवाली पर 'जॉब छोड़ो ऑफर' AI का दौर, कर्मचारियों पर भारी पड़ रहा है बड़ी-बड़ी कंपनियां.. नौकरी क्यों ले रही? #DNA #DNAWithRahulSinha #Google #Jobs #Layoffs #Employee @rahulsinhatv https://t.co/BEmarLboXs
— Zee News (@ZeeNews) November 6, 2026
ऐसा सिर्फ कैनवा में नहीं हो रहा. दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल गूगल भी अपने कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बदले पैकेज देने का विकल्प दे रहा है. कंपनी ने कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में कुछ कर्मचारियों को स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने के पैकेज दिए हैं. यानी कंपनी सीधे हर कर्मचारी को निकाल नहीं रही, लेकिन कर्मचारियों की संख्या और काम का ढांचा बदलना चाहती है. Microsoft ने भी करीब 60 हजार कर्मचारियों के लिए स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने का पैकेज पेश किया है.
इसी कड़ी में Facebook और Instagram की मालिक कंपनी Meta का नाम भी जुड़ गया है. फ्रांस में Meta के करीब 300 कर्मचारी काम करते हैं. फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी करीब 100 कर्मचारियों को अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ने का विकल्प दे रही है. यानी हर तीन में से एक कर्मचारी इस योजना के दायरे में आ सकता है. नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को कंपनी में बिताए हर एक साल के बदले करीब दो महीने से ज्यादा की सैलरी के बराबर मुआवजा देने का प्रस्ताव है. इसके अलावा 10 महीने तक छुट्टी के दौरान उनकी ग्रॉस सैलरी का 80 प्रतिशत देने की बात है. कंपनी नई स्किल सीखने और अपना कारोबार शुरू करने में भी मदद देगी. इसके लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 5 नवंबर थी. यानी Google, Microsoft और Meta जैसी कंपनियां कर्मचारियों की संख्या घटाने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रही हैं.
नौकरी पर रिसर्च करने वाली संस्था TrueUp के अनुसार, दुनिया भर की टेक कंपनियों में 2 लाख 4 हजार से ज्यादा कर्मचारियों पर छंटनी का असर पड़ा है. यानी औसतन हर दिन 660 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. इस छंटनी से नौकरी खोजने वालों की संख्या बढ़ रही है. नौकरी खोजने वालों की संख्या बढ़ने का मतलब है कि एक ही पद के लिए पहले से ज्यादा लोग दावेदार होंगे, यानी एक पद पर कहीं ज्यादा कड़ा मुकाबला होगा.
इसे ऐसे समझिए, मान लीजिए किसी कंपनी ने 100 कर्मचारियों को बाहर किया और वे सभी दूसरी नौकरियां खोजने लगे. तो वे उन पदों के लिए भी आवेदन करेंगे, जिन पर पहले से हजारों युवा कोशिश कर रहे हैं. यानी नौकरी की तलाश करने वालों की संख्या बढ़ेगी. एक नौकरी के लिए पहले से ज्यादा लोग मुकाबले में होंगे. ऐसे में नौकरी पाने में ज्यादा समय लग सकता है. कंपनियों के पास भी ज्यादा विकल्प होंगे, वो कम सैलरी देकर भी बेहतर प्रोफेशनल्स को नौकरी पर रख सकते हैं. नौकरी चाहने वालों की सौदेबाजी की ताकत घट सकती है. इसका असर तत्काल ये होता है कि नौकरी पाने की दौड़ कठिन जरूर हो जाती है, लेकिन ये संकट इससे कहीं बड़ा है.
जानते हैं इस संकट का असर कहां दिखेगा. नौकरी जाने पर सबसे पहले उस परिवार की आमदनी रुकती है. घर का किराया, बच्चों की फीस, कर्ज की किस्त और रोजमर्रा का खर्च तो चलता रहता है, लेकिन कमाई कम हो जाती है. इसलिए परिवार खरीदारी घटाता है, बाहर खाना-पीना बंद कर देता है और बड़ी चीजें खरीदने का फैसला भी टाल दिया जाता है और जब हजारों परिवार ऐसा करते हैं, तो दुकानों और छोटे कारोबारों की बिक्री भी घट जाती है. बिक्री घटेगी तो दुकानदार नई भर्ती रोक सकता है. किसी कंपनी का काम कम हुआ तो वह भी नए लोगों को नौकरी देने से बच सकती है. इस तरह टेक कंपनी में शुरू हुई छंटनी का असर दूसरी जगहों के रोजगार तक पहुंच सकता है. ये सारे प्रभाव फौरी तौर पर दिखाई नहीं देते, लेकिन लंबे समय तक नौकरी जाने और खर्च घटने का सिलसिला चलता रहे, तो संकट सोच से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है.
भारत में काम करने वाली कुछ आईटी कंपनियों से भी इसी तरह के मिलते-जुलते संकेत मिल रहे हैं. भारत की पांच बड़ी IT कंपनियों में वित्त वर्ष 2026 के दौरान कर्मचारियों की कुल संख्या में करीब 7 हजार की कमी आई है. जबकि इससे पिछले साल 2025 में इन कंपनियों में करीब 12 हजार 700 कर्मचारियों की बढ़ोतरी हुई थी. इसके अलावा भारत में नौकरी के ऑफर लेटर वापस लेने के मामले भी सामने आए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जुलाई में एक्सेंचर जैसी मल्टीनेशनल कंपनी ने कुछ नए उम्मीदवारों के नौकरी के ऑफर वापस ले लिए.
भारतीय मूल की आईटी कंपनी ने कुछ युवाओं की जॉइनिंग की तारीख आगे बढ़ा दी. बेंगलुरु के दो इंजीनियरिंग कॉलेजों के करीब 30 छात्रों के ऑफर वापस लिए जाने की बात सामने आई है. सोचिए, छात्र ने पढ़ाई पूरी की, नौकरी के लिए चयन हुआ, घर में खुशी मनाई गई और फिर कंपनी ने बता दिया कि अब वह पद ही नहीं रहा, लेकिन ऐसा नहीं है कि नौकरियां खत्म हो रही हैं तो नई नौकरियां नहीं आएंगी.
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम का अनुमान है कि साल 2030 तक दुनिया में 17 करोड़ नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं, जबकि करीब 9.2 करोड़ नौकरियां खत्म भी हो सकती हैं. यानी कुल मिलाकर करीब 7.8 करोड़ नई नौकरियों की बढ़ोतरी का अनुमान है, लेकिन यहां आपको ये समझना चाहिए कि नई नौकरियां पहले जैसी नहीं होंगी. नई नौकरियां मतलब बिल्कुल नई तरह की नौकरी, यानी जिस तरह के स्किल के साथ आप काम करते आ रहे थे, वैसी ये नई नौकरियां नहीं होंगी. AI, डेटा, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और दूसरे क्षेत्रों में नए अवसर बढ़ सकते हैं. इसलिए जो कर्मचारी आज अपना पुराना काम खो रहे हैं, उनके सामने नई चीजें सीखने की चुनौती भी है. सिर्फ डिग्री के भरोसे नौकरी मिलना अब पहले जितना आसान नहीं रह सकता.
Canva, Google, Microsoft और Meta के फैसले हमें एक बदलती हुई नौकरी की दुनिया दिखा रहे हैं. कहीं कर्मचारी को पैसे देकर विदा किया जा रहा है, कहीं उसके काम की जिम्मेदारी बदली जा रही है और कहीं नौकरी का ऑफर मिलने के बाद भी पद खत्म हो जा रहा है. कंपनियां अपने खर्च घटाना चाहती हैं और AI से काम तेज करना चाहती हैं. आने वाले समय में असली चुनौती यही होगी कि नई तकनीक से होने वाली तरक्की के साथ रोजगार के नए रास्ते भी बनें. पारंपरिक और पुराने रोल्स खत्म हो रहे हैं, लेकिन एआई, डेटा इंजीनियरिंग और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे नए क्षेत्रों में आज भी बेहतरीन प्रतिभाओं की भारी मांग है. जरूरत इस बात की है कि खुद को समय के साथ अपडेट रखा जाए, क्योंकि बदलाव ही इस दौर का सबसे बड़ा सच है.