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Delhi Property Tax: MCD ने दिल्ली में प्रॉपर्टी टैक्स के आकलन को बेहतर बनाने के लिए ड्रोन सर्वे शुरू किया. अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि दिल्ली नगर निगम (MCD) ने प्रॉपर्टी टैक्स के आकलन को बेहतर बनाने और ऐसी प्रॉपर्टीज की पहचान करने के लिए, जिनका आकलन नहीं हुआ है या कम हुआ है, दो वार्डों में ड्रोन-आधारित पायलट सर्वे शुरू किया है.
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस प्रक्रिया के पहले चरण में रोहिणी जो के रोहिणी F वार्ड और शाहदरा साउथ जोन के घरोली वार्ड में हवाई सर्वे किया जा रहा है. MCD का प्लान है कि प्रॉपर्टी का ज्यादा सटीक डेटाबेस बनाने के लिए ड्रोन इमेजिंग के साथ-साथ GIS, LiDAR-आधारित मैपिंग, जियो-टैगिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और 3D डिजिटल मॉडलिंग का इस्तेमाल किया जाए.
अधिकारियों ने कहा कि यह टेक्नोलॉजी गलत तरीके से मैप किए गए या डुप्लिकेट प्रॉपर्टी रिकॉर्ड की पहचान करने और ऐसे अतिरिक्त फ्लोर या निर्माण का पता लगाने में मदद करेगी जो मौजूदा रिकॉर्ड में नहीं दिख रहे हैं.
इससे नगर निकाय को घोषित और असल में बने हुए एरिया की तुलना करने में मदद मिलेगी और बने हुए एरिया, फ्लोर की संख्या और प्रॉपर्टी के इस्तेमाल जैसे कारकों के आधार पर आकलन करना आसान हो जाएगा.
इस इंटीग्रेटेड सिस्टम से मैन्युअल जांच पर निर्भरता कम होने और MCD को वार्ड- और जोन-लेवल डैशबोर्ड के जरिए गड़बड़ियों पर नजर रखने, नोटिस जारी करने और बकाया राशि व टैक्स वसूली को ट्रैक करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
निवासियों के लिए, इस प्रक्रिया से प्रॉपर्टी रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ने, अधिकारियों के साथ आमने-सामने की बातचीत कम होने और GIS-आधारित सिस्टम के जरिए शिकायतों का तेजी से समाधान होने की उम्मीद है.
MCD ने कहा कि ड्रोन सर्वे एक तकनीकी मैपिंग और वेरिफिकेशन प्रक्रिया है और इससे मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल लागू नियमों के अनुसार आकलन और प्रशासनिक कामों के लिए किया जाएगा.