CEC के खिलाफ प्रोटेस्ट: दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास पिछले 3 दिनों में क्या-क्या हुआ?
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में 2, 3 और 4 अक्टूबर को प्रदर्शन हुए. आइसा, विपक्षी दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की. रविवार को इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक 'सिटिजन्स मार्च' भी निकाला गया.
दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर चर्चा में बना है. हुआ यह कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में लगातार तीन दिन प्रदर्शन हुए. ये प्रदर्शन शुक्रवार को गांधी जयंती 2 अक्टूबर से शुरू हुआ. फिर विरोध प्रदर्शन शनिवार और रविवार को भी जारी रहा. विपक्षी दलों, आइसा, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की. पुलिस ने किसी भी प्रदर्शनकारी को प्रदर्शन स्थल तक तो नहीं पहुंचने दिया. मगर जंतर-मंतर के आसपास इन तीनों दिन काफी हलचल रही.
असल में इन तीन दिनों में पुलिस ने कई नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. इस दौरान कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई.
शुक्रवार यानी 2 अक्टूबर को कुछ विपक्षी दलों और आइसा ने प्रदर्शन का आह्वान किया था.
आइसा और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी लेकिन पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी. इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश करते रहे. पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया और कई लोगों को हिरासत में ले लिया.
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी थी. प्रदर्शन स्थल की ओर जाने वाले रास्तों पर तीन स्तर की बैरिकेडिंग की गई थी. पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई थी. दिल्ली मेट्रो ने भी 10 से ज्यादा मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया था. इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अलग-अलग रास्तों से जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश करते रहे. मगर किसी को भी निर्धारित प्रदर्शन स्थल तक जाने की अनुमति नहीं दी गई.
पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने और प्रतिबंधों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका. इस दौरान जंतर-मंतर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे. यानी जिस जगह पर प्रदर्शन होना था, वहां तक पहुंचने से पहले ही प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया.
खास बात यह रही कि इसी बीच चुनाव आयोग ने शुक्रवार सुबह को ही एक्स पर एक पोस्ट के जरिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर में छूटे हुए नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का ऐलान किया. आयोग ने मतदाता सूची के सत्यापन, छूटे मतदाताओं की पहचान और फॉर्म 6 भरवाने के निर्देश दिए. आयोग के मुताबिक इस अभियान के तहत बीएलओ घर-घर पहुंचेंगे, युवा मतदाताओं पर ध्यान दिया जाएगा और बूथ स्तर पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे.
अगले दिन शनिवार को भी प्रदर्शन का सिलसिला नहीं रुका.
2 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद आइसा की ओर से शनिवार को भी जंतर-मंतर पहुंचने की कॉल दी गई थी. कई सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र संगठनों से जुड़े लोग जंतर-मंतर की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें केरल हाउस के पास ही रोक दिया. प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर के अंदर प्रवेश नहीं कर सके. मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल मौजूद रहे.
शनिवार को हिरासत में लिए गए लोगों में आइसा कार्यकर्ताओं के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी शामिल थे. आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया. पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने और BNSS के तहत धारा 163 लागू होने का हवाला दिया. प्रदर्शनकारियों के जंतर-मंतर की ओर बढ़ने पर उन्हें रोका गया और कई लोगों को बसों में बैठाकर मौके से हटाया गया.
रोकने के दौरान कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी. कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की. सामने आए विजुअल्स में एक बैरिकेड को उठाकर फेंकते हुए भी देखा गया. पुलिस की कोशिश थी कि प्रदर्शनकारी प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न कर सकें और जंतर-मंतर के निर्धारित प्रदर्शन स्थल तक न पहुंचें.
रविवार को प्रदर्शन का तरीका थोड़ा अलग रहा.
आम लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक 'सिटिजन्स मार्च' निकाला. इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. हालांकि जंतर-मंतर की तरफ बढ़ते समय पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को फिर रोक दिया. आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया. नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि जिस गाड़ी में पुलिस उन्हें ले गई, उसमें एक भी महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी.
रविवार को ही आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में इंडिया गेट इलाके में पहुंचे. आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को भी पुलिस ने हिरासत में लिया. सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि 'सिटिजन्स मार्च' के दौरान जंतर-मंतर की ओर जाते हुए उन्हें जबरन हिरासत में लिया गया. उन्होंने कहा कि यह केवल एक दिन का प्रतीकात्मक विरोध नहीं है. रविवार शाम को यूथ कांग्रेस ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मार्च निकालकर प्रदर्शन किया.
इस्तीफे की मांग क्यों?
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट का हवाला दे रहे हैं. रिपोर्ट में दावा है कि एसआईआर अभियान के दौरान चुनाव आयुक्तों को कई फैसलों की जानकारी नहीं दी गई थी. इसी बीच सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है.
फिलहाल विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जारी रखी है. प्रोटेस्ट के इस पूरे घटनाक्रम में लगातार तीन दिन तक प्रदर्शन की कोशिशों के बावजूद कोई भी प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर के निर्धारित प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुंच सका. पुलिस ने पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी थी. तीन स्तर की बैरिकेडिंग, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती और BNSS के तहत धारा 163 लागू होने के कारण प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया.