जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) के 1,500 से ज्यादा टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ ने JMI के वाइस-चांसलर प्रो. मजहर आसिफ और JMI के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी के साथ शनिवार को यूनिवर्सिटी के अंसारी ऑडिटोरियम लॉन में आगे के रास्ते पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की. यह बैठक चार राउंड की बातचीत और कल रात कमेटी की तरफ से स्टूडेंट्स से अपने प्रोटेस्ट वापस लेने की अपील के बाद हुई.
यह बैठक एक अहम डेवलपमेंट के तौर पर हुई है, जब 18 अक्टूबर को बनी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों की सात मेंबर वाली हाई-लेवल कमेटी जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) के चुनाव के लिए प्रोटेस्ट कर रहे छात्रओं के साथ मीडिएट करने की हफ्ते भर से कोशिश कर रही थी.
106 साल की विरासत वाले इंस्टीट्यूशन की इज्जत को नुकसान
कैंपस की दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखने और तोड़-फोड़ की घटनाओं पर निराशा जताते हुए JMI फैकल्टी मेंबर्स और स्टाफ ने कहा कि इस तरह की हरकतों से एकेडमिक माहौल और 106 साल की शानदार विरासत वाले इंस्टीट्यूशन की इज्जत को नुकसान पहुंचा है. इसमें कहा गया कि इकट्ठा हुए लोगों ने एकमत से दो प्रस्ताव पास किए गए. पहला, कर्मचारियों ने प्रदर्शनकारियों से प्रोटेस्ट साइट खाली करने और कैंपस में शांति और नॉर्मल हालात बहाल करने के लिए अपना आंदोलन खत्म करने की अपील करने का फैसला किया, खासकर गालिब स्टैच्यू लॉन में, जिस पर प्रोटेस्ट कर रहे छात्रों ने गैर-कानूनी तरीके से कब्जा कर लिया था, जबकि JMI में गेट नंबर 18 प्रोटेस्ट साइट के तौर पर तय था.
दूसरा, फैकल्टी और स्टाफ ने खराब दीवारों को फिर से पेंट करने और उन नारों को ढकने का फैसला किया, जिन्हें उन्होंने बहुत निंदनीय और देश की एकता, सुरक्षा और संप्रभुता के लिए नुकसानदायक बताया.
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे नारे JMI की रेप्युटेशन और रुतबे को हमेशा के लिए और ऐसा नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिसे ठीक नहीं किया जा सकता.
'यूनिवर्सिटी को बंधक नहीं बनने दे सकते'
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक ऐतिहासिक संस्था की रेप्युटेशन को कुछ लोगों के कामों से खतरे में नहीं डालना चाहिए, खासकर तब जब इसके नतीजे यूनिवर्सिटी की बड़ी कम्युनिटी पर असर डाल सकते हैं. JMI को दशकों तक सेवा देने वाले मुख्य स्टेकहोल्डर्स के तौर पर टीचर्स ने कहा कि वे यूनिवर्सिटी को बंधक नहीं बनने दे सकते. उन्होंने सोशल मीडिया पर स्टूडेंट्स द्वारा फैलाई जा रही झूठी बातों और गलत जानकारी पर भी हैरानी और नाराजगी जताई, जिससे इंस्टीट्यूशन और उसकी रेप्युटेशन को नुकसान हो सकता है.
JMI की इमेज को नुकसान पहुंचने से छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है असर
JMI के वाइस-चांसलर प्रो. मजहर आसिर और JMI के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि यूनिवर्सिटी की प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाना और देश की एकता और संप्रभुता को खतरा पहुंचाने वाले आपत्तिजनक नारे लिखना JMI की इमेज को नुकसान पहुंचा सकता है और इसके स्टूडेंट्स की क्रेडिबिलिटी पर बुरा असर डाल सकता है, जिससे भविष्य में नौकरी और प्लेसमेंट की संभावनाओं के साथ-साथ स्टूडेंट्स के हायर एजुकेशन के मौकों पर भी असर पड़ सकता है.
मीटिंग को संबोधित करते हुए हाई-लेवल कमेटी के सदस्यों ने कहा कि दो दशक पुराने मुद्दे को सुलझाने के लिए यूनिवर्सिटी की तेज कोशिशों के बावजूद विरोध करने वाले स्टूडेंट्स शांत नहीं हुए हैं.
JMISU के कॉन्स्टिट्यूशन ड्राफ्ट कमेटी बनाने का नोटिफिकेशन जारी
JMI स्टूडेंट्स यूनियन को 2006 में हिंसक झड़पों, टीचरों पर हमलों और कभी-कभी क्लास में रुकावट की बार-बार होने वाली घटनाओं के बाद सस्पेंड कर दिया गया था. कमिटी ने कहा कि मौजूदा एडमिनिस्ट्रेशन ने 21 अक्टूबर 2026 को JMISU कॉन्स्टिट्यूशन ड्राफ्ट कमिटी बनाने का नोटिफिकेशन तुरंत दे दिया था, यह एक ऐसी पहल थी, जिसे 2006 के बाद से किसी वाइस-चांसलर या रजिस्ट्रार ने नहीं किया था.
छात्रों ने प्रशासन के साथ मिलकर हल निकालने इच्छा नहीं जताई
इस कदम के बावजूद भूख हड़ताल पर बैठे स्टूडेंट्स ने एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मिलकर कोई आपसी सहमति से हल निकालने की कोई इच्छा नहीं दिखाई.
कमेटी के सदस्यों ने दोहराया कि प्रोटेस्ट करने वालों तक पहुंचने की अपनी लगातार कोशिशों के साथ-साथ यूनिवर्सिटी ने 21 अक्टूबर को एक और नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि 12.10.26 से 21.10.26 की शाम 5:30 बजे तक प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स के खिलाफ की गई या शुरू की गई सभी डिसिप्लिनरी कार्रवाई का रिव्यू किया जाएगा.
हालांकि, इससे भी प्रोटेस्ट करने वाले स्टूडेंट्स बातचीत की टेबल पर नहीं आ पाए. इसके बजाय यह देखा गया कि स्टूडेंट्स अड़े रहे और लोकल, रीजनल और नेशनल पॉलिटिकल पार्टियों और ग्रुप्स के नेताओं और रिप्रेजेंटेटिव्स को बुलाकर टेंशन बढ़ा दी.
छात्रों से प्रदर्शन खत्म करने की अपील
टीचर्स ने चिंता जताई कि इन घटनाओं से कैंपस का माहौल और खराब हो सकता है और अराजकता, गुंडागर्दी, तोड़-फोड़ और यूनिवर्सिटी की दीवारों को और नुकसान पहुंच सकता है. दोनों प्रस्तावों को एकमत से पास करने के बाद JMI के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ ने अंसारी ऑडिटोरियम लॉन से मार्च निकाला, गेट नंबर 13 से होते हुए मेन रोड पार करके गेट नंबर 7 पर पहुंचे. फिर वे स्टूडेंट्स से बात करने और उन्हें प्रोटेस्ट खत्म करने के लिए मनाने के लिए प्रोटेस्ट साइट पर गए.
'वापस जाओ' के नारे, स्टाफ और टीचर्स को दिया धक्का
स्टूडेंट्स को प्रोटेस्ट खत्म करने और कैंपस में नॉर्मल माहौल बहाल करने के लिए मनाने की दो घंटे की कोशिशों के बाद भी स्टूडेंट्स नारे लगाते रहे, चिल्लाते रहे कि फैकल्टी को 'वापस जाओ' और अचानक सिक्योरिटी गार्ड्स, स्टाफ और टीचर्स को धक्का देना शुरू कर दिया, सीनियर फैकल्टी मेंबर्स की बार-बार की अपील पर भी ध्यान नहीं दिया, जबकि इस हफ्ते की शुरुआत में उनकी मांगें मान ली गई थीं. आखिरकार, टीचर्स और स्टाफ प्रोटेस्ट साइट से हट गए और अंसारी ऑडिटोरियम लौट आए.
JMI में ऑनलाइन होगी सभी कोर्स की क्लास
दिन भर के घटनाक्रम को देखते हुए एडमिनिस्ट्रेशन को एक नोटिफिकेशन जारी करना पड़ा, जिसमें घोषणा की गई कि सभी कोर्स की क्लासें तुरंत ऑनलाइन होंगी.
यह फैसला मौजूदा हालात को देखते हुए और यूनिवर्सिटी के असली स्टूडेंट्स की सेफ्टी और सिक्योरिटी पक्का करने के लिए लिया गया था. सभी स्टूडेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने ऑनलाइन क्लास शेड्यूल को फॉलो करें और कैंपस आने से बचें, क्योंकि जब तक ऑनलाइन क्लास चल रही हैं और यूनिवर्सिटी से अगला नोटिफिकेशन नहीं आता, JMI के गेट और लाइब्रेरी बंद रहेंगे.
(Input: ANI)