दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रों का प्रदर्शन जारी है. यूनिवर्सिटी कैंपस की दीवारों पर फ्री कश्मीर, फ्री शरजील इमाम जैसे नारे लिखे मिले हैं. इन नारों के सामने आने के बाद कैंपस का माहौल गरम हो गया. वहीं JMI की उच्च-स्तरीय समिति ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से अपना आंदोलन वापस लेने की अपील की है. समिति का कहना है कि संविधान के बिना छात्र संघ चुनावों की तारीखों की घोषणा नहीं की जा सकती. समिति ने बताया कि एक ड्राफ्ट समिति गठित कर दी गई है. साथ ही समिति ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा करने की भी सिफारिश की है. इसके अलावा सुरक्षाकर्मियों को छात्रों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया गया है.
वहीं VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि जामिया को देशद्रोह का अड्डा बनाया जा रहा है. शरजील इमाम जैसे देशविरोधी और कट्टरपंथी विचारधारा वाले व्यक्ति के समर्थन में नारे लगाए जा रहे हैं. कश्मीर को आजाद करने की मांग की जा रही है. आखिर ये सब क्या हो रहा है? कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप्पी क्यों साधे हुए है? ऐसे देशद्रोही विचारों का लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं होना चाहिए. कांग्रेस के कई नेता ऐसे लोगों को संरक्षण देते हैं. कांग्रेस अब झूठ फैलाने वालों का गिरोह बन गई है. कांग्रेस को दूसरों को ज्ञान देने से पहले अपने आचरण पर ध्यान देना चाहिए. कांग्रेस हमेशा से हिंदुओं के साथ अन्याय करती आई है.
मुस्लिम धर्मगुरु साजिद रशीदी ने नेहा बोरा और अभिजीत दीपके पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ‘फ्री शरजील इमाम’ और ‘आजाद कश्मीर’ के नारे क्यों लिखे गए हैं? इसके पीछे इनकी क्या मंशा है? स्टूडेंट्स के प्रोटेस्ट में ये नारे किसने जोड़ दिए हैं? इसकी जांच होना बहुत जरूरी है. हम मुसलमान ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं. हम तो Wait & Watch करके चल रहे हैं
कैंपस के अंदर विवादित स्लोगन लिखे जाने को लेकर छात्रों का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने स्लोगन लिखकर आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की है. पिछले 20 साल से छात्रसंघ के चुनाव नहीं हुए हैं. इसी मांग को लेकर छात्र पिछले 14 दिनों से धरने पर बैठे हैं. छात्रों का आरोप है कि जामिया प्रशासन ने उनकी मदद करने के बजाय उन्हें धरने से हटाने की कोशिश की है. उन्होंने साफ किया कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. कैंपस की दीवारों पर लिखे नारों को लेकर छात्रों ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि ये नारे किसने लिखे हैं.