SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

Delhi राशन घोटाले में AAP का बड़ा आरोप, मनजिंदर सिंह सिरसा को भी CBI जांच के दायरे में लाने की मांग

दिल्ली में कथित राशन घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी ने सीबीआई से कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की भूमिका की जांच करने और उन्हें एफआईआर में शामिल करने की मांग की है. सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि 31 हजार मीट्रिक टन सब्सिडी वाले चावल की खरीद और हरियाणा में बिक्री से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ.

Written By Renu Akarniya
Published: Oct 15, 2026, 04:26 PM IST | Updated: Oct 15, 2026, 04:35 PM IST
Image Credit: AAP Website
Join

Delhi News: दिल्ली के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में एक बड़े राशन घोटाले का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मामले में बड़ा बयान देते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से मांग की है कि जांच का दायरा बढ़ाकर कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को भी इसमें शामिल किया जाए. पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सीबीआई को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है.

दरअसल, यह मामला दिल्ली के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा बाहरी राज्य की एक पीएसयू (सार्वजनिक उपक्रम) से राशन खरीदने से जुड़ा है. आरोप है कि बाजार में खुली निविदाएं (ई-टेंडर) न लगाकर, प्रशासनिक आदेशों के जरिए अवैध तरीके से 31,000 मीट्रिक टन चावल की खरीद की गई. यह चावल 23.20 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी सब्सिडी दर पर मंगाया गया, जबकि बाजार में इसकी कीमत लगभग 46 रुपये प्रति किलोग्राम थी.

आरोप है कि इस राशन को दिल्ली के जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के बजाय निजी चैनल पार्टनर्स जैसे मैसर्स उत्पलाक्षी एग्रो प्रोडक्ट्स, मैसर्स दिबेश कॉमर्शियल्स और मैसर्स सुपर ग्रेन्स के जरिए हरियाणा की कमर्शियल इकाइयों में बेच दिया गया. इससे सरकारी खजाने को हर हफ्ते 13.67 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ. पूरे 22 हफ्तों तक चले इस घोटाले में सैकड़ों करोड़ रुपये का काला धंधा किया गया. सौरभ भारद्वाज ने सीबीआई को लिखे पत्र में कहा कि जांच एजेंसी ने अब तक केवल मंत्रालय के मध्य-स्तरीय अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, जबकि असली साजिश के मास्टरमाइंड को बचाया जा रहा है.

उन्होंने तर्क दिया कि अगर एक अधीनस्थ अधिकारी (अरुण कुमार झा) को केवल आदेश लागू करने के लिए निलंबित किया जा सकता है तो वह कैबिनेट मंत्री कैसे बच सकते हैं, जिन्होंने खुद इन अवैध आदेशों को जन्म दिया. पत्र में कहा गया है कि यह घोटाला पूरी सोच-समझकर अंजाम दिया गया. 7 जनवरी 2026 को जब अनुरोध आया तो मंत्री ने इसे महीनों तक लंबित रखा और 8 अप्रैल 2026 को सीधे तौर पर अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस अवैध प्रस्ताव पर 'सकारात्मक विचार' किया जाए.

इसी आदेश के बाद 4 मई 2026 को दूसरी बार इतनी ही मात्रा में राशन आवंटित कर दिया गया, जबकि पहली खेप का कोई हिसाब-किताब या यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (यूसी) तक जमा नहीं कराया गया. आप नेता ने सीबीआई से कार्रवाई करने की मांग की है. पहली मांग है कि मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की भूमिका की जांच करना और एफआईआर (आरसी 2182026ए0014) में उन्हें औपचारिक रूप से शामिल किया जाए. दूसरी मांग है कि मंत्रालय के सभी आधिकारिक रिकॉर्ड, रूटिंग लॉग, ईमेल और डिजिटल सबूत तत्काल जब्त किए जाएं, ताकि सबूतों से छेड़छाड़ न हो सके. तीसरी मांग है कि निलंबित अधिकारी के कबूलनामे के आधार पर सभी शामिल लोगों के बयान दर्ज हों और काले धन की तार को ट्रेस किया जाए. गौरतलब है कि इस मामले में सीबीआई पहले ही प्रारंभिक जांच शुरू कर चुकी है और बड़े पैमाने पर फंड डायवर्जन की पुष्टि कर चुकी है.

ये भी पढ़ें: जामिया में कोई भूख हड़ताल पर तो कोई नींद हड़ताल पर, आखिर क्या है छात्रों की मांग?

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES