दिल्ली में छठ की तैयारी तेज, लेकिन यमुना की गंदगी ने बढ़ाई श्रद्धालुओं की चिंता
छठ महापर्व को लेकर दिल्ली सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं. राजधानी में करीब 1400 छठ घाट तैयार किए जा रहे हैं. घाटों की साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं पर काम चल रहा है. हालांकि, उत्तरी दिल्ली के वजीराबाद स्थित सूर घाट के पास यमुना की हालत चिंता बढ़ा रही है. यहां नजफगढ़ नाले का गंदा पानी यमुना में गिर रहा है.
राजधानी दिल्ली में छठ महापर्व को लेकर दिल्ली सरकार तैयारियों में जुट गई है. लेकिन सवाल ये है कि जिस यमुना नदी में हजारों श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना करते हैं, वह यमुना छठ पूजा के लिए कितनी तैयार है? उत्तरी दिल्ली के वजीराबाद स्थित सूर घाट के पास यमुना में गिरने वाला नजफगढ़ नाला नदी को प्रदूषित कर रहा है. ऐसे में श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ गई है.
किए जा रहे 1400 घाट तैयार
उत्तरी दिल्ली के वजीराबाद स्थित सूर घाट के पास छठ महापर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यमुना किनारे पहुंचकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं. दिल्ली सरकार की तरफ से राजधानी में करीब 1400 छठ घाट तैयार किए जा रहे हैं. घाटों की साफ-सफाई और व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित विभाग सक्रिय हैं, लेकिन यमुना की हालत एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है.
कहां मिलता है यमुना का नाला?
दरअसल, वजीराबाद यमुना सूर घाट के पास ही नजफगढ़ नाला यमुना नदी में आकर मिलता है. इस नाले के जरिए दिल्ली के अलग-अलग इलाकों का गंदा पानी यमुना में पहुंचता है. नाले से आने वाले प्रदूषित पानी की वजह से यमुना की स्वच्छता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में छठ पूजा के दौरान श्रद्धालु आखिर किस तरह नदी के पानी में उतरकर पूजा-अर्चना करेंगे, ये चिंता का विषय बना हुआ है.
यमुना की सफाई क्यों है जरूरी?
छठ व्रतधारियों के लिए यमुना सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि आस्था का बड़ा केंद्र है. चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में व्रती नदी और जलाशयों में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. लेकिन जब यमुना में प्रदूषित पानी और गंदगी का सामना करना पड़ रहा हो, तो श्रद्धालुओं के मन में कई सवाल उठना लाजिमी है.
श्रद्धालुओं ने क्या कहा?
श्रद्धालुओं का कहना है कि हर साल छठ पूजा से पहले यमुना की सफाई और प्रदूषण खत्म करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी तस्वीर में अब भी बदलाव की जरूरत दिखाई देती है. सवाल यह भी है कि क्या सरकार केवल अस्थायी छठ घाट बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेगी या फिर नजफगढ़ नाले के प्रदूषित पानी को रोकने और यमुना को पूरी तरह स्वच्छ बनाने के लिए स्थायी कदम भी उठाएगी?
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(दिल्ली से नसीम अहमद की रिपोर्ट)