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Delhi News: दिल्ली में महिलाओं के लिए एक सूचना सामने आई है. दरअसल, डीटीसी और परिवहन विभाग की बसों में महिलाओं के फ्री में सफर के लिए पिंक कार्ड को अनिवार्य कर दिया है. महिलाओं को इस बात का खास ध्यान देना होगा कि जो महिलाएं पिंक कार्ड बनवा चुकी हैं, उन्हें इसे बहुत ही सहेज के रखना होगा. ऐसा इसलिए है, क्यों अगर ये दो बार खो गया तो एक साल तक नया पिंक स्मार्ट कार्ड जारी नहीं होगा. साथ हीबसों में मिलने वाली मुफ्त सफर की सुविधा पर भी एक साल तक के लिए ब्रेक लग जाएगा.
एक साल का करना होगा इंतजार?
ये शर्तें पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड को लेकर डीटीसी और इसे जारी करने वाले संस्था की तरफ से की गई है. फिलहाल ये पिंक स्मार्ट कार्ड फ्री में बनाया जा रहा है. अगर किसी का कार्ड खो जाता है, तो महज 60 रुपये का मामूली शुल्क चुका कर नया पिंक स्मार्ट कार्ड बनवाया जा सकता है. वहीं इसके पहले पुराने कार्ड के खोने की सूचना देकर ब्लॉक करना होगा, जिससे कोई दूसरी महिला जिसके पास ये कार्ड न हो वो इस्तेमाल कर ले. वहीं अगर दूसरी बार ये कार्ड खोया तो कार्ड धारक को एक साल का इंतजार करना होगा.
क्या कहा अधिकारी ने?
DTC के सीनियर अधिकारी के अनुसार, ये व्यवस्था पिंक स्मार्ट कार्ड के बार-बार खोने और उसके संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए की गई है. साथ ही कार्ड धारक इसके प्रति गंभीर रह सके इसके लिए की गई है. ऐसे में कार्ड बदलने की प्रक्रिया को कंट्रोल करने का प्रावधान किया गया है.
डीटीसी की क्या है शर्त
पहली बार कार्ड फ्री में बनेगा
वहीं इसे दोबारा बनवाने के लिए आपको 60 रुपये खर्च करने होंगे
तीसरी बार बनवाने के लिए एक साल तक का इंतजार करना होगा
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
बाहरी राज्य की महिलाएं इस पिंक कार्ड के लिए पात्र नहीं हैं. इसे लेकर फर्जीवाड़ा भी शुरू हो गया है. डीटीसी की एक बस का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ. कंडक्टर का फर्जीवाड़ा इसमें पकड़ा गया. कार्ड धारक महिला इसमें बता रही है कि उसने पिंक कार्ड 250 रुपये देकर कार्ड जारी कराए हैं, जबकि वह दिल्ली की रहने वाली नहीं है.
टिकट के नाम पर भ्रष्टाचार
आरोप है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान पिंक टिकट जारी करने के नाम पर भ्रष्टाचार किया गया. इनकी संख्या में हेराफेरी की गई है. वहीं अब की बात करें, तो पिंक स्मार्ट कार्ड के जरिये फ्री सफर करने वाली महिला का पूरा रिकॉर्ड सर्वर में दर्ज हो जाएगा. फिर इसके आधार पर भुगतान किया जाएगा. इससे हेराफेरी करना आसान नहीं होगा.