सत्य निकेतन हादसे के बाद बड़ा सवाल: दिल्ली में PG चलाने के क्या हैं नियम और कितनी जरूरी है Fire NOC?
सत्य निकेतन हादसे से सबसे बड़ी सीख यह मिली है कि PG चुनते समय सिर्फ किराया और लोकेशन न देखें. बिल्डिंग की लीगैलिटी, अप्रूव्ड कंस्ट्रक्शन, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट , निकलने के रास्ते और बिल्डिंग की मौजूदा हालत के बारे में पूछना भी उतना ही जरूरी है.
Delhi PG Rules: दिल्ली के सत्य निकेतन में PG के तौर पर इस्तेमाल होने वाली एक मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग के गिरने से सात लोगों की मौत हो गई है. इस हादसे ने राजधानी में PG और प्राइवेट स्टूडेंट हाउसिंग की सेफ्टी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस हादसे ने यह भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि किसी घर या बिल्डिंग को PG में बदलने से पहले किन नियमों का पालन करना चाहिए और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (NOC) कब जरूरी होता है.
सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र प्राइवेट PG में रहते हैं. दिल्ली में छात्र हाउसिंग की मांग और यूनिवर्सिटी हॉस्टल के सीमित ऑप्शन की वजह से प्राइवेट PG पर निर्भरता बढ़ गई है. दिल्ली यूनिवर्सिटी में हॉस्टल बेड की उपलब्धता स्टूडेंट की संख्या से काफी कम है, जिससे बड़ी संख्या में स्टूडेंट प्राइवेट PG और किराए के घरों की ओर रुख कर रहे हैं.
ऐसे में, PG को सिर्फ कमरे किराये पर लेने की जगह समझना सही नहीं है. बिल्डिंग का इस्तेमाल करने की इजाजत, कंस्ट्रक्शन की कानूनी मान्यता, ऊंचाई, रहने वालों की संख्या, फायर सेफ्टी और स्थानीय नियमों का पालन ये सभी फैक्टर जरूरी हो जाते हैं.
PG और रेगुलर रहने की जगह में क्या अंतर है?
एक या दो किराएदारों के साथ घर रखना और पूरी बिल्डिंग को बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स के लिए PG के तौर पर चलाना, एक ही बात नहीं मानी जा सकती. बिल्डिंग का असल इस्तेमाल उसके मंजूर इस्तेमाल और लागू बिल्डिंग नियमों के हिसाब से होना चाहिए.
दिल्ली का मास्टर प्लान कुछ खास हालात में हॉस्टल/पेइंग-गेस्ट रहने की इजाजत देता है. PG अपने आप में कोई मना की हुई एक्टिविटी नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बिना जरूरी परमिशन और सेफ्टी स्टैंडर्ड के किसी भी रेजिडेंशियल बिल्डिंग में बड़ी संख्या में लोगों को रखा जा सकता है.
फायर NOC की जरूरत कब होती है?
दिल्ली फायर सर्विस के नियम अलग-अलग तरह की बिल्डिंगों के लिए उनकी ऊंचाई और इस्तेमाल के आधार पर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की जरूरत बताते हैं. दिल्ली फायर सर्विस रूल्स, 2010 के रूल 27 के मुताबिक, 12 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाले होटल और गेस्ट हाउस और खास कैटेगरी की दूसरी बिल्डिंगें फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के तहत आती हैं. ये नियम रेजिडेंशियल, एजुकेशनल, इंस्टीट्यूशनल, कमर्शियल और दूसरी बिल्डिंगों के लिए अलग-अलग स्टैंडर्ड तय करते हैं.
इसलिए सिर्फ यह कहना कि PG एक घर है, काफी नहीं है. बिल्डिंग का असल इस्तेमाल, ऊंचाई, मंजिलों की संख्या और रहने वालों की संख्या जैसे फैक्टर यह तय करने में जरूरी हैं कि कौन सी फायर सेफ्टी जरूरतें लागू होती हैं.
MCD ने पहले PG और कोचिंग सेंटर के बारे में साफ किया था कि 9 मीटर से ज्यादा ऊंचाई और 20 से ज्यादा लोगों की कैपेसिटी वाली बिल्डिंग के लिए फायर NOC की जरूरत हो सकती है. इसलिए, PG चलाने वालों को बिल्डिंग की कैटेगरी और लागू नियमों को संबंधित डिपार्टमेंट से कन्फर्म कर लेना चाहिए.
फायर NOC सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं
फायर NOC सिर्फ सर्टिफिकेट लेने के बारे में नहीं है. इसका मकसद यह पक्का करना है कि आग लगने की स्थिति में बिल्डिंग में सुरक्षित निकलने का इंतजाम हो और आग बुझाने की जरूरी सुविधाएं मौजूद हों.
दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक, चुनी गई बिल्डिंग को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट प्रोसेस के दौरान जरूरी फायर सेफ्टी उपायों का पालन करना होगा. डिपार्टमेंट ने बिल्डिंग मालिकों और बिल्डरों को सलाह दी है कि NOC के लिए अप्लाई करने से पहले लागू फायर सेफ्टी गाइडलाइंस का पालन पक्का कर लें.
फायर NOC हमेशा के लिए वैलिड नहीं होते. यह भी एक जरूरी बात है जिसे PG चलाने वालों और रहने वालों को समझना चाहिए. दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट हमेशा के लिए वैलिड नहीं होता है.
रहने की जगहों (होटल को छोड़कर) के लिए FSC को पांच साल बाद और होटलों समेत दूसरी रहने की जगहों के लिए तीन साल बाद रिन्यू करवाना होगा. डिपार्टमेंट ने कहा है कि रिन्यूअल के लिए एप्लीकेशन एक्सपायरी डेट से कम से कम छह महीने पहले जमा करनी होगी. इसलिए, PG में पुराना फायर NOC दिखाने का मतलब यह नहीं है कि वह अभी भी वैलिड है.
सिर्फ Fire NOC से कोई बिल्डिंग सेफ नहीं हो जाती
सत्य निकेतन हादसे से सबसे बड़ी सीख यह मिली है कि Fire Safety और Structural Safety दो अलग-अलग चीजें हैं. Fire NOC मुख्य रूप से इमरजेंसी में आग से सुरक्षा और सुरक्षित निकासी से जुड़ा होता है. किसी बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल मजबूती एक अलग मामला है. उदाहरण के लिए, अगर किसी बिल्डिंग के पास फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट है, लेकिन बाद में:
बिना इजाजत के एक और मंज़िल जोड़ी जाती है.
किसी दीवार या कॉलम में बदलाव किया जाता है.
बेसमेंट में खुदाई की जाती है.
भार उठाने वाले स्ट्रक्चर से छेड़छाड़ की जाती है.
गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन किया जाता है.
या बिल्डिंग की हालत खराब हो जाती है.
तो सिर्फ Fire NOC को पूरी तरह से सेफ नहीं माना जा सकता.
सत्य निकेतन हादसे के बाद जो बातें सामने आई हैं, उनसे बेसमेंट में मरम्मत/कंस्ट्रक्शन के काम और बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल हालत पर सवाल उठे हैं. मामले की जांच से ही हादसे का असली कारण और जिम्मेदारी पता चलेगी.
PG में जाने से पहले स्टूडेंट्स को क्या चेक करना चाहिए?
अगर आप दिल्ली में PG लेने के बारे में सोच रहे हैं तो सिर्फ किराये, मेट्रो एक्सेस और कमरे की सुविधाओं पर ही ध्यान न दें. बिल्डिंग की सुरक्षा भी प्राथमिकता होनी चाहिए.
1. क्या बिल्डिंग कानूनी तौर पर बनी है?
मालिक से पूछें कि क्या बिल्डिंग के पास अप्रूव्ड मैप और कंस्ट्रक्शन परमिट है. अगर असली फ्लोर प्लान अप्रूव्ड प्लान से अलग हैं तो सावधान रहें.
2. फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट मांगें
जहां लागू हो, ऑपरेटर से फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट मांगें और उसकी वैलिडिटी वेरिफाई करें.
3. इमरजेंसी एग्ज़िट चेक करें
कमरे का एग्जिट साफ और आसानी से पहुंचने लायक होना चाहिए. इमरजेंसी में अगर सिर्फ एक पतला एग्जिट है, तो यह एक गंभीर चिंता का विषय हो सकता है.
4. क्या सीढ़ियों और वॉकवे पर कोई सामान है?
इमरजेंसी में सेकंड भी बहुत जरूरी होते हैं. सीढ़ियों, कॉरिडोर और एग्जिट पर कोई सामान, फर्नीचर या दूसरी रुकावटें नहीं होनी चाहिए.
5. पक्का करें कि बेसमेंट में क्या हो रहा है.
अगर PG बिल्डिंग में बेसमेंट है और खुदाई, तोड़फोड़ या बड़ा कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है तो रहने वालों को बता देना चाहिए. स्ट्रक्चर में बदलाव एक्सपर्ट की देखरेख में ही किए जाने चाहिए.
6. खराब हालत को नजरअंदाज न करें.
बड़ी दरारें, लगातार नमी, दीवारों का ढीला होना, या छत या बीम को गंभीर नुकसान के निशान को छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
PG ऑपरेटर की क्या जिम्मेदारी है?
PG ऑपरेटर की जिम्मेदारी सिर्फ किराए के लिए कमरे देने से कहीं ज्यादा है. उन्हें यह पक्का करना होगा कि इस्तेमाल की जा रही बिल्डिंग लागू नियमों का पालन करती हो और जरूरी सुरक्षा स्टैंडर्ड का पालन करती हो.
MCD लाइसेंसिंग सिस्टम में आग से सुरक्षा के नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी भी आवेदक/लाइसेंस लेने वाले पर डाली गई है. MCD पोर्टल साफ करता है कि जहां आग से सुरक्षा सर्टिफिकेट की जरूरत है, वहां उसे लेना आवेदक की जिम्मेदारी है.
दिल्ली में PG सिस्टम पर अब सवाल क्यों उठ रहे हैं? सत्य निकेतन हादसे ने न सिर्फ एक बिल्डिंग की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, बल्कि दिल्ली में तेजी से बढ़ते स्टूडेंट हाउसिंग और PG कल्चर पर भी बहस छेड़ दी है.
सत्य निकेतन और मुखर्जी नगर जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में स्टूडेंट प्राइवेट रहने की जगह और PG पर निर्भर हैं. वहीं, दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे इंस्टीट्यूशन में उपलब्ध हॉस्टल की क्षमता कुल स्टूडेंट की संख्या से काफ़ी कम है. इसीलिए, कई इलाकों में समय के साथ छोटी रहने की बिल्डिंग को बड़े PG में बदल दिया गया है. अगर रहने की बिल्डिंग का इस्तेमाल बढ़ता है, लेकिन सुरक्षा और रेगुलेटरी निगरानी एक साथ नहीं बढ़ती है तो समस्या गंभीर हो सकती है.
अब सरकार और MCD के सामने एक बड़ी चुनौती
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में गैर-कानूनी और असुरक्षित कंस्ट्रक्शन के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की बात हो रही है. MCD ने कहा है कि वह चार मंजिल से ज्यादा बड़े गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन को सील कर देगी. लेकिन असली चुनौती सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई करना नहीं है. PG, हॉस्टल और स्टूडेंट के रहने की जगहों का पहले से रेगुलर इंस्पेक्शन करना बहुत जरूरी है, ताकि हादसा होने से पहले ही किसी भी खतरनाक बिल्डिंग की पहचान की जा सके.