Delhi में PG रेगुलेशन पॉलिसी पर तेज हुआ काम, 1-1.5 महीने में लाने की तैयारी: आशीष सूद
दिल्ली में निजी PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर सरकार ने रेगुलेशन पॉलिसी बनाने का काम तेज कर दिया है. मंत्री आशीष सूद ने छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं. सरकार मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और अन्य स्टेकहोल्डर्स से चर्चा के बाद एक से डेढ़ महीने में PG और कोचिंग रेगुलेशन पॉलिसी लाने की तैयारी कर रही है.
Delhi News: दिल्ली में निजी PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार ने कवायद तेज कर दी है. दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने राजधानी के अलग-अलग इलाकों में PG में रहने वाले छात्रों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं. इस दौरान छात्रों ने किराए के साथ-साथ PG में मिलने वाली सुविधाओं, एग्रीमेंट के पालन, संचालकों की जवाबदेही और सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें सामने रखीं.
मंत्री आशीष सूद ने बताया कि प्राइवेट PG और कोचिंग संस्थानों को रेगुलेट करने के लिए पॉलिसी तैयार करने की दिशा में काम चल रहा है. मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स से चर्चा के बाद अगले एक से डेढ़ महीने में पॉलिसी लाने का प्रयास किया जा रहा है.
दिल्ली में नई PG पॉलिसी
आशीष सूद ने कहा कि PG में रहने वाले छात्रों से बातचीत के बाद सरकार ने कोचिंग संस्थानों और PG को रेगुलेट करने के लिए पॉलिसी बनाने की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है. उन्होंने बताया कि एक दिन पहले उपराज्यपाल के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी.
सरकार ऐसी नीति लाने पर विचार कर रही है, जिसके तहत दिल्ली में संचालित होने वाले कोचिंग संस्थानों और निजी PG को नियमन के दायरे में लाया जा सके. इसी सिलसिले में दिल्ली यूनिवर्सिटी और इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के कैंपस से आने वाले छात्रों से बातचीत कर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझने की कोशिश की गई.
छात्रों ने बताई सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं
छात्रों ने सरकार के सामने बताया कि PG में भारी किराया देने के बावजूद उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इनमें पर्याप्त सुविधाओं का अभाव, एग्रीमेंट के मुताबिक सुविधाएं नहीं मिलना, संचालकों की जवाबदेही और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं. छात्रों का कहना है कि PG में सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, जबकि इसके लिए उन्हें काफी अधिक किराया देना पड़ता है. छात्रों ने अपनी समस्याओं को सरकार के सामने रखा, जिस पर मंत्री की ओर से उन्हें सुरक्षा और आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया.
छात्रों की शिकायतों के लिए पोर्टल बनाने की तैयारी
सरकार की ओर से छात्रों की शिकायतों और सुझावों को एक पोर्टल पर उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई जा रही है. अर्बन डेवलपमेंट विभाग पहले से ही इस दिशा में काम कर रहा था, लेकिन हालिया घटना के बाद गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा.
पॉलिसी तैयार करने के दौरान छात्रों, एजेंसियों, अभिभावकों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे. इसके बाद मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के साथ चर्चा, कैबिनेट में विचार-विमर्श और सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के बाद अगले एक से डेढ़ महीने में पॉलिसी लाने का प्रयास किया जाएगा.
PG संचालन में जवाबदेही तय करना जरूरी
आशीष सूद ने एक बड़ी समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि कई मामलों में जिस बिल्डिंग में PG चल रहा होता है, वह किसी और व्यक्ति की होती है, जबकि उसका संचालन कोई दूसरा व्यक्ति कर रहा होता है. ऐसे मामलों में यह तय करना जरूरी है कि किसी भी घटना या लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी. सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें PG संचालकों की जिम्मेदारी और जवाबदेही स्पष्ट हो.
नए हॉस्टल के लिए बढ़ाया गया FAR
मंत्री ने बताया कि सरकार ने नए हॉस्टल बनाने के लिए FAR (Floor Area Ratio) बढ़ाने का फैसला भी किया है. केंद्र सरकार की मदद लेकर दिल्ली में नए हॉस्टल तैयार करने की दिशा में भी काम किया जाएगा.
दिल्ली में दूसरे शहरों से दो लाख से अधिक छात्र पढ़ने के लिए आते हैं. ऐसे में हॉस्टल की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है. सरकार का मानना है कि इस कमी को दूर करने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी भी जरूरी होगी.
रीडेवलपमेंट के लिए FAR बढ़ाए जाने के बावजूद निजी खिलाड़ियों की भूमिका बनी रहेगी. इसके अलावा नरेला में मौजूद इमारतों का छात्रों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं, इस विकल्प पर भी काम किया जा रहा है.
असुरक्षित निर्माण पर होगी कार्रवाई
आशीष सूद ने कहा कि सरकार असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का विरोध करने वालों की तरह नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी असुरक्षित निर्माण या लापरवाही की स्थिति में कार्रवाई की जाएगी.
सौरभ भारद्वाज पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग केवल सनसनी फैलाकर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना चाहते हैं. उन्होंने मलबे में फंसे लोगों के वीडियो बनाए जाने और उन्हें साझा किए जाने का हवाला देते हुए जैमर को लेकर उठाए गए सवाल पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ऐसे लोगों पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस समय सबसे जरूरी मुद्दा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
अधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी
अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर आशीष सूद ने कहा कि इतिहास में पहली बार किसी डिप्टी कमिश्नर को निलंबित किया गया है. उन्होंने कहा कि ये तकनीकी विषय हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कोई अधिकारी जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
फिलहाल सरकार निजी PG को रेगुलेट करने के लिए पॉलिसी तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. छात्रों से मिले सुझावों, संबंधित एजेंसियों और अभिभावकों की राय को भी इसमें शामिल किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य आने वाले एक से डेढ़ महीने में पॉलिसी लाने का है.