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विरोध प्रदर्शन में पुलिस-RAF के लिए बॉडी कैमरा जरूरी करने की मांग, दिल्ली HC में याचिका दाखिल

दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में विरोध प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिस-RAF जवानों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरे अनिवार्य करने और फुटेज के सुरक्षित स्टोरेज की व्यवस्था की मांग की गई है.

Written By Renu Akarniya
Published: Oct 06, 2026, 07:40 PM IST | Updated: Oct 06, 2026, 07:46 PM IST
Image Credit: AI GENERATED IMAGE
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Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका फाइल की गई है, जिसमें भीड़ कंट्रोल और विरोध प्रदर्शनों के लिए तैनात दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरे (BWCs) जरूरी बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है.

चाहत राघव ने यह याचिका जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद फाइल की, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से जुड़े प्रदर्शन शामिल हैं. याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि ऐसे प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग से जुड़ी घटनाओं को ज्यादातर वहां मौजूद लोगों द्वारा मोबाइल फोन रिकॉर्डिंग के जरिए रिकॉर्ड किया गया था.

इस याचिका में अधिकारियों को सही नियम, रेगुलेशन या एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है, जिसमें भीड़ कंट्रोल ड्यूटी के लिए तैनात पुलिस और RAF जवानों के लिए बॉडी कैमरे पहनना जरूरी हो.

इसमें ऐसे कैमरों से रिकॉर्ड किए गए फुटेज के स्टोरेज, इंटीग्रिटी, रिटेंशन और सबूत के तौर पर इस्तेमाल को कंट्रोल करने के लिए एक पूरा सिस्टम भी मांगा गया है, ताकि रिकॉर्डिंग विरोध प्रदर्शनों और दूसरे भीड़ कंट्रोल ऑपरेशन के दौरान हुई घटनाओं के एक ऑथेंटिकेटेड रिकॉर्ड के तौर पर काम कर सकें.

याचिका के मुताबिक, जरूरी बॉडी कैमरे अकाउंटेबिलिटी तय करने में मदद करेंगे और कानून लागू करने वाले लोगों और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का सही रिकॉर्ड देंगे. याचिका में कहा गया है कि पुलिस वालों पर ज्यादा बल इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं, वहीं कुछ प्रदर्शनकारियों पर पुलिस वालों पर हमले और तोड़-फोड़ के भी आरोप लगे हैं.

याचिकाकर्ता ने बॉडी-वॉर्न कैमरों के इस्तेमाल के बारे में सुप्रीम कोर्ट की बातों पर भरोसा किया है और सर्च और जब्ती ऑपरेशन की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग से जुड़े भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के नियमों का भी जिक्र किया है.

याचिका में रैलियों और जुलूसों के रेगुलेशन से जुड़े 2022 के दिल्ली पुलिस स्टैंडिंग ऑर्डर का भी जिक्र है. पिटीशनर के मुताबिक, यह ऑर्डर थर्ड-पार्टी वीडियोग्राफी के जरिए विरोध से जुड़ी पुलिसिंग की रिकॉर्डिंग का प्रोविजन करता है.

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि थर्ड-पार्टी वीडियोग्राफी काम का डॉक्यूमेंटेशन दे सकती है, लेकिन इसकी अपनी लिमिटेशन हैं, खासकर भीड़ कंट्रोल ऑपरेशन में सीधे तौर पर शामिल लोगों के नजरिए से घटनाओं को कैप्चर करने में. याचिका में कहा गया है कि बॉडी-वॉर्न कैमरे घटनाओं का ज्यादा लगातार और पूरा रिकॉर्ड देंगे.

याचिका में दिल्ली पुलिस द्वारा बॉडी-वॉर्न कैमरे खरीदने के लिए पहले से उठाए गए कदमों की ओर भी इशारा किया गया है. इसमें कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने 1,500 बॉडी-वॉर्न कैमरे खरीदने के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के जरिए एक टेंडर निकाला है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 7.4 करोड़ रुपये है, जो लगभग 49,333 रुपये प्रति यूनिट है.

याचिका में खास तौर पर 21 जुलाई 2026 की घटनाओं का जिक्र किया गया है, जिसमें विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस और RAF कर्मियों द्वारा बल प्रयोग का आरोप लगाया गया है. इसमें दावा किया गया है कि पब्लिक डोमेन में मौजूद फुटेज में पुलिस कर्मियों और प्रदर्शनकारियों दोनों को चोटें आई हैं.

इसमें आगे 23 जुलाई को हुई एक रिव्यू मीटिंग का जिक्र किया गया है, जिसमें याचिका के अनुसार, RAF के इंस्पेक्टर जनरल ने माना कि तैनाती के दौरान इस्तेमाल किया गया कुछ बल तय स्टैंडर्ड के अनुसार नहीं था. इसलिए याचिकाकर्ता ने विरोध प्रदर्शनों और भीड़ को कंट्रोल करने की स्थितियों के दौरान बॉडी-वॉर्न कैमरों के इस्तेमाल और ऑपरेशन को कंट्रोल करने के लिए एक पूरा फ्रेमवर्क मांगा है, जिसमें यह पक्का करने के लिए नियम हों कि फुटेज सुरक्षित रूप से सुरक्षित रहे और सही जांच या सबूत के लिए उपलब्ध रहे.

याचिका में जवाब देने वालों में भारत सरकार, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के डायरेक्टर जनरल और ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D) शामिल हैं.

याचिकाकर्ता का मकसद यह पक्का करना है कि भीड़ को कंट्रोल करने के ऑपरेशन एक ऑथेंटिकेटेड ऑडियो-विजुअल रिकॉर्ड से सपोर्टेड हों. जिसके बारे में याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे अधिकारियों, अदालतों और दूसरे स्टेकहोल्डर्स को घटनाओं का क्रम तय करने और विरोध प्रदर्शनों से उठने वाले आरोपों की जांच करने में मदद मिल सकती है. 


(INPUT: ANI)

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About the Author

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
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