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Kangana Ranaut के AI डीपफेक और अश्लील कंटेंट पर रोक, Delhi HC ने मेटा को हटाने के दिए निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने कंगना रनौत के नाम, फोटो, आवाज और पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल करने वाले AI डीपफेक, अश्लील कंटेंट, फर्जी भाषण और झूठे एंडोर्समेंट पर रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों को चिह्नित कंटेंट हटाने का निर्देश दिया है.

Written By Renu Akarniya
Published: Oct 12, 2026, 10:14 PM IST | Updated: Oct 12, 2026, 10:19 PM IST
Image Credit: Kangana Ranaut Instagram
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Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड एक्ट्रेस और BJP MP कंगना रनौत की पहचान और पर्सनैलिटी के बिना इजाजत इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. कोर्ट के आदेश में उनके नाम, इमेज, आवाज और दूसरे पहचान वाले फीचर्स के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है. इसमें AI से बने डीपफेक वीडियो, एडिटेड इमेज, नकली भाषण और झूठे विज्ञापन या एंडोर्समेंट शामिल हैं.

लाइव लॉ के मुताबिक, जस्टिस विकास महाजन ने एक अंतरिम आदेश जारी किया, जिसमें मेटा समेत संबंधित पार्टियों को कंगना रनौत द्वारा पहचाने गए कथित आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया गया. कोर्ट ने ऐसे कंटेंट को री-डिस्ट्रीब्यूशन से हटाने और इसे हमेशा के लिए हटाने का भी निर्देश दिया.

कंगना रनौत ने केस क्यों किया?
कंगना रनौत ने कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइट पर उनके नाम और इमेज का इस्तेमाल करके गलत जानकारी फैलाई जा रही है. उनके मुताबिक कुछ साइट्स ने एडिटेड वीडियो और इमेज पोस्ट किए, जबकि दूसरे AI से बने कंटेंट में उन्हें ऐसे बयान देते या ऐसे काम करते हुए दिखाया गया, जो उन्होंने कभी नहीं किए.

याचिका में यह भी कहा गया कि कुछ कंटेंट में उनकी इमेज को गलत तरीके से दिखाया गया है और इससे उनकी पब्लिक इमेज और रेप्युटेशन को नुकसान हो सकता है. कंगना ने कहा कि ऐसे कंटेंट ने उनकी पर्सनैलिटी, पहचान और पब्लिसिटी के अधिकारों का उल्लंघन किया है.

AI डीपफेक और पोर्नोग्राफिक कंटेंट पर सख्ती
केस से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की जांच करने के बाद कोर्ट ने पाया कि कुछ कंटेंट में AI से बनी पोर्नोग्राफिक, मॉर्फ्ड और सेक्सुअली आपत्तिजनक इमेज या वीडियो शामिल थे. कोर्ट ने ऐसे कंटेंट को हटाने की जरूरत पर जोर दिया.

कोर्ट ने यह भी माना कि किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या पहचान का इस्तेमाल करके नकली वीडियो और ऑडियो बनाना लोगों को गुमराह कर सकता है. देखने वाले ऐसे कंटेंट को असली समझ सकते हैं, खासकर अगर वह व्यक्ति किसी खास बयान या एक्शन से जुड़ा हो.

फर्जी अकाउंट और झूठे एंडोर्समेंट पर भी बैन
कोर्ट ने कंगना रनौत के नाम पर ऐसे नकली अकाउंट, पेज, प्रोफाइल, चैनल या वेबसाइट बनाने और चलाने पर भी रोक लगा दी, जो किसी प्रोडक्ट, बयान, एक्टिविटी या कैंपेन से जुड़े होने का झूठा दावा करते हैं.

ऑर्डर के मुताबिक, उनकी इजाजत के बिना उनकी आवाज, फोटो, नाम या दूसरी पहचान वाली खासियतों का इस्तेमाल करके AI कंटेंट, डीपफेक, बदला हुआ वीडियो/ऑडियो और मनगढ़ंत भाषण बनाने या फैलाने की इजाजत नहीं होगी.

कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने पहली नजर में माना कि कंगना रनौत ने मजबूत केस पेश किया है. कोर्ट के मुताबिक, अगर ऐसे कंटेंट पर बैन नहीं लगाया गया तो उनकी इमेज और रेप्युटेशन को नुकसान हो सकता है, जिसकी भरपाई सिर्फ पैसे से करना मुश्किल होगा.

यह एक अंतरिम ऑर्डर है यानी केस में अभी आखिरी फैसला नहीं आया है. हालांकि ऑर्डर में यह साफ है कि कोर्ट उन मामलों में कानूनी सुरक्षा दे सकता है, जहां किसी पब्लिक फिगर की पहचान का इस्तेमाल करके गुमराह करने वाला AI कंटेंट या डीपफेक फैलाया जाता है.

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About the Author

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
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