दिल्ली सरकार ने राजधानी के सभी सरकारी स्कूलों में समर्पित चिकित्सा सुविधाएं स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी प्रस्ताव तैयार किया है.
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार, शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी स्कूलों में मेडिकल सुविधाएं स्थापित करेगी. इस पहल का उद्देश्य स्कूल समय के दौरान विद्यार्थियों को तत्काल प्राथमिक उपचार और आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराना है.
सरकारी स्कूलों में प्राथमिक इलाज के लिए मेडिकल सुविधाएं
विद्यार्थी अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा स्कूलों में बिताते हैं. स्कूल के समय में छोटी-मोटी चोट लगना, अचानक तबीयत खराब होना, थकान, चक्कर आना और असहज महसूस करना जैसी परिस्थितियां सामान्य हैं. वर्तमान में कई सरकारी स्कूलों में ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों को तत्काल देखभाल उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित स्थान या बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं. इसके कारण कई बार इलाज में अनावश्यक देरी होती है और विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी चिंता का सामना करना पड़ता है.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप यह योजना स्कूलों को सुरक्षित, समावेशी और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
प्रस्ताव की प्रमुख विशेषताएं
1. प्राथमिक इलाज की सुविधा: स्कूलों में स्थापित मेडिकल कक्षों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में घाव की ड्रेसिंग, ओआरएस (ORS) देना और आवश्यकता पड़ने पर विद्यार्थियों को कुछ समय आराम करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. स्कूलों में जांच संबंधी चिकित्सा सेवाएं या डॉक्टर के पर्चे पर दी जाने वाली दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी.
2. प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती: प्रत्येक स्कूल में एक प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, जैसे सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) या बहुउद्देशीय स्वास्थ्यकर्मी (Multipurpose Health Worker) को तैनात किया जाएगा. ये स्वास्थ्यकर्मी विद्यार्थियों की तत्काल स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं और किशोरावस्था से जुड़े स्वास्थ्य विषयों में सहायता प्रदान करेंगे.
3. छात्राओं के लिए विशेष सुविधा: मेडिकल कक्ष में छात्राओं को मासिक धर्म से संबंधित आवश्यकताओं के दौरान सुरक्षित, निजी और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराया जाएगा.
4. चरणबद्ध क्रियान्वयन और वित्तीय प्रावधान: सभी 1,086 सरकारी स्कूलों को इस योजना के दायरे में लाने के लिए अनुमानित वार्षिक वित्तीय व्यय ₹48.87 करोड़ होगा.
योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. पहले चरण में उन स्कूलों में मेडिकल सुविधाएं स्थापित की जाएंगी, जहां इसके लिए अलग कमरे उपलब्ध हैं. इसके बाद वैकल्पिक कमरों और पोर्टा केबिन के माध्यम से अन्य स्कूलों में भी यह सुविधा सुनिश्चित की जाएगी.
दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और देखभालपूर्ण वातावरण मिलना चाहिए. जब स्कूल के समय में किसी विद्यार्थी की तबीयत खराब होती है या उसे चोट लगती है तो अभिभावकों और शिक्षकों को यह भरोसा होना चाहिए कि स्कूल परिसर में ही तत्काल प्राथमिक उपचार और उचित देखभाल की सुविधा उपलब्ध है.
दिल्ली सरकार की यह पहल सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण को प्राथमिकता देने तथा उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
(तान्या चूग की रिपोर्ट)