Delhi News: गांधी विहार में तिरछी खड़ी 7 से ज्यादा इमारतें, हादसे का खतरा; 2023 के नोटिस के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
Delhi News: दिल्ली के गांधी विहार में सात से ज्यादा बहुमंजिला इमारतों के झुकने से सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ इमारतों में अब भी परिवार रह रहे हैं. दावा है कि नगर निगम ने 2023 में नोटिस जारी किए थे, लेकिन इसके बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
Delhi News: दिल्ली के गांधी विहार इलाके में कई बहुमंजिला इमारतों की हालत चिंताजनक बनी हुई है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके की सात से ज्यादा बिल्डिंग झुक गई हैं, जबकि कुछ में अब भी परिवार रहते हैं. इन बिल्डिंगों की हालत रहने वालों और आने-जाने वालों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है.
ज़ी मीडिया ने ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इन बिल्डिंग्स की हालत पहले ही सामने आ चुकी है और नगर निगम ने 2023 में नोटिस भी जारी किए थे तो उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने की दुखद घटना के बाद, जर्जर और खतरनाक बिल्डिंग को संभालने का प्रशासन का तरीका एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है.
गांधी विहार इलाके में कई इमारतें एक तरफ झुकी हुई दिख रही हैं. एक के बाद एक, लगभग पांच इमारतें झुकी हुई बताई जा रही हैं. इनमें से एक बिल्डिंग में कथित तौर पर एक कोचिंग सेंटर है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस बिल्डिंग के एक हिस्से को जैक से सहारा दिया गया है.
कुछ बिल्डिंग्स के बीच इतना बड़ा अंतर है कि उनकी बनावट को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इन बिल्डिंग्स की जांच नहीं की गई और समय पर जरूरी कार्रवाई नहीं की गई, तो कभी भी कोई बड़ी मुसीबत आ सकती है.
सबसे चिंता की बात यह है कि लोग अभी भी इन बिल्डिंग्स में रह रहे हैं. घरों के बाहर सूख रहे कपड़े और अंदर परिवारों की मौजूदगी से साफ पता चलता है कि कई लोग इन बिल्डिंग्स से बाहर नहीं निकले हैं, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं.
इससे यह सवाल उठता है कि अगर किसी बिल्डिंग की बनावट वाकई खतरनाक है तो वहां रहने वाले परिवारों की सुरक्षा पक्का करने के लिए जिम्मेदार विभाग ने क्या कदम उठाए हैं?
आस-पास के दुकानदारों को तुरंत खतरा नहीं दिखता
इलाके में तिरछी इमारतों के आसपास कई छोटी दुकानें चल रही हैं. स्थानीय दुकानदारों से बातचीत में पता चला कि वे फिलहाल अपनी दुकानों को लेकर खास परेशान नहीं हैं. उनका कहना है कि आस-पास की बिल्डिंग्स जरूर झुकी हुई हैं, लेकिन अगर कोई बिल्डिंग गिरती है तो उन्हें लगता है कि वह उल्टी दिशा में गिरेगी. हालांकि, स्थानीय लेवल पर किसी बिल्डिंग के गिरने की दिशा का अंदाजा लगाना रिस्की हो सकता है. ऐसे मामलों में, एक्सपर्ट्स की टेक्निकल जांच से ही खतरे का सही अंदाजा लगाया जा सकता है.
DDA से जमीन मिली थी- स्थानीय लोगों का दावा
स्थानीय लोगों के मुताबिक, DDA ने 2002 के आसपास यहां जमीन अलॉट की थी, जिसके बाद इलाके में मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग्स बनाई गईं. उनका यह भी कहना है कि जमीन करीब पांच दिन पहले MCD को सौंप दी गई थी. स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि दो दिन पहले स्थानीय MLA ने इसी इलाके में एक सीवरेज पाइपलाइन का उद्घाटन किया था. उनका आरोप है कि इलाके में डेवलपमेंट के काम के बावजूद, झुकी हुई और खतरनाक हो सकने वाली बिल्डिंग्स की हालत पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया है.
डर में जी रहे लोग
गांधी विहार में इन बिल्डिंग्स के पास से हर दिन बड़ी संख्या में लोग गुज़रते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि बिल्डिंग्स की मौजूदा हालत को देखते हुए, उन्हें हमेशा किसी अनहोनी का डर बना रहता है. लोगों का कहना है कि अगर कोई मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग अचानक गिर जाती है तो यह आसपास की दुकानों, पैदल चलने वालों और दूसरी बिल्डिंग्स को अपनी चपेट में ले सकती है. इसलिए, किसी हादसे के बाद एक्शन लेने के बजाय, खतरे को पहले ही पहचानकर जरूरी कदम उठाना जरूरी है.
सत्य निकेतन हादसे के बाद फिर उठे सवाल
सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने के बाद दिल्ली में जर्जर और असुरक्षित बिल्डिंगों के खिलाफ प्रशासनिक एक्शन को लेकर बहस तेज हो गई है. हादसे के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी एक्शन लिया गया था. इसलिए, गांधी विहार में टेढ़ी-मेढ़ी बिल्डिंगों को लेकर सवाल उठना लाजमी है. अगर किसी बिल्डिंग को पहले ही खतरनाक घोषित कर दिया गया है और नोटिस जारी किया गया है तो संबंधित विभाग उसकी हालत पर नजर रखने, टेक्निकल इंस्पेक्शन करने और पब्लिक सेफ्टी पक्का करने के लिए जिम्मेदार हैं.
क्या हम एक्शन लेने से पहले किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
गांधी विहार की स्थिति ने दिल्ली में बिल्डिंग सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या संबंधित विभाग तुरंत इन बिल्डिंगों का टेक्निकल इंस्पेक्शन करेंगे? अगर कोई खतरा पाया जाता है तो क्या वहां रहने वाले परिवारों को निकाला जाएगा? और अगर बिल्डिंग नियमों के हिसाब से असुरक्षित पाई जाती हैं तो क्या उन्हें समय पर खाली कराया जाएगा या कोई और ज़रूरी एक्शन लिया जाएगा?
इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे से पहले इन खतरनाक इमारतों के खिलाफ कार्रवाई करेगा, या सत्य निकेतन जैसी घटना के बाद ही जिम्मेदारी तय करने का प्रोसेस शुरू होगा?
(दिल्ली से नसीम अहमद की रिपोर्ट)